राम मंदिर धार्मिक समिति पर महंत धर्म दास का विरोध: 'नया प्रभुत्व और शोषण का माध्यम'
सारांश
मुख्य बातें
राम जन्मभूमि मामले के पूर्व पक्षकार महंत धर्म दास ने 23 जुलाई 2026 को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा हाल ही में गठित धार्मिक समिति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस समिति को अनावश्यक और अनधिकृत बताते हुए आरोप लगाया कि यह केवल नया प्रभुत्व स्थापित करने और शोषण का माध्यम बनाने की साजिश है। उनके अनुसार, जब तक सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रिया और ट्रस्ट की व्यवस्था मौजूद है, तब तक किसी नई समिति की कोई आवश्यकता नहीं है।
महंत का मुख्य आरोप: वैधता पर सवाल
महंत धर्म दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस समिति को किसी भी रूप में मान्यता नहीं देते। उन्होंने सवाल उठाया कि यह समिति किसने बनाई और किस अधिकार के आधार पर बनाई गई — इसका कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार, पहले से मौजूद ट्रस्ट को अपनी जिम्मेदारियाँ ठीक से निभानी चाहिए, न कि नई-नई संरचनाएँ खड़ी करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि राम जन्मभूमि से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका सर्वोपरि है और न्यायालय ने पहले भी शांति बनाए रखने की बात कही है। ऐसे में नई समिति का गठन न केवल अनुचित है, बल्कि भ्रम और विवाद को भी बढ़ावा देता है।
संत प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल
धार्मिक समिति में अयोध्या के संतों को शामिल किए जाने के दावों को महंत धर्म दास ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि किन संतों को समिति में शामिल किया गया है। यदि किसी एक-दो व्यक्ति ने स्वयं को समिति का सदस्य बता दिया है, तो इससे पूरी संत परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता।
महंत ने दावा किया कि इस समिति में अयोध्या का कोई प्रामाणिक संत शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, 'जो लोग खुद को संत बताकर समिति में शामिल होने की बात कर रहे हैं, उनसे ही पूछ लीजिए कि उनका प्रतिनिधित्व किस आधार पर है।'
परंपरा और इतिहास की उपेक्षा का आरोप
महंत धर्म दास ने 1949 में रामलला के प्राकट्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय जिन परंपराओं और संतों की भूमिका थी, आज उनकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई का संदर्भ देते हुए कहा कि जब बुद्धि भ्रमित हो जाती है, तो व्यक्ति सही और गलत का अंतर भूल जाता है — और उनके अनुसार, वर्तमान में ऐसे ही फैसले लिए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या की परंपरा और महत्व को समझे बिना निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे रामलला की पूजा-अर्चना पहले से ही प्रभावित हो रही है।
'नया धंधा' बताया समिति को
महंत धर्म दास ने धार्मिक समिति को 'नया धंधा' की संज्ञा देते हुए कहा कि नई समिति बनाकर कुछ लोगों को अधिकार देने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई कानूनी या धार्मिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि यह समिति किसी सकारात्मक उद्देश्य की पूर्ति करने के बजाय नए विवाद खड़े करने का माध्यम बन सकती है।
आगे की राह
महंत धर्म दास ने स्पष्ट किया कि यदि समिति बना भी दी गई है, तो पहले उसे अपने कार्य और जिम्मेदारियों को साबित करना चाहिए। उनके अनुसार, राम जन्मभूमि और रामलला की सेवा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए — न कि नई-नई समितियों के गठन के माध्यम से अधिकारों का बंटवारा। यह विवाद आने वाले दिनों में ट्रस्ट और धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव का नया केंद्र बन सकता है।