8 अगस्त 2026
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राम मंदिर चंदा विवाद: पूर्व डीजीपी जैन ने की CBI जांच की मांग, बोले- 'धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं'

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राम मंदिर चंदा विवाद: पूर्व डीजीपी जैन ने की CBI जांच की मांग, बोले- 'धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं'

सारांश

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित ₹200 करोड़ की हेराफेरी का मामला अब सियासी अखाड़े में पहुँच गया है। UP के पूर्व DGP ने CBI जांच की मांग की है, जबकि BJP विधायक ने सपा कार्यकर्ता की संलिप्तता का आरोप लगाया। श्रद्धालुओं का भरोसा दांव पर है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP अरविंद कुमार जैन ने 18 जून 2026 को अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा विवाद में CBI जांच की मांग की।
कथित धन हेराफेरी की राशि को लेकर अलग-अलग दावे — कुछ सूत्र ₹200 करोड़ की बात कर रहे हैं।
जैन ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, बैंक स्टाफ के बयान दर्ज करने और दोषियों से पूरी रिकवरी की मांग की।
गाजियाबाद BJP विधायक नंद किशोर गुर्जर ने सपा कार्यकर्ता की संलिप्तता का आरोप लगाया और सपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट सात दिनों में अपेक्षित है।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित धन हेराफेरी का मामला 18 जून 2026 को और गरमा गया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अरविंद कुमार जैन ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्यमंत्री ने सात दिनों में रिपोर्ट देने के लिए एक जांच समिति पहले ही गठित कर दी है।

पूर्व DGP की CBI जांच की मांग

पूर्व DGP अरविंद कुमार जैन ने विशेष बातचीत में कहा, 'यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है जो लंबे समय से चल रहा है। मामले में तुरंत केस दर्ज होना चाहिए। मेरी मांग है कि जांच CBI को सौंपी जाए, ताकि बाहरी और निष्पक्ष अधिकारी इसकी छानबीन कर सकें। जब से मंदिर के लिए भूमि अर्जन शुरू हुआ है, तब से आरोप लगते आ रहे हैं। जनता को पूरा सच जानना है।'

जैन ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को स्वयं आगे आकर मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, 'मुख्यमंत्री ने कमेटी गठित कर सात दिनों में रिपोर्ट मांगी है, यह अच्छा कदम है। लेकिन भारत के कानून से ऊपर कोई नहीं है। जो दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो, जो नहीं जुड़े उन्हें बचाया जाए।'

विवाद की गंभीरता और आर्थिक पहलू

जैन ने चिंता जताई कि कथित हेराफेरी की राशि को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं — कुछ लोग ₹200 करोड़ की बात कर रहे हैं, जबकि अन्य अलग आंकड़े बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सच सामने नहीं आया तो भविष्य में मंदिर को मिलने वाले दान पर भी असर पड़ेगा और श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगाएगा।

उन्होंने मांग की कि चंदा गिनती में शामिल सभी बैंक कर्मचारियों और स्टाफ के बयान दर्ज किए जाएं, संबंधित टीम बदली जाए, दोषियों से पूरी रिकवरी हो, और यदि संगठित तरीके से काम हुआ है तो गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, 'हमें एक पारदर्शी व्यवस्था बनानी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।'

BJP विधायक का सपा पर सीधा हमला

गाजियाबाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'अब साफ हो गया है कि इसमें समाजवादी पार्टी का एक कार्यकर्ता शामिल था। उनका एजेंडा है कि ऐसे लोगों को अंदर घुसाकर राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय और धार्मिक कार्यों में रुकावटें पैदा की जाएं।'

गुर्जर ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले दोषियों को पकड़ने की मांग कर रहे थे, लेकिन जैसे ही उनके दल के लोगों के नाम सामने आए, उन्होंने SIT जांच का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, 'यह उनके दोहरे चरित्र को दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।'

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। पूर्व DGP जैन की CBI जांच की मांग और BJP विधायक के बयान से यह विवाद अब विशुद्ध रूप से राजनीतिक रंग ले चुका है। यह देखना होगा कि सरकार SIT और CBI में से किस एजेंसी को जांच सौंपती है और कोषाध्यक्ष सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर सीधा प्रहार हैं। विडंबना यह है कि जिस मंदिर के निर्माण के लिए आम जनता ने अपनी जमापूंजी दान की, उसी के ट्रस्ट पर अब पारदर्शिता के सवाल उठ रहे हैं। SIT बनाम CBI की बहस असल मुद्दे — जवाबदेही और स्वतंत्र जांच — से ध्यान भटका सकती है। राजनीतिक दलों का इस विवाद को चुनावी हथियार बनाना उस जनता के साथ अन्याय है जो सिर्फ सच जानना चाहती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
यह अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित धन हेराफेरी का मामला है, जिसमें कुछ सूत्र ₹200 करोड़ तक की अनियमितता का दावा कर रहे हैं। मामले में अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं और जांच की मांग तेज हो गई है।
पूर्व DGP अरविंद कुमार जैन ने क्या मांग की है?
पूर्व DGP अरविंद कुमार जैन ने मामले की जांच CBI को सौंपने, तत्काल FIR दर्ज करने, गिनती में शामिल बैंक कर्मचारियों के बयान लेने और यदि संगठित अपराध साबित हो तो गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से भी मुकदमा दर्ज कराने की अपील की।
इस मामले में समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगे हैं?
BJP विधायक नंद किशोर गुर्जर ने दावा किया है कि कथित हेराफेरी में सपा का एक कार्यकर्ता शामिल था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन अपने दल के नाम सामने आने पर SIT जांच का विरोध करने लगे।
मामले की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक जांच समिति गठित की है जिसे सात दिनों में रिपोर्ट देनी है। इसके अलावा पूर्व DGP जैन ने CBI जांच की मांग की है, जबकि सपा SIT जांच का विरोध कर रही है।
इस विवाद का राम मंदिर को मिलने वाले भविष्य के दान पर क्या असर हो सकता है?
पूर्व DGP जैन के अनुसार, यदि मामले में पारदर्शिता नहीं आई तो भविष्य में श्रद्धालु मंदिर को दान देने से हिचकिचाएंगे और धार्मिक संस्थाओं पर उनका विश्वास कमज़ोर होगा। उन्होंने पारदर्शी व्यवस्था बनाने की ज़रूरत पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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