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राम मंदिर चंदा विवाद: साधु-संतों ने गोविंद देव गिरि से माँगा इस्तीफा, सनातन बोर्ड की माँग फिर उठी

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राम मंदिर चंदा विवाद: साधु-संतों ने गोविंद देव गिरि से माँगा इस्तीफा, सनातन बोर्ड की माँग फिर उठी

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर चंदा विवाद में संत समाज अब सीधे मैदान में उतर आया है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के इस्तीफे की माँग के साथ-साथ सनातन बोर्ड का मुद्दा फिर गरमाया — संतों का कहना है कि ऐसा स्वतंत्र बोर्ड होता तो यह विवाद ही नहीं उठता।

मुख्य बातें

साधु-संतों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का तत्काल इस्तीफा माँगा।
इस्तीफा न देने पर संत समाज ने आक्रोश प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
महंत देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि गोविंद देव ने स्वयं अपनी अनभिज्ञता स्वीकार की थी, फिर भी कोषाध्यक्ष बने हुए हैं।
महंत सीताराम दास के अनुसार, चंपत राय का इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं बल्कि जबरन था; उनका योगदान अकल्पनीय रहा है।
एसआईटी जाँच जारी है; महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा — दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
संतों ने सनातन बोर्ड के गठन की माँग दोहराई, कहा — इससे बद्रीनाथ और मथुरा जैसी घटनाएँ रोकी जा सकती थीं।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदा चोरी विवाद ने नया मोड़ लिया है — साधु-संतों ने 9 जुलाई को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का तत्काल इस्तीफा माँगते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे पद नहीं छोड़ते तो संत समाज सड़कों पर आक्रोश प्रदर्शन करेगा। संतों ने इस अवसर पर सनातन बोर्ड के गठन की माँग भी एक बार फिर दोहराई।

मुख्य घटनाक्रम

महंत देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि गोविंद देव गिरि ने चंपत राय से मुलाकात की और चार-पाँच घंटे की बैठक में सबको मनाने का प्रयास किया, किंतु उस बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि गोविंद देव गिरि ने स्वयं स्वीकार किया था कि उनके पास हस्ताक्षर का अधिकार नहीं था, चेक नहीं था और उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी — ऐसे में उनका कोषाध्यक्ष बने रहना प्रश्नों के घेरे में है। महंत देवेशाचार्य के अनुसार, 'जिस दिन घटना सामने आई, उसी दिन इस्तीफा दे देना चाहिए था।'

चंपत राय के इस्तीफे को लेकर महंत देवेशाचार्य ने कहा कि उनके पत्र से उनकी ईमानदारी या बेईमानी का निर्णय नहीं किया जा सकता, लेकिन जब इस्तीफे का समय था तब वे मौन रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ढिलाई से विपक्ष को राम मंदिर की छवि धूमिल करने का अवसर मिल गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

संत समाज की प्रतिक्रिया

साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि चंपत राय का इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं, बल्कि जबरन थोपा गया था। उन्होंने कहा कि चंपत राय का पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित रहा है, जबकि गोविंद देव गिरि का योगदान नगण्य है। महंत सीताराम दास ने माँग की कि गोविंद देव गिरि तत्काल प्रभाव से पद छोड़ें, अन्यथा संत समाज विरोध प्रदर्शन करेगा।

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि अयोध्या आस्था का केंद्र है और वहाँ चंदे में गड़बड़ी राम भक्तों के हृदय पर सीधी चोट है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि एसआईटी जाँच कर रही है और दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।

सनातन बोर्ड की माँग

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने सनातन बोर्ड के गठन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि आज यह बोर्ड अस्तित्व में होता, तो बद्रीनाथ और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर भी इस प्रकार की अनियमितताएँ सामने नहीं आतीं। संतों का तर्क है कि एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड धार्मिक न्यासों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे कारगर उपाय है।

आम जनता और राम भक्तों पर असर

एक अन्य संत ने राम भक्तों और सनातनियों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग इस विवाद को राम मंदिर की आलोचना का अवसर बना रहे हैं, वे सनातन विरोधी प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलतियाँ हुई हैं और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में सनातन धर्म, संत समाज या राम मंदिर पर की जाने वाली टिप्पणी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब एसआईटी जाँच अभी जारी है और ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि चंपत राय पहले ही पद छोड़ चुके हैं, किंतु गोविंद देव गिरि अभी भी कोषाध्यक्ष के पद पर बने हुए हैं। यदि संत समाज की माँगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में अयोध्या में बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आंतरिक नियंत्रण तंत्र कहाँ था? सनातन बोर्ड की माँग नई नहीं है, लेकिन इस विवाद ने उसे राजनीतिक से अधिक प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में स्थापित कर दिया है। एसआईटी जाँच के नतीजे ही तय करेंगे कि यह महज़ लापरवाही थी या सुनियोजित चूक।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा चोरी विवाद क्या है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंदे की राशि में अनियमितता का आरोप सामने आया है, जिसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पद छोड़ा और एसआईटी जाँच शुरू हुई। अब कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के इस्तीफे की माँग उठ रही है।
साधु-संत गोविंद देव गिरि का इस्तीफा क्यों माँग रहे हैं?
संतों का तर्क है कि गोविंद देव गिरि ने स्वयं कहा था कि उन्हें चेक, हस्ताक्षर या घटना की जानकारी नहीं थी — ऐसे में उनका कोषाध्यक्ष पद पर बने रहना उचित नहीं है। महंत देवेशाचार्य महाराज के अनुसार, विवाद सामने आते ही उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था।
सनातन बोर्ड क्या है और इसकी माँग क्यों हो रही है?
सनातन बोर्ड एक प्रस्तावित स्वतंत्र निकाय है जो देश के प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों और ट्रस्टों की प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। संतों का कहना है कि यदि यह बोर्ड होता, तो अयोध्या, बद्रीनाथ और मथुरा जैसी घटनाएँ नहीं होतीं।
चंपत राय के इस्तीफे पर संत समाज का क्या रुख है?
महंत सीताराम दास ने कहा कि चंपत राय का इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं, बल्कि जबरन था। उनके अनुसार, चंपत राय का पूरा जीवन राम जन्मभूमि को समर्पित रहा है और उनका योगदान अकल्पनीय है।
अब आगे क्या होगा — क्या गोविंद देव गिरि इस्तीफा देंगे?
अभी तक गोविंद देव गिरि ने इस्तीफा नहीं दिया है। एसआईटी जाँच जारी है और संत समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस्तीफा न मिलने पर आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा। आने वाले दिनों में अयोध्या में बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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