बंदगांव थाना प्रभारी ₹15,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार, एनडीपीएस केस में नाम हटाने का था आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना प्रभारी एवं सब इंस्पेक्टर मनीष कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), जमशेदपुर की टीम ने 20 अगस्त 2026 को ₹15,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी के परिजन का नाम हटाने के बदले रिश्वत माँगी थी। इस गिरफ्तारी के बाद झारखंड पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
बंदगांव थाना कांड संख्या 07/2025 एनडीपीएस एक्ट से जुड़ा है। इस मामले में कारिका निवासी बिजराय मुंडू के बड़े भाई लखो मुंडू उर्फ गुजुरू का नाम आरोपी के रूप में दर्ज था। थाना प्रभारी मनीष कुमार पर आरोप है कि उन्होंने लखो मुंडू का नाम मामले से हटाने और राहत दिलाने के एवज में बिजराय मुंडू से ₹20,000 रिश्वत की माँग की।
एसीबी में शिकायत और सत्यापन
बिजराय मुंडू रिश्वत देने को तैयार नहीं थे, इसलिए उन्होंने जमशेदपुर स्थित एसीबी कार्यालय में थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत माँगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को एसीबी जमशेदपुर थाने में कांड संख्या 04/2026 दर्ज किया गया और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
जाल बिछाकर रंगे हाथ गिरफ्तारी
एसीबी के अनुसार, 20 अगस्त 2026 को पूर्व निर्धारित योजना के तहत टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता बिजराय मुंडू ने थाना प्रभारी को ₹15,000 सौंपे, मौके पर मौजूद एसीबी अधिकारियों ने मनीष कुमार को पकड़ लिया और उनके पास से रिश्वत की राशि बरामद कर ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जमशेदपुर ले जाया गया।
आगे की कार्रवाई
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि आरोपी थाना प्रभारी को न्यायालय में पेश किया जाएगा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यह मामला झारखंड में पुलिस विभाग की जवाबदेही पर नए सिरे से सवाल खड़े करता है।