राम मंदिर चंदा विवाद: साधु-संतों ने गोविंद देव गिरि से माँगा इस्तीफा, सनातन बोर्ड की माँग फिर उठी
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदा चोरी विवाद ने नया मोड़ लिया है — साधु-संतों ने 9 जुलाई को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का तत्काल इस्तीफा माँगते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे पद नहीं छोड़ते तो संत समाज सड़कों पर आक्रोश प्रदर्शन करेगा। संतों ने इस अवसर पर सनातन बोर्ड के गठन की माँग भी एक बार फिर दोहराई।
मुख्य घटनाक्रम
महंत देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि गोविंद देव गिरि ने चंपत राय से मुलाकात की और चार-पाँच घंटे की बैठक में सबको मनाने का प्रयास किया, किंतु उस बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि गोविंद देव गिरि ने स्वयं स्वीकार किया था कि उनके पास हस्ताक्षर का अधिकार नहीं था, चेक नहीं था और उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी — ऐसे में उनका कोषाध्यक्ष बने रहना प्रश्नों के घेरे में है। महंत देवेशाचार्य के अनुसार, 'जिस दिन घटना सामने आई, उसी दिन इस्तीफा दे देना चाहिए था।'
चंपत राय के इस्तीफे को लेकर महंत देवेशाचार्य ने कहा कि उनके पत्र से उनकी ईमानदारी या बेईमानी का निर्णय नहीं किया जा सकता, लेकिन जब इस्तीफे का समय था तब वे मौन रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ढिलाई से विपक्ष को राम मंदिर की छवि धूमिल करने का अवसर मिल गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि चंपत राय का इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं, बल्कि जबरन थोपा गया था। उन्होंने कहा कि चंपत राय का पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित रहा है, जबकि गोविंद देव गिरि का योगदान नगण्य है। महंत सीताराम दास ने माँग की कि गोविंद देव गिरि तत्काल प्रभाव से पद छोड़ें, अन्यथा संत समाज विरोध प्रदर्शन करेगा।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि अयोध्या आस्था का केंद्र है और वहाँ चंदे में गड़बड़ी राम भक्तों के हृदय पर सीधी चोट है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि एसआईटी जाँच कर रही है और दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
सनातन बोर्ड की माँग
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने सनातन बोर्ड के गठन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि आज यह बोर्ड अस्तित्व में होता, तो बद्रीनाथ और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर भी इस प्रकार की अनियमितताएँ सामने नहीं आतीं। संतों का तर्क है कि एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड धार्मिक न्यासों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे कारगर उपाय है।
आम जनता और राम भक्तों पर असर
एक अन्य संत ने राम भक्तों और सनातनियों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग इस विवाद को राम मंदिर की आलोचना का अवसर बना रहे हैं, वे सनातन विरोधी प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलतियाँ हुई हैं और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में सनातन धर्म, संत समाज या राम मंदिर पर की जाने वाली टिप्पणी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब एसआईटी जाँच अभी जारी है और ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि चंपत राय पहले ही पद छोड़ चुके हैं, किंतु गोविंद देव गिरि अभी भी कोषाध्यक्ष के पद पर बने हुए हैं। यदि संत समाज की माँगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में अयोध्या में बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।