राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: कांग्रेस ने गोविंद देव गिरी से माँगा इस्तीफा, ट्रस्ट भंग करने की उठाई माँग
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 6 जुलाई 2026 — कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने रविवार को राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज से पद छोड़ने की माँग की। राजपूत ने आरोप लगाया कि मंदिर के कोष में कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले कोषाध्यक्ष की बनती है, और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास जनता को स्वीकार्य नहीं होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का स्थान दो बार बदला गया, ताकि मीडिया और विपक्ष के सवालों से बचा जा सके। उन्होंने आशंका जताई कि इस बैठक का उद्देश्य कथित तौर पर 'अनियमितताओं में संलिप्त लोगों को बचाना' हो सकता है। राजपूत ने माँग की कि यदि ट्रस्ट वास्तव में पारदर्शी जाँच चाहता है, तो उसे तत्काल भंग किया जाए।
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोष से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला हाल के हफ्तों में राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है।
गोविंद देव गिरी की सफाई पर पलटवार
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने पहले कहा था कि सभी खर्च बैंक के माध्यम से किए जाते हैं और वे अधिकांश समय पुणे में रहते थे। इस सफाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने की स्थिति में नहीं है, तो उसे पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मंदिर के कोष से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता की नैतिक जिम्मेदारी सबसे पहले कोषाध्यक्ष की होती है — जिम्मेदारी से भागना बंद करें।'
भाजपा और नितिन नवीन पर निशाना
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उस बयान पर भी कांग्रेस ने पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राम सेवकों पर गोली चलवाने वाले लोग कम बोलें और 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर BJP की सरकार बनेगी। राजपूत ने कहा कि नितिन नवीन को इतिहास की सही जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP कथित तौर पर राम मंदिर चंदा मामले में आरोपित उन लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है जो BJP, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी नितिन नवीन की लखनऊ यात्रा पर राजनीतिक टिप्पणी की थी। कांग्रेस ने अखिलेश के बयान को 'राजनीतिक तंज' करार देते हुए कहा कि नवीन को लखनऊ आने पर अयोध्या जाकर राम मंदिर के दर्शन करने चाहिए थे।
योगी सरकार की कैबिनेट बैठक पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठकों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मंत्रियों के पास किसी फैसले पर असहमति दर्ज कराने की वास्तविक स्वतंत्रता नहीं है और एजेंडा पहले से ही तय रहता है। राजपूत ने पूछा कि इन बैठकों से युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा या जनता को सस्ती बिजली मिल रही है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर विफल रही है और महंगाई बढ़ाने वाले फैसले किए जा रहे हैं।
आगे क्या
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के नतीजे और कोषाध्यक्ष पद पर गोविंद देव गिरी महाराज का रुख अब राजनीतिक दृष्टि से अहम होगा। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर जनता के बीच जवाबदेही की माँग जारी रखेगी। यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।