31 अगस्त 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को बैठक: CEO नियुक्ति, चंपत राय और दान पारदर्शिता पर होगा फैसला

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राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को बैठक: CEO नियुक्ति, चंपत राय और दान पारदर्शिता पर होगा फैसला

सारांश

अयोध्या में 2 सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होगी — CEO नियुक्ति, नए प्रवक्ता का चयन और दान प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे अहम मुद्दे एजेंडे पर हैं। SIT से क्लीनचिट के बाद चंपत राय की वापसी का सवाल भी बैठक में उठ सकता है।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 2 सितंबर 2026 को दोपहर 2 से 3 बजे के बीच अयोध्या में होगी।
बैठक में CEO की नियुक्ति और नए ट्रस्ट प्रवक्ता के चयन पर निर्णय संभव।
दान और चढ़ावे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना भी एजेंडे में शामिल।
ट्रस्ट सदस्य दिनेन्द्र दास ने कहा कि चंपत राय को SIT से क्लीनचिट मिल चुकी है; ट्रस्ट में उनकी वापसी पर सामूहिक निर्णय होगा।
पाँच वर्षों में मंदिर में दर्शन और पूजा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में आयोजित होने जा रही है, जिसमें मंदिर प्रशासन से जुड़े कई अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है। ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने पुष्टि की कि बैठक दोपहर 2 से 3 बजे के बीच होगी और इसमें ट्रस्ट के सभी सदस्य भाग लेंगे।

बैठक का एजेंडा

जानकारी के अनुसार, इस बैठक में मंदिर की व्यवस्था को अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर निर्णय लिया जा सकता है। इसके साथ ही ट्रस्ट के नए प्रवक्ता के चयन पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। दान और चढ़ावे की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा समग्र प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

चंपत राय के ट्रस्ट में शामिल होने पर रुख

ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी के सवाल पर दिनेन्द्र दास ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, "अंतिम निर्णय भगवान राम की इच्छा के अनुसार ही होगा और ट्रस्ट के सदस्य आपस में विचार-विमर्श कर निर्णय लेंगे।" हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पहले से ही यह कहते आए हैं कि चंपत राय निर्दोष हैं और विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा उन्हें क्लीनचिट दिए जाने के बाद यह बात और पुख्ता हो गई है।

पूजा-पाठ व्यवस्था में सुधार

दिनेन्द्र दास ने बताया कि राम मंदिर में पूजा-अर्चना पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार ही जारी है और समय के साथ व्यवस्थाओं में स्वाभाविक सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पाँच वर्ष पूर्व की तुलना में अब श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा की व्यवस्था कहीं अधिक सुचारू हो गई है। पहले जहाँ भक्तों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, वहीं अब मंदिर परिसर में सब कुछ सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है।

आगे क्या होगा

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ट्रस्ट कथित तौर पर अपनी प्रशासनिक संरचना को नई ऊँचाई देने की दिशा में काम कर रहा है। CEO की नियुक्ति यदि होती है, तो यह मंदिर प्रबंधन में एक बड़े संस्थागत बदलाव का संकेत होगा। गौरतलब है कि जनवरी 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ट्रस्ट पर प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव लगातार बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ट्रस्ट में उनकी औपचारिक वापसी का प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है। दान प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इस बैठक में ठोस निर्णय न होने पर सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना कठिन होगा।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2 सितंबर को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठेंगे?
बैठक में CEO की नियुक्ति, नए ट्रस्ट प्रवक्ता का चयन, दान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा होने की संभावना है। चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी का प्रश्न भी उठ सकता है।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक कब और कहाँ होगी?
बैठक 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में दोपहर 2 से 3 बजे के बीच होगी। ट्रस्ट सदस्य दिनेन्द्र दास ने इसकी पुष्टि की है।
चंपत राय को SIT की क्लीनचिट क्यों मिली?
SIT ने जाँच के बाद चंपत राय को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों से मुक्त किया है। ट्रस्ट सदस्य दिनेन्द्र दास ने कहा कि वह पहले से ही उन्हें निर्दोष मानते थे और SIT की क्लीनचिट ने इसे प्रमाणित किया।
राम मंदिर में CEO की नियुक्ति क्यों जरूरी मानी जा रही है?
मंदिर की व्यवस्था को पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए CEO नियुक्ति पर विचार हो रहा है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी वृद्धि और प्रशासनिक जटिलताओं को देखते हुए यह कदम आवश्यक समझा जा रहा है।
राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था में क्या सुधार हुआ है?
ट्रस्ट सदस्य दिनेन्द्र दास के अनुसार पाँच वर्ष पहले की तुलना में अब दर्शन और पूजा-अर्चना की व्यवस्था कहीं अधिक सुचारू हो गई है। पहले जहाँ श्रद्धालुओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, वहीं अब मंदिर परिसर में सब कुछ व्यवस्थित ढंग से चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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