4 जुलाई 2026
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राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर कांग्रेस सांसदों के सवाल, दिग्विजय बयान पर भगत और तिवारी की अलग राह

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राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर कांग्रेस सांसदों के सवाल, दिग्विजय बयान पर भगत और तिवारी की अलग राह

सारांश

दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर दो अलग सुर — सुखदेव भगत ने अधूरे मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए और ट्रस्ट जाँच की माँग की, जबकि मनीष तिवारी ने दिग्विजय पर टिप्पणी से परहेज़ किया पर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच का समर्थन किया।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के समय मंदिर पूर्णतः निर्मित नहीं था, जो हिंदू शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं।
भगत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाया।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
तिवारी ने राम मंदिर ट्रस्ट की कथित अनियमितताओं की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच की माँग की।
तिवारी ने पाकिस्तान से वार्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद पर ठोस गारंटी के बिना बातचीत का कोई आधार नहीं।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 4 जुलाई को नई दिल्ली में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के समय मंदिर पूर्णतः निर्मित नहीं था, और हिंदू धार्मिक परंपराओं एवं शास्त्रों के अनुसार किसी अर्धनिर्मित मंदिर में ऐसे अनुष्ठान का आयोजन उचित नहीं माना जाता। यह बयान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के हालिया वक्तव्य के संदर्भ में आया, जिस पर पार्टी के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

सुखदेव भगत के मुख्य आरोप

भगत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की। उनके अनुसार, जल्दी श्रेय लेने की होड़ में अधूरे मंदिर में ही प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन करा दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामलला की मूर्ति के रंग को वे विवाद का विषय नहीं मानते, क्योंकि हिंदू परंपरा में भगवान राम का वर्णन प्रायः 'श्याम वर्ण' या 'नील मेघ' के समान किया गया है।

भगत ने कहा, 'मूर्ति का रंग नहीं, बल्कि भगवान के प्रति श्रद्धा और आस्था अधिक महत्वपूर्ण है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मंदिर परिसर में कथित चोरी या अनियमितताओं की जो खबरें सामने आई हैं, वे अत्यंत दुखद हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े स्थानों पर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

ट्रस्ट की जाँच की माँग

भगत ने कहा कि यदि किसी ट्रस्ट या उससे जुड़े व्यक्तियों पर अनियमितताओं के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल अयोध्या ही नहीं, देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर ट्रस्टों के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के दुरुपयोग की आशंका न रहे।

मनीष तिवारी का रुख — दिग्विजय पर चुप्पी, जाँच पर स्पष्ट राय

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और अपने बयान पर स्वयं स्पष्टीकरण देने में सक्षम हैं। हालाँकि, राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर तिवारी ने कहा कि मंदिर निर्माण का मार्ग सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से प्रशस्त हुआ था, इसलिए यदि आरोप सामने आते हैं तो जाँच विश्वसनीय और निष्पक्ष होनी चाहिए।

तिवारी ने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति गठित कर मामले की जाँच कराई जाए, ताकि तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके और किसी प्रकार का संदेह न रहे।

पाकिस्तान से वार्ता पर तिवारी का कड़ा रुख

इसी दौरान तिवारी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा भारत-पाकिस्तान वार्ता की माँग पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड भरोसेमंद नहीं रहा है और वह लगातार भारत के विरुद्ध आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। तिवारी ने सवाल उठाया कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती का उपयोग भारत-विरोधी आतंकवादी गतिविधियों के लिए रोकने की ठोस गारंटी नहीं देता, तब तक बातचीत का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

उन्होंने कहा कि अतीत में पाकिस्तान के नेताओं और सैन्य शासकों ने भारत को कई आश्वासन दिए, परंतु वे उन पर खरे नहीं उतरे। इसलिए भारत की प्राथमिकता आतंकवाद पर पूर्ण रोक होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध एक नाज़ुक मोड़ पर हैं और कूटनीतिक संवाद को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में मतभेद बने हुए हैं।

आगे क्या

कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एकजुट स्वर का अभाव स्पष्ट है — भगत ने जहाँ सवाल उठाए, वहीं तिवारी ने दूरी बनाए रखी। राम मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं की जाँच की माँग अब राजनीतिक बहस का केंद्र बनती जा रही है, और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तिवारी दूरी बनाते हैं। दिग्विजय सिंह के बयान पर पार्टी की चुप्पी बताती है कि नेतृत्व इस मुद्दे पर सीधे टकराव से बचना चाहता है, फिर भी सांसदों के बयान अलग-अलग दिशाओं में जा रहे हैं। ट्रस्ट जाँच की माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन बिना ठोस साक्ष्य के यह महज़ दबाव की राजनीति बन सकती है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष को धार्मिक प्रतीकों पर सवाल उठाने की बजाय शासन और पारदर्शिता के ठोस मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहिए।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखदेव भगत ने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा के समय अयोध्या का राम मंदिर पूरी तरह निर्मित नहीं था, और हिंदू शास्त्रों के अनुसार अर्धनिर्मित मंदिर में ऐसा अनुष्ठान उचित नहीं माना जाता। उन्होंने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की जल्दबाज़ी का परिणाम बताया।
मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह वरिष्ठ नेता हैं और अपने बयान पर स्वयं स्पष्टीकरण देने में सक्षम हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट की जाँच की माँग क्यों उठाई जा रही है?
मंदिर परिसर में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की खबरों के बाद कांग्रेस सांसदों ने निष्पक्ष जाँच की माँग की है। मनीष तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का सुझाव दिया है।
मनीष तिवारी ने भारत-पाकिस्तान वार्ता पर क्या रुख अपनाया?
तिवारी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की वार्ता की माँग को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड भरोसेमंद नहीं है। उनके अनुसार, जब तक पाकिस्तान भारत-विरोधी आतंकवाद रोकने की ठोस गारंटी नहीं देता, बातचीत का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
क्या कांग्रेस पार्टी राम मंदिर मुद्दे पर एकजुट है?
नहीं, कांग्रेस सांसदों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग रहीं। सुखदेव भगत ने प्राण-प्रतिष्ठा की वैधता पर सवाल उठाए, जबकि मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर टिप्पणी से परहेज़ किया। यह पार्टी के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट रणनीति के अभाव को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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