राम मंदिर दानपात्र घोटाले की जांच हो : कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव ने 25 जून 2026 को रायपुर में कहा कि राम मंदिर दानपात्र घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले को गंभीर भ्रष्टाचार का प्रकरण बताते हुए इसे नजरअंदाज करने से साफ इनकार किया।
दानपात्र घोटाले पर सिंह देव का बयान
सिंह देव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण में प्रयुक्त ईंटों का कोई ठोस हिसाब नहीं है और चंदे की राशि के बारे में भी पारदर्शिता का अभाव है। उनके अनुसार, 'जहाँ पारदर्शी तरीके से चंदा लिया जाता हो, वहाँ इस प्रकार एक बड़ी राशि का भ्रष्टाचार में डूब जाना बेहद चिंताजनक है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।' उन्होंने माँग की कि जांच बिना किसी भेदभाव के हो।
धर्मांतरण कानून और पादरियों पर मुकदमे का मुद्दा
रायपुर में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद दो पादरियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस पर छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और ऐसे मामलों में संरक्षण देने का काम करती है।
इस पर पलटवार करते हुए सिंह देव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ईसाई समुदाय से आते थे और उनके कार्यकाल में भी पादरी गिरफ्तार हुए थे। उन्होंने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति गलत काम करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए — चाहे वो कांग्रेस हो या भाजपा। अगर कोई काम कानून के अनुरूप हो रहा है, तो उसमें बाधा डालना पूरी तरह गलत है।'
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में 'आपातकाल' शामिल करने पर प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार द्वारा एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में 'आपातकाल' विषय को कक्षा 11 से हटाकर कक्षा 9 में शामिल करने के फैसले पर सिंह देव ने कहा कि यदि इतिहास में कोई घटना घटी है और उसे पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जा रहा है, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूर्व के इतिहास को भी उसी तरह पाठ्यक्रम में स्थान मिलना चाहिए — इतिहास को मिटाने की कोशिश उचित नहीं है।
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव से जुड़े जमीन घोटाले पर रुख
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े कथित जमीन घोटाले पर सिंह देव ने कहा कि व्यवसाय करना कोई आपत्तिजनक बात नहीं है और यादव का परिवार पहले से रियल एस्टेट कारोबार में है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं यह सामने आता है कि कीमती जमीन को जानबूझकर कम दाम में बेचा गया, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय बनता है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार और कांग्रेस के बीच कई मोर्चों पर तनाव बढ़ रहा है — राम मंदिर चंदे की पारदर्शिता, धर्मांतरण कानून और पाठ्यक्रम में बदलाव सभी मुद्दे एक साथ उभरे हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर दानपात्र विवाद राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है और विपक्ष इसे जवाबदेही के बड़े सवाल से जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाए जाने की संभावना है।