पीएनबी सहारनपुर करेंसी चेस्ट: ₹17.29 करोड़ के नकली नोट मामले में एनआईए ने आदेश चौधरी को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से ₹17.29 करोड़ के नकली भारतीय मुद्रा नोट बरामद होने के मामले में एक और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 16 सितंबर 2026 को की गई, जो इस मामले में एनआईए की दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
आरोपी की पहचान और भूमिका
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आदेश चौधरी के रूप में हुई है, जो गंगोह रोड, न्यू नंदपुरी कॉलोनी, थाना कुतुब शेर, मानक मौ, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी है। जांच के अनुसार, आदेश चौधरी PNB की सहारनपुर करेंसी चेस्ट में संविदा आधार पर ड्राइवर के रूप में कार्यरत था।
यह ऐसे समय में आया है जब एनआईए पहले ही इस मामले में एफआईआर में नामजद आरोपी अमित कुमार को 7 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है। इस प्रकार यह मामले में दूसरी प्रमुख गिरफ्तारी है।
मुख्य घटनाक्रम
29 अगस्त 2026 को थाना सदर बाजार, जिला सहारनपुर को PNB करेंसी चेस्ट, सिविल लाइंस, सहारनपुर से ₹17.29 करोड़ के नकली भारतीय करेंसी नोट बरामद होने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच में बैंक के 3 कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद बैंक प्रबंधन ने तीनों को निलंबित कर दिया।
यह मामला शुरू में 29 अगस्त 2026 को थाना सदर बाजार, सहारनपुर में एफआईआर नंबर 0431/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 178 के अंतर्गत 3 आरोपियों के विरुद्ध दर्ज किया गया था। गौरतलब है कि 3 सितंबर 2026 को एनआईए ने इस केस को आरसी-02/2026/एनआईए/एलकेओ के तहत री-रजिस्टर किया था, जो इस मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को रेखांकित करता है।
जांच की स्थिति
एनआईए के अनुसार, पूरी साजिश का पर्दाफाश करने और शेष सह-आरोपियों तथा संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील बैंकिंग प्रणाली में नकली नोटों की इतनी बड़ी मात्रा का पाया जाना वित्तीय सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करेंसी चेस्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से नोटों के वितरण की आधिकारिक कड़ी होती है और इसमें किसी भी प्रकार की सेंध मुद्रा आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
आम जनता पर असर
नकली नोटों का करेंसी चेस्ट स्तर तक पहुँचना आम नागरिकों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि इस माध्यम से जाली मुद्रा बाज़ार में प्रवेश कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आंतरिक मिलीभगत की जांच उतनी ही ज़रूरी है जितनी बाहरी षड्यंत्रकारियों की पहचान।
आगे क्या होगा
एनआईए की जांच अभी जारी है और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी नकली नोटों की आपूर्ति श्रृंखला और उसके मूल स्रोत का पता लगाने में जुटी है।