26 जून 2026
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राम मंदिर दानपात्र घोटाले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन बोले — 'ऐसे आरोपों की कभी कल्पना नहीं थी'

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राम मंदिर दानपात्र घोटाले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन बोले — 'ऐसे आरोपों की कभी कल्पना नहीं थी'

सारांश

राम मंदिर के दानपात्र में कथित घपले ने उस ट्रस्ट की साख पर सवाल खड़े किए हैं जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर बनाया गया था। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने व्यक्तिगत पीड़ा जताते हुए एसआईटी जांच का समर्थन किया और मंदिर प्रशासन में आमूल सुधार की माँग की।

मुख्य बातें

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने 26 जून 2026 को राम मंदिर दानपात्र में कथित घपले पर गहरा दुख व्यक्त किया।
राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों पर हुआ था; जैन और उनके पिता इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं।
एसआईटी (SIT) पूरे मामले की जांच कर रही है; जांच पूरी होने पर आरोपपत्र अदालत में पेश होगा।
जैन ने माँग की कि मंदिर का नियंत्रण सरकारी दायरे के बाहर रहे और एक नई पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
जैन ने आलोचकों से पूछा कि वे कर्नाटक के मंदिरों के कथित कुप्रबंधन पर चुप क्यों हैं।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने 26 जून 2026 को राम मंदिर के दानपात्र में कथित घपले के आरोपों पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करनी होगी।

व्यक्तिगत पीड़ा और ट्रस्ट पर भरोसे का संकट

जैन ने कहा, 'मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि राम मंदिर ट्रस्ट पर इस तरह के आरोप लगेंगे।' उन्होंने याद दिलाया कि इस ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों पर हुआ था और इसमें कुशल एवं प्रशिक्षित लोगों को सम्मिलित किया गया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे स्वयं और उनके पिता इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, इसलिए यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत पीड़ा का विषय है।

इस्तीफों पर प्रतिक्रिया और एसआईटी जांच

दानपात्र घपले के बाद हुए इस्तीफों पर जैन ने कहा कि ये इस्तीफे नैतिक मूल्यों के आधार पर हुए हैं, किंतु इनसे जांच प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईटी (SIT) पूरे मामले की जांच कर रही है और हर पहलू की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया जाएगा। जैन ने कहा कि वे चाहते हैं कि इस मामले की गंभीरता से जांच हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

मंदिर प्रशासन में सुधार की मांग

जैन के अनुसार, उनकी यह माँग है कि मंदिर का नियंत्रण सरकारी दायरे के बाहर रहे। उन्होंने चिंता जताई कि इतने बुद्धिजीवियों को एक व्यवस्था में शामिल करने के बाद भी यदि इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, तो यह गंभीर आत्मचिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि एक नई, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनानी होगी।

विरोधियों पर सीधा निशाना

जैन ने आरोप लगाया कि जो लोग राम मंदिर के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे, जिन्होंने राम भक्तों पर गोली चलवाई और रामायण की चौपाइयों की गलत व्याख्या से लोगों को गुमराह किया, ऐसे लोग कभी नहीं चाहते कि स्थिति सामान्य हो। उन्होंने कहा कि इन लोगों को अब एक राजनीतिक मुद्दा मिल गया है।

कर्नाटक के मंदिरों का संदर्भ

जैन ने यह भी पूछा कि जो लोग अयोध्या के राम मंदिर दानपात्र घोटाले का मुद्दा उठा रहे हैं, वे कर्नाटक के मंदिरों में कथित कुप्रबंधन पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सभी धार्मिक संस्थाओं के कुप्रबंधन पर समान रूप से बोलना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र बार-बार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इससे राजनीतिक लाभ मिलता है। यह मामला आने वाले दिनों में धार्मिक ट्रस्टों की जवाबदेही और पारदर्शिता की बहस को और तेज कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कानूनी जवाबदेही तक जाएगा। कर्नाटक के मंदिरों का संदर्भ देकर जैन ने बहस को व्यापक बनाने की कोशिश की है, लेकिन यह तुलनात्मक तर्क अयोध्या मामले की गंभीरता को कम नहीं करता — बल्कि यह सवाल उठाता है कि देश भर के धार्मिक ट्रस्टों की निगरानी के लिए एक समान और स्वतंत्र तंत्र क्यों नहीं है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दानपात्र घोटाला क्या है?
राम मंदिर के दानपात्र में कथित घपले के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद ट्रस्ट से इस्तीफे हुए और एसआईटी जांच शुरू की गई। यह मामला उस ट्रस्ट से जुड़ा है जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित किया गया था।
एसआईटी जांच में अब तक क्या हुआ है?
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के अनुसार एसआईटी पूरे मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया जाएगा।
राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफे क्यों हुए?
जैन के अनुसार ये इस्तीफे नैतिक मूल्यों के आधार पर हुए हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इन इस्तीफों से एसआईटी जांच या कानूनी प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विष्णु शंकर जैन ने मंदिर प्रशासन में क्या सुधार माँगे हैं?
जैन ने माँग की है कि मंदिर का नियंत्रण सरकारी दायरे के बाहर रहे और एक नई, अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
क्या यह विवाद राम मंदिर आंदोलन को प्रभावित करेगा?
जैन ने कहा कि जो लोग राम मंदिर के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे इस घटना को राजनीतिक हथियार बना सकते हैं। उनके अनुसार इस मामले की गंभीर जांच और नई व्यवस्था ही आंदोलन की विरासत की रक्षा कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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