अयोध्या संत बैठक: रामलला मंदिर में रामानंदी परंपरा और धार्मिक समिति गठन पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 23 जुलाई को राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रामलला मंदिर की व्यवस्थाओं को रामानंदी परंपरा के अनुरूप सुदृढ़ करने, दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति का स्वागत करने पर सर्वसम्मति बनी। बैठक में संतों ने स्पष्ट किया कि मंदिर संचालन अयोध्या की प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही होना चाहिए।
बैठक में क्या हुई चर्चा
करपात्री महाराज ने बैठक को सार्थक और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्थाओं और रामलला मंदिर के संचालन पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार संतों के लिए पास की व्यवस्था, बिना बाधा दर्शन की सुविधा और अयोध्या की परंपराओं के अनुसार मंदिर संचालन के मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि रामलला की परंपरा संत समाज के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रही है।
रामानंदी परंपरा और दर्शन व्यवस्था पर सहमति
संत मयंक दास ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि रामलला मंदिर में सभी धार्मिक कार्य रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित किए जाएं। वर्तमान वीआईपी दर्शन व्यवस्था में संशोधन की माँग भी उठी — संतों और अयोध्या के स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड के आधार पर विशेष सुविधा दिए जाने पर जोर दिया गया। बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई, जिसमें संतों ने उन्हें निर्दोष बताया और कहा कि अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
CEO नियुक्ति और ट्रस्ट की आगामी बैठक
महंत रामकुमार दास ने जानकारी दी कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले से ही सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्य कर रहा है। अधिक आवेदन प्राप्त होने के कारण यह मामला 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में रखा जाएगा, जिसमें ट्रस्ट की तीन रिक्त सीटों और सीईओ नियुक्ति पर विस्तृत निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने धर्म समिति के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि यह समिति राम जन्मभूमि की पूजा-अर्चना और धार्मिक व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करेगी।
SIT जांच और दर्शन सुगमता पर जोर
महंत रामकुमार दास ने यह भी स्पष्ट किया कि चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा SIT गठित की जा चुकी है, इसलिए जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी पर दोषारोपण उचित नहीं होगा। संतों ने माँग की कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक रूप से रोका न जाए और दर्शन व्यवस्था अधिक सहज बनाई जाए।
धार्मिक समिति का स्वागत
डांडिया मंदिर के महंत गिरीश दास महाराज ने ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति का स्वागत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य रामलला के दर्शन, पूजन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाना है। यह समिति भगवान राम की करुणा और रामराज्य की भावना को विश्वभर के रामभक्तों तक पहुँचाने का कार्य करेगी। उन्होंने राजकुमार दास, रामानंद दास महाराज, मिथिलेशनंदिनी शरण और कमल नयन दास सहित अन्य संतों का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या का संपूर्ण संत समाज इस निर्णय का खुले मन से स्वागत करता है। यह बैठक रामलला मंदिर के दीर्घकालिक संचालन को लेकर संत समाज और ट्रस्ट के बीच सहयोग की नई शुरुआत का संकेत देती है।