4 अगस्त 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी और भूमि सौदों पर सपा का संसद में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी और भूमि सौदों पर सपा का संसद में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग

सारांश

राम मंदिर के चढ़ावे और भूमि सौदों में कथित अनियमितताओं को लेकर सपा सांसद डिंपल यादव ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। ₹2 करोड़ की जमीन ₹16 करोड़ में खरीदने जैसे आरोपों के साथ विपक्ष ने निष्पक्ष जाँच और संसद में चर्चा की माँग की — सरकार पर बहस से बचने का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

4 अगस्त को संसद परिसर में सपा सांसदों ने विपक्षी दलों के साथ राम मंदिर चढ़ावा चोरी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि ₹2 करोड़ की जमीन ₹16 करोड़ और ₹5 करोड़ की जमीन ₹23–₹30 करोड़ में खरीदी गई।
दो वर्ष पूर्व गठित जाँच समिति के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई — यह आरोप डिंपल यादव ने लगाया।
विपक्ष का कहना है कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने से बच रही है।
सपा सांसद राजीव राय ने उपचुनाव परिणामों को जनता का सरकार-विरोधी संदेश बताया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने 4 अगस्त को संसद परिसर में अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के साथ मिलकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी और भूमि सौदों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसद डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और अन्य विपक्षी नेताओं ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और संसद में विस्तृत चर्चा आयोजित करने की माँग की। विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे, दान और भूमि खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं, जिनकी जाँच अब तक पूरी नहीं हुई है।

जाँच समिति पर उठे सवाल

सपा सांसद डिंपल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दो वर्ष पूर्व इस मामले की जाँच के लिए एक समिति गठित की गई थी, परंतु उसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जाँच समिति के पास सभी तथ्य और साक्ष्य उपलब्ध थे, तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विपक्षी दलों की आलोचना लगातार तेज होती जा रही है। गौरतलब है कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से करोड़ों श्रद्धालुओं ने दान दिया था।

भूमि सौदों में कथित मूल्य अंतर

डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि भूमि खरीद में भारी मूल्य अंतर देखा गया। उनके अनुसार, कथित तौर पर ₹2 करोड़ की जमीन ₹16 करोड़ में और ₹5 करोड़ की जमीन ₹23 से ₹30 करोड़ तक में खरीदी गई। उन्होंने पूछा कि इस अतिरिक्त राशि का लाभ किसे मिला और यह धनराशि किन खातों में गई।

सपा सांसद ने यह भी कहा कि सवाल केवल दान राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर को प्राप्त धातुओं, आभूषणों और भूमि सौदों में हुई कथित अनियमितताओं का भी है। उनके अनुसार, यह जानना आवश्यक है कि दान और जमीन से जुड़े करोड़ों रुपये आखिरकार किसके पास पहुँचे।

पारदर्शिता और जनभावनाओं की दुहाई

डिंपल यादव ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। इसलिए मंदिर के नाम पर श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी नहीं चाहती कि लोगों की धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किसी संगठन या संस्था को चलाने के लिए किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से आम जनता में नाराजगी है और अब तक यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित रूप से कितनी राशि की हेराफेरी हुई है।

उपचुनाव परिणामों पर विपक्ष का दावा

पटना और मध्य प्रदेश के उपचुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए डिंपल यादव ने कहा कि नतीजे उत्साहजनक हैं, हालाँकि उपचुनाव और आम चुनाव की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में नियमित विधानसभा चुनाव होते हैं तो राजनीतिक तस्वीर अलग हो सकती है।

सपा सांसद राजीव राय ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उपचुनाव परिणाम जनता की सरकार के खिलाफ आवाज हैं और जब जनता मजबूती से खड़ी होती है तो सरकारें बदल जाती हैं।

सरकार की स्थिति और आगे की राह

विपक्ष का आरोप है कि सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा कराने से बच रही है। सपा और अन्य विपक्षी दल इस मामले को देश की धरोहर से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए तत्काल और निष्पक्ष जाँच की माँग पर अड़े हैं। आने वाले संसद सत्र में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे महज राजनीति कहकर खारिज करना उचित नहीं होगा — करोड़ों श्रद्धालुओं के दान की पारदर्शिता एक वैध सार्वजनिक हित का प्रश्न है। दो वर्ष पूर्व गठित जाँच समिति के निष्कर्ष सार्वजनिक न होना सरकार के लिए असुविधाजनक सवाल खड़ा करता है। भूमि सौदों में कथित मूल्य अंतर के आरोप — यदि सत्यापित होते हैं — तो यह मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नजरअंदाज करती है कि जाँच की माँग और राजनीतिक प्रदर्शन — दोनों एक साथ हो सकते हैं, और दोनों की अलग-अलग जाँच होनी चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद क्या है?
यह विवाद राम मंदिर निर्माण से जुड़े दान, चढ़ावे और भूमि खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। विपक्षी दलों का आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा दी गई राशि और भूमि सौदों में पारदर्शिता का अभाव है और जाँच अधूरी छोड़ी गई है।
डिंपल यादव ने भूमि सौदों पर क्या आरोप लगाए?
सपा सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि ₹2 करोड़ की जमीन ₹16 करोड़ में और ₹5 करोड़ की जमीन ₹23 से ₹30 करोड़ तक में खरीदी गई। उन्होंने पूछा कि इस अतिरिक्त राशि का लाभ किसे मिला और वह धनराशि किन खातों में गई।
सपा ने संसद में क्या माँग की है?
समाजवादी पार्टी ने सरकार से राम मंदिर चढ़ावा चोरी और भूमि सौदों की निष्पक्ष जाँच कराने और संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा आयोजित करने की माँग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर बहस से बच रही है।
जाँच समिति का क्या हुआ जो पहले बनाई गई थी?
डिंपल यादव के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए दो वर्ष पूर्व एक समिति गठित की गई थी, लेकिन उसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल किया कि साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस प्रदर्शन का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब सपा ने पटना और मध्य प्रदेश के उपचुनाव परिणामों को सरकार-विरोधी जनमत बताया। सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि जनता चुनावों के माध्यम से अपना संदेश दे रही है और समाजवादी पार्टी आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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