राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: अयोध्या के महंतों की मांग, स्थानीय संतों को सौंपी जाए जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
दान प्रकरण को लेकर उठे विवाद के बीच अयोध्या के महंतों ने 29 जून 2026 को खुलकर मांग रखी है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय संतों और आध्यात्मिक गुरुओं को सौंपी जाए। महंतों ने वर्तमान ट्रस्ट पदाधिकारियों पर भक्तों और सनातनी समाज की आस्था को आघात पहुँचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
महंतों की मुख्य माँग
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा, 'ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की गड़बड़ियों, लापरवाही और असावधानी की वजह से जो बातें सामने आई हैं, उनसे सनातनियों, भक्तों और संतों को ठेस पहुंची है।' उन्होंने सरकार से अपील की कि एक नया ट्रस्ट गठित किया जाए और उसकी जिम्मेदारी सम्मानित स्थानीय संतों व आध्यात्मिक गुरुओं को दी जाए, 'ताकि संत अपने आराध्य देव की सेवा कर सकें और धार्मिक परंपराओं व रीति-रिवाजों के अनुसार व्यवस्था कर सकें।'
दान प्रकरण पर आक्रोश
महंत देवेशाचार्य ने इस प्रकरण को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि जब से यह बात सामने आई है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में भक्तों द्वारा दिए गए दान का कथित तौर पर दुरुपयोग हुआ है और घोटाले की आशंका जताई जा रही है, तब से 'पूरा हिंदू समाज और भक्त बहुत आहत हैं।' गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के बाद यह पहला बड़ा प्रशासनिक विवाद है जिसने सनातन समाज में व्यापक नाराज़गी पैदा की है।
ट्रस्ट के सभी सदस्यों को हटाने की माँग
देवेशाचार्य ने स्पष्ट कहा कि अयोध्या के निवासियों, संतों और हिंदू समाज की 'एक ही माँग है कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को तुरंत हटाया जाए और एक नया ट्रस्ट बनाया जाए।' उनके अनुसार नए ट्रस्ट में वे स्थानीय संत होने चाहिए जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। उन्होंने यह भी माँग की कि तीनों वैष्णव अखाड़ों से एक-एक प्रतिनिधि सदस्य ट्रस्ट में अवश्य शामिल किया जाए।
परंपरा और अनुभव का तर्क
देवेशाचार्य ने तर्क दिया कि अयोध्या के साधु-संतों को यहाँ की धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों की गहरी समझ है, इसलिए उन्हें मंदिर प्रबंधन में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठना व्यापक धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल केंद्र सरकार या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। महंतों की यह माँग अब व्यापक संत समाज में चर्चा का विषय बन गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दबाव बढ़ने की संभावना है।