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राम जन्मभूमि ट्रस्ट पदाधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए, नए सिरे से हो गठन: आचार्य प्रमोद कृष्णम

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राम जन्मभूमि ट्रस्ट पदाधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए, नए सिरे से हो गठन: आचार्य प्रमोद कृष्णम

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर दान विवाद में एसआईटी जाँच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों से इस्तीफे की माँग की है। उन्होंने बिहार में भरत तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर और लखनऊ हादसे पर भी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने माँग की कि श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी एसआईटी जाँच पूरी होने तक इस्तीफा दें।
उन्होंने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की कि इस्तीफे स्वीकार कर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए।
बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर को आचार्य ने कथित तौर पर 'फर्जी' बताया और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं की कड़ी निंदा की।
लखनऊ हादसे को उन्होंने व्यवस्था की विफलता करार दिया और पूर्व-नियोजित सुरक्षा उपायों की माँग की।
आचार्य के अनुसार, राम मंदिर दान मामले में चंदा चोरी के आरोपों से करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुँची है।

धार्मिक नेता और विचारक आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 23 जून को गाजियाबाद में कहा कि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दान मामले में एसआईटी जाँच जारी रहने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की कि इस्तीफे स्वीकार किए जाएँ और ट्रस्ट का पुनर्गठन नए सिरे से किया जाए।

ट्रस्ट पर उठे सवाल और आचार्य की माँग

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर हमारे लिए आस्था का केंद्र है। इस मामले ने करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।' उनके अनुसार, श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर चिंताएँ जाहिर की गई हैं और चंदा चोरी जैसे आरोपों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को आहत किया है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'न्याय तो जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि न्याय होता हुआ दिखे।' उनकी माँग है कि जब तक एसआईटी की जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पदाधिकारियों का पद पर बने रहना नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है।

बिहार एनकाउंटर पर तीखी प्रतिक्रिया

बिहार में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह एनकाउंटर फर्जी है। उनके अनुसार, 'पहले व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, बाँधा जाता है और फिर गोली मार दी जाती है।' उन्होंने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के की जाने वाली हत्याओं को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

आचार्य ने यह भी कहा कि कथित तौर पर ब्राह्मण युवाओं को निशाना बनाकर फर्जी एनकाउंटर करना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है, जिस पर गंभीर और व्यापक चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने माँग की कि यदि कोई सच्चा एनकाउंटर होता है तो उसकी सराहना होनी चाहिए, लेकिन फर्जी एनकाउंटर को किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

लखनऊ हादसे पर व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया

लखनऊ में हुए हालिया हादसे पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे व्यवस्था की विफलता करार देते हुए कहा कि शहरों के विकास के नाम पर जो विनाश हो रहा है, वह अस्वीकार्य है। उनके अनुसार, घटना के बाद रोने-धोने से काम नहीं चलेगा — दुर्घटनाएँ रोकने के लिए पहले से विस्तृत योजना बनाना अनिवार्य है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दान प्रबंधन पर एसआईटी जाँच ऐसे समय में सामने आई है जब राम मंदिर निर्माण को लेकर पूरे देश में करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उतना ही अनिवार्य है जितना मंदिर निर्माण स्वयं।

आगे क्या होगा

एसआईटी की जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के भविष्य और पदाधिकारियों की स्थिति पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। आचार्य प्रमोद कृष्णम की अपील के बाद यह विषय धार्मिक और राजनीतिक दोनों मंचों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक सवाल यह है कि एसआईटी जाँच के दौरान ट्रस्ट का पुनर्गठन प्रशासनिक रूप से कितना जटिल होगा। राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक संस्थान में पारदर्शिता की माँग जायज है, लेकिन बिना जाँच पूरी हुए सामूहिक इस्तीफे की माँग कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित भी कर सकती है। बिहार एनकाउंटर पर उनके बयान — जो किसी न्यायिक जाँच से पहले ही 'फर्जी' की घोषणा करते हैं — पत्रकारिता की दृष्टि से सत्यापन की माँग करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन तीनों मुद्दों को अलग-अलग देखती है, जबकि आचार्य का बयान संस्थागत जवाबदेही के एक साझा धागे से इन्हें जोड़ता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से इस्तीफे की माँग क्यों की?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राम मंदिर दान मामले में एसआईटी जाँच जारी रहने तक नैतिकता के आधार पर सभी पदाधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए। उनके अनुसार, चंदा चोरी जैसे आरोपों ने करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुँचाई है और न्याय होता हुआ दिखना भी उतना ही जरूरी है।
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट दान विवाद क्या है?
अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं की जाँच एसआईटी द्वारा की जा रही है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, हालाँकि अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का क्या कहना है?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर को कथित तौर पर 'फर्जी' बताया। उन्होंने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के की जाने वाली हत्याएँ किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं और इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया।
लखनऊ हादसे पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने क्या कहा?
आचार्य ने लखनऊ हादसे को व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि शहरी विकास के नाम पर हो रहे विनाश पर चिंता जताना पर्याप्त नहीं, बल्कि दुर्घटनाएँ रोकने के लिए पहले से विस्तृत योजना बनाना अनिवार्य है।
ट्रस्ट के पुनर्गठन की माँग किससे की गई है?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सीधे प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएँ और ट्रस्ट का गठन नए सिरे से किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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