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राम मंदिर दानपात्र घोटाले पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: 'दोहरे मापदंड बर्दाश्त नहीं'

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राम मंदिर दानपात्र घोटाले पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: 'दोहरे मापदंड बर्दाश्त नहीं'

सारांश

राम मंदिर के दानपात्र में घपलेबाजी का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर घोटाला करने वाले और मूल्यों का पाठ पढ़ाने वाले — यह दोहरा मापदंड बर्दाश्त से बाहर है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 16 जून को मुर्शिदाबाद में राम मंदिर दानपात्र घोटाले पर केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की।
चौधरी ने कहा कि भारत समेत दुनियाभर के श्रद्धालुओं ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए स्वेच्छा से दान दिया था — उनकी भावनाओं से खिलवाड़ अस्वीकार्य है।
उन्होंने केंद्र सरकार को दोषियों को खोजकर कड़ी कार्रवाई करना संवैधानिक दायित्व बताया।
चौधरी ने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर घोटाला करने वाले और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले लोगों का दोहरा मापदंड बेनकाब हो गया है।
भारत-फ्रांस संबंधों पर उन्होंने कहा कि G-7/G-8 में प्रधानमंत्री की भागीदारी एक पुरानी राजनयिक परंपरा है, कोई नई उपलब्धि नहीं।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 16 जून को मुर्शिदाबाद में पत्रकारों से बातचीत में राम मंदिर दानपात्र घोटाले को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया और दोषियों के विरुद्ध तत्काल ठोस कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर हुई इस घपलेबाजी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़

चौधरी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर के श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दिया था। उनके अनुसार, दशकों के लंबे संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण की खुशी में करोड़ों लोगों ने अपनी कमाई का हिस्सा स्वेच्छा से योगदान किया था। ऐसे में दानपात्र में गड़बड़ी का सामने आना उन सभी श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ सीधा विश्वासघात है।

सिस्टम की खामियों पर सवाल

उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा कि यदि देश में राम मंदिर के दानपात्र में भी घपलेबाजी संभव है, तो इससे व्यवस्था की कमज़ोरी का सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। चौधरी ने आरोप लगाया कि एक ओर आस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता होती है और दूसरी ओर वही लोग नैतिकता व मूल्यों का पाठ पढ़ाते हैं — यह दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है।

केंद्र सरकार पर जवाबदेही की माँग

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जाँच और कार्रवाई करना केंद्र सरकार का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि दोषियों को चाहे जहाँ भी वे हों, खोजकर निकाला जाए और शीघ्र कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रकरण से यह भी स्पष्ट होगा कि सरकार की कथनी और करनी में कितना अंतर है।

भारत-फ्रांस संबंधों पर भी बोले चौधरी

इस अवसर पर चौधरी ने भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि फ्रांस के साथ भारत के संबंध वर्षों पुराने और प्रगाढ़ हैं। उन्होंने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जैक शिराक की भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि G-7 और G-8 जैसे सम्मेलनों में प्रधानमंत्री की भागीदारी कोई नई उपलब्धि नहीं, बल्कि एक स्थापित राजनयिक परंपरा है जिसका श्रेय लेने की कोई आवश्यकता नहीं।

इस पूरे विवाद में अब सभी की नज़रें केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक वैध प्रश्न है — जब देश के सर्वाधिक भावनात्मक धार्मिक स्थल के दानपात्र में अनियमितता संभव है, तो जवाबदेही का तंत्र कहाँ है? विडंबना यह है कि विपक्ष जिस मामले में जाँच की माँग कर रहा है, उसी मामले में सत्तापक्ष की चुप्पी सबसे ज़्यादा बोलती है। यदि केंद्र सरकार त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई नहीं करती, तो यह प्रकरण धार्मिक आस्था और शासन-व्यवस्था दोनों की साख पर सवाल खड़े करता रहेगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दानपात्र घोटाला क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, अयोध्या स्थित राम मंदिर के दानपात्र में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। इसमें कथित तौर पर दान की राशि के साथ घपलेबाजी की गई, जो देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए दी थी।
अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले में क्या माँग की है?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 16 जून को केंद्र सरकार से माँग की कि घोटाले में शामिल लोगों को चाहे जहाँ भी हों, खोजकर उनके विरुद्ध तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का संवैधानिक दायित्व बताया।
चौधरी ने 'दोहरे मापदंड' का आरोप किस संदर्भ में लगाया?
उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था के नाम पर राम मंदिर के दानपात्र में घपलेबाजी करते हैं और साथ ही नैतिकता व मूल्यों का पाठ पढ़ाते हैं, वे दोहरा मापदंड अपना रहे हैं। उनके अनुसार यह रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
अधीर रंजन चौधरी ने भारत-फ्रांस संबंधों पर क्या कहा?
चौधरी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच वर्षों पुराने प्रगाढ़ संबंध हैं और G-7 व G-8 सम्मेलनों में प्रधानमंत्री की भागीदारी एक स्थापित राजनयिक परंपरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी को विशेष श्रेय लेने की आवश्यकता नहीं है।
इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका क्या होनी चाहिए?
चौधरी के अनुसार, केंद्र सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकरण से सरकार की कथनी और करनी के अंतर का भी पता चलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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