23 जुलाई 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट धार्मिक समिति की बैठक: रामानंद दास बोले, रामानंदी परंपरा से ही होंगे सभी अनुष्ठान

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राम मंदिर ट्रस्ट धार्मिक समिति की बैठक: रामानंद दास बोले, रामानंदी परंपरा से ही होंगे सभी अनुष्ठान

सारांश

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति की बैठक में तय हुआ कि सभी धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी परंपरा के अनुसार होंगे। पाँच नए संतों के समावेश और चढ़ावे के प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। वीएचपी ने मंदिर को लेकर फैल रही अफवाहों पर सेमिनार बुलाया है।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने 23 जुलाई 2026 को अयोध्या में पूजा पद्धति पर बैठक की।
समिति सदस्य रामानंद दास जी महाराज ने कहा — सभी अनुष्ठान रामानंदी परंपरा के अनुसार होंगे, पूजा पद्धति में कोई दोष नहीं।
धार्मिक समिति में पाँच नए संत शामिल किए गए हैं, जो सभी श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े हैं।
राजकुमार दास ने बताया — सेवा, आरती, शयन, भोग, त्योहार सभी रामानंदी वैष्णव वैदिक परंपरा के अनुसार होंगे।
मार्गदर्शक मंडल की बैठक मणिराम दास छावनी में होगी; चढ़ावे के मामलों पर भी चर्चा होगी।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने मंदिर को लेकर फैल रही अफवाहों पर विराम लगाने के लिए सेमिनार आयोजित किया है।

अयोध्या में 23 जुलाई 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने मंदिर की पूजा पद्धति को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की। समिति सदस्य रामानंद दास जी महाराज ने स्पष्ट किया कि श्रीराम मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी परंपरा के अनुरूप ही संपन्न किए जाएंगे। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मंदिर की पूजा व्यवस्था और चढ़ावे को लेकर देशभर में चर्चाएँ और अफवाहें फैल रही हैं।

पूजा पद्धति यथावत, सुधार की संभावना खुली

रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि मंदिर की पूजा पद्धति फिलहाल यथावत चल रही है। उन्होंने कहा, 'अगर इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता होगी तो सभी लोग मिलकर फैसला करेंगे। हालांकि, पूजा पद्धति में हमें किसी प्रकार का दोष नहीं मालूम पड़ रहा है।' उनके इस वक्तव्य से यह स्पष्ट हुआ कि समिति सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता देती है।

पाँच नए संतों का समिति में समावेश

धार्मिक समिति में पाँच नए संतों को शामिल किए जाने के सवाल पर रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि ये सभी अयोध्या के विशिष्ट महापुरुष हैं और श्रीराम मंदिर आंदोलन से पहले से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों का सहयोग लेना अत्यंत लाभकारी है। समिति सदस्य कमल नयन दास ने समिति की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा, 'समिति की सिर्फ एक ही जिम्मेदारी है — मंदिर के त्योहारों, रीति-रिवाजों, चढ़ावे और पुजारियों के प्रबंधन की देखरेख। इसके अलावा समिति की कोई और भूमिका नहीं है।'

रामानंदी वैष्णव परंपरा के अनुसार होगी ठाकुरजी की सेवा

राम वल्लभ कुंज के उत्तराधिकारी और धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने विस्तार से बताया कि रामानंदी वैष्णव वैदिक परंपरा के अनुसार ठाकुरजी की पूजा से जुड़ी सभी रीतियों और प्रथाओं का पालन किया जाएगा — जिसमें सेवा, पूजा, आरती, शयन, भोग, त्योहार और समय-सारणी सम्मिलित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ संत और समिति के सम्मानित सदस्य मिलकर विचार-विमर्श करेंगे कि श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ी परंपराओं को पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ कैसे निभाया जाए।

मणिराम दास छावनी में मार्गदर्शक मंडल की बैठक

कमल नयन दास ने बताया कि मार्गदर्शक मंडल की बैठक मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का आश्रम है। इसमें अयोध्या के सभी संत, ऋषि और आध्यात्मिक गुरुओं को आमंत्रित किया गया है। श्रीराम आश्रम के महंत जयराम दास ने बताया कि इस बैठक में मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की जाएगी।

अफवाहों पर विराम लगाने के लिए वीएचपी का सेमिनार

राम कचहरी चार धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास ने कहा कि राम मंदिर को लेकर अनेक चर्चाएँ, अफवाहें और आरोप फैल रहे हैं, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसी संदर्भ में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इन अफवाहों और चिंताओं पर विचार-विमर्श के लिए एक सेमिनार आयोजित किया है। गौरतलब है कि यह बैठक और सेमिनार ऐसे समय में हो रहे हैं जब राम मंदिर की प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हुई है। आगामी बैठकों में लिए जाने वाले निर्णय मंदिर की दीर्घकालिक पूजा पद्धति और प्रशासन की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

चढ़ावे के प्रबंधन और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक रूप से उठ रहा है। वीएचपी का सेमिनार और छावनी में मार्गदर्शक मंडल की बैठक यह संकेत देती है कि अयोध्या के संत समुदाय में भी एकमत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। गौरतलब है कि जब भी किसी बड़े धार्मिक संस्थान में 'अफवाहों' को नकारने के लिए औपचारिक बैठकें बुलाई जाती हैं, तो यह स्वयं ही बताता है कि प्रश्न गहरे हैं। पारदर्शी लेखांकन और स्वतंत्र ऑडिट के बिना, चढ़ावे और प्रबंधन पर उठ रहे सवाल शांत होने की बजाय और मुखर हो सकते हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति की बैठक में क्या निर्णय हुआ?
23 जुलाई 2026 को अयोध्या में हुई बैठक में तय किया गया कि श्रीराम मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी परंपरा के अनुसार ही होंगे। समिति सदस्य रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि पूजा पद्धति में कोई दोष नहीं है और यदि सुधार की जरूरत होगी तो सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
रामानंदी परंपरा के अनुसार राम मंदिर में कौन-कौन सी सेवाएँ होंगी?
राजकुमार दास के अनुसार, रामानंदी वैष्णव वैदिक परंपरा के तहत ठाकुरजी की सेवा, पूजा, आरती, शयन, भोग, त्योहार और समय-सारणी — सभी का पालन किया जाएगा। वरिष्ठ संत मिलकर तय करेंगे कि इन परंपराओं को किस प्रकार निभाया जाए।
धार्मिक समिति में पाँच नए संतों को क्यों शामिल किया गया?
रामानंद दास जी महाराज के अनुसार, नए शामिल किए गए सभी पाँच संत अयोध्या के विशिष्ट महापुरुष हैं और श्रीराम मंदिर आंदोलन से पहले से जुड़े हुए हैं। उनका सहयोग मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा।
मणिराम दास छावनी में मार्गदर्शक मंडल की बैठक में क्या होगा?
कमल नयन दास के अनुसार, इस बैठक में अयोध्या के सभी संत, ऋषि और आध्यात्मिक गुरुओं को आमंत्रित किया गया है। महंत जयराम दास ने बताया कि बैठक में मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़े मामलों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
वीएचपी ने राम मंदिर को लेकर सेमिनार क्यों बुलाया है?
महंत शशिकांत दास के अनुसार, राम मंदिर को लेकर देशभर में अनेक अफवाहें, चर्चाएँ और आरोप फैल रहे हैं जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इन्हीं चिंताओं पर खुलकर चर्चा करने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह सेमिनार आयोजित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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