राम मंदिर ट्रस्ट में गोपाल राव की भूमिका पर सवाल, साधु कल्कि राम और वरुण दास ने माँगी जाँच
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में एक नया विवाद उभरा है — गोपाल राव की कथित अनाधिकृत भूमिका को लेकर। साधु कल्कि राम और वरुण दास ने 1 जुलाई 2025 को गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे न तो ट्रस्ट के सदस्य हैं और न ही मंदिर के कर्मचारी, फिर भी मंदिर परिसर में उनकी उपस्थिति और प्रभाव संदेह पैदा करता है। दोनों संतों ने उनकी भूमिका की निष्पक्ष जाँच और तत्काल कार्रवाई की माँग की है।
कल्कि राम के आरोप: हँसी ने खड़े किए सवाल
साधु कल्कि राम ने कहा कि पूज्य दिनेंद्र दास ने पहले ही गोपाल राव पर आरोप लगाए हैं कि यह व्यक्ति संदिग्ध चरित्र का है। उन्होंने बताया कि हाल ही में चढ़ावा चोरी के मामले के दौरान जब पत्रकारों ने गोपाल राव से सवाल किए, तब उन्होंने कहा था कि मीडिया ने मामले को इस तरह उछाला है जैसे चंपत राय का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे — और इसके बाद वे हँसने लगे। साधु कल्कि राम ने कहा, 'किसी गंभीर घटना के दौरान व्यक्ति की भाव-भंगिमाएँ भी बहुत कुछ कह देती हैं।'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर में पुजारियों द्वारा श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले चरणोदक पर रोक लगा दी गई है, जो अयोध्या की परंपरा के विरुद्ध है। उनके अनुसार, साधु-संतों के साथ सामान्य व्यवहार किया जाता है जबकि बाहर से आने वाले वीआईपी लोगों के लिए विशेष व्यवस्था रहती है।
वरुण दास की माँग: गोपाल राव को अयोध्या से बाहर करो
वरुण दास ने कहा कि गोपाल राव ट्रस्ट की किसी भी समिति के सदस्य नहीं हैं और न ही मंदिर के कर्मचारी हैं। इसके बावजूद जब देश की राष्ट्रपति या किसी अन्य राष्ट्राध्यक्ष का आगमन होता है, तब गोपाल राव उनके निकट खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रतिदिन दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं और लगातार गोपाल राव को परिसर में देखते हैं।
वरुण दास ने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति का ट्रस्ट से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है, वह मंदिर में इतनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिका कैसे निभा रहा है। उन्होंने माँग की कि गोपाल राव के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए और उन्हें अयोध्या से बाहर किया जाए।
पूज्य दिनेंद्र दास का संदर्भ और व्यापक विवाद
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट पहले से ही चढ़ावा चोरी के मामले और चंपत राय को लेकर उठे सवालों के कारण विवादों में घिरा हुआ है। पूज्य दिनेंद्र दास द्वारा पहले उठाए गए मुद्दे अब और व्यापक रूप लेते दिख रहे हैं। गौरतलब है कि ट्रस्ट की पारदर्शिता और आंतरिक प्रशासन को लेकर यह कोई पहली बार नहीं है जब संत समाज ने सवाल उठाए हों।
साधु कल्कि राम ने स्पष्ट किया कि यदि गोपाल राव पूरी तरह निर्दोष हैं, तो निष्पक्ष जाँच के बाद यह तथ्य स्वतः सामने आ जाएगा — लेकिन जाँच से बचना या टालना संदेह को और गहरा करेगा।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
संतों का कहना है कि इस विवाद से समाज में गलत संदेश जा रहा है और श्रद्धालुओं में पहले से व्याप्त आक्रोश और बढ़ रहा है। चरणोदक और चंदन जैसी पारंपरिक सेवाओं पर कथित रोक को लेकर भक्तों में असंतोष की भावना है। ट्रस्ट की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
दोनों संतों की माँग है कि ट्रस्ट प्रबंधन गोपाल राव की भूमिका को लेकर शीघ्र स्पष्टीकरण दे और यदि आवश्यक हो तो स्वतंत्र जाँच कराई जाए। इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी हैं।