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राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: कांग्रेस ने गोविंद देव गिरी से माँगा इस्तीफा, ट्रस्ट भंग करने की उठाई माँग

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राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: कांग्रेस ने गोविंद देव गिरी से माँगा इस्तीफा, ट्रस्ट भंग करने की उठाई माँग

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का स्थान दो बार बदला गया — और कांग्रेस ने इसी को ढाल बनाकर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से इस्तीफे की माँग कर दी। कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी, 2027 की चुनावी राजनीति और BJP पर 'रामभक्ति भुलाने' का आरोप — यह विवाद अब कई मोर्चों पर एक साथ गर्म है।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने 6 जुलाई 2026 को राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज से पद छोड़ने की माँग की।
कांग्रेस का आरोप — ट्रस्ट की बैठक का स्थान दो बार बदला गया ताकि मीडिया और विपक्ष से बचा जा सके।
गोविंद देव गिरी ने कहा था कि सभी खर्च बैंक के माध्यम से हुए और वे अधिकांश समय पुणे में रहते थे — कांग्रेस ने इसे जिम्मेदारी से पलायन बताया।
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 2027 UP चुनाव वाले बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया।
कांग्रेस ने योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठकों को 'जनता के लिए निरर्थक' बताते हुए रोजगार, महिला सुरक्षा और सस्ती बिजली पर विफलता का आरोप लगाया।

लखनऊ, 6 जुलाई 2026 — कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने रविवार को राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज से पद छोड़ने की माँग की। राजपूत ने आरोप लगाया कि मंदिर के कोष में कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले कोषाध्यक्ष की बनती है, और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास जनता को स्वीकार्य नहीं होगा।

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का स्थान दो बार बदला गया, ताकि मीडिया और विपक्ष के सवालों से बचा जा सके। उन्होंने आशंका जताई कि इस बैठक का उद्देश्य कथित तौर पर 'अनियमितताओं में संलिप्त लोगों को बचाना' हो सकता है। राजपूत ने माँग की कि यदि ट्रस्ट वास्तव में पारदर्शी जाँच चाहता है, तो उसे तत्काल भंग किया जाए।

गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोष से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला हाल के हफ्तों में राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है।

गोविंद देव गिरी की सफाई पर पलटवार

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने पहले कहा था कि सभी खर्च बैंक के माध्यम से किए जाते हैं और वे अधिकांश समय पुणे में रहते थे। इस सफाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने की स्थिति में नहीं है, तो उसे पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मंदिर के कोष से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले कोषाध्यक्ष की होती है — जिम्मेदारी से भागना बंद करें।'

भाजपा और नितिन नवीन पर निशाना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उस बयान पर भी कांग्रेस ने पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राम सेवकों पर गोली चलवाने वाले लोग कम बोलें और 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर BJP की सरकार बनेगी। राजपूत ने कहा कि नितिन नवीन को इतिहास की सही जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP कथित तौर पर राम मंदिर चंदा मामले में आरोपित उन लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है जो BJP, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी नितिन नवीन की लखनऊ यात्रा पर राजनीतिक टिप्पणी की थी। कांग्रेस ने अखिलेश के बयान को 'राजनीतिक तंज' करार देते हुए कहा कि नवीन को लखनऊ आने पर अयोध्या जाकर राम मंदिर के दर्शन करने चाहिए थे।

योगी सरकार की कैबिनेट बैठक पर सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठकों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मंत्रियों के पास किसी फैसले पर असहमति दर्ज कराने की वास्तविक स्वतंत्रता नहीं है और एजेंडा पहले से ही तय रहता है। राजपूत ने पूछा कि इन बैठकों से युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा या जनता को सस्ती बिजली मिल रही है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर विफल रही है और महंगाई बढ़ाने वाले फैसले किए जा रहे हैं।

आगे क्या

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के नतीजे और कोषाध्यक्ष पद पर गोविंद देव गिरी महाराज का रुख अब राजनीतिक दृष्टि से अहम होगा। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर जनता के बीच जवाबदेही की माँग जारी रखेगी। यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

BJP की 'रामभक्ति' की साख, और 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की पूर्व-स्थिति। कांग्रेस का गोविंद देव गिरी पर निशाना रणनीतिक है: कोषाध्यक्ष पद की नैतिक जिम्मेदारी एक ऐसा तर्क है जिसे BJP के लिए काटना मुश्किल है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस खुद राम मंदिर मुद्दे पर वर्षों तक रक्षात्मक रही है — अब उसका आक्रामक रुख चुनावी अवसरवाद और वास्तविक जवाबदेही के बीच की पतली रेखा पर चलता दिखता है। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ता तक सीमित रखता है या न्यायिक-प्रशासनिक जाँच की माँग को औपचारिक रूप देता है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने गोविंद देव गिरी से इस्तीफे की माँग क्यों की?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि राम मंदिर के कोष में कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले कोषाध्यक्ष की बनती है। गोविंद देव गिरी की यह सफाई कि वे अधिकांश समय पुणे में रहते थे, कांग्रेस को जिम्मेदारी से पलायन लगती है।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का स्थान क्यों बदला गया?
कांग्रेस के अनुसार बैठक का स्थान दो बार इसलिए बदला गया ताकि मीडिया और विपक्ष के सवालों से बचा जा सके। ट्रस्ट की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक सामने नहीं आया है।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन के किस बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया?
नितिन नवीन ने कहा था कि राम सेवकों पर गोली चलवाने वाले लोग कम बोलें और 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर BJP की सरकार बनेगी। कांग्रेस ने इसे इतिहास की गलत समझ बताते हुए कहा कि BJP कथित अनियमितताओं में आरोपित लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस ने योगी सरकार की कैबिनेट बैठकों पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस का कहना है कि कैबिनेट बैठकों में मंत्रियों को असहमति दर्ज कराने की वास्तविक स्वतंत्रता नहीं है और एजेंडा पहले से तय रहता है। पार्टी ने सवाल उठाया कि इन बैठकों से युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा या जनता को सस्ती बिजली नहीं मिल रही।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद का 2027 के UP चुनाव पर क्या असर हो सकता है?
यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना सकता है। कांग्रेस और सपा दोनों इस मुद्दे का उपयोग BJP की 'रामभक्ति' की साख को चुनौती देने के लिए कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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