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अयोध्या संत बैठक: रामलला मंदिर में रामानंदी परंपरा और धार्मिक समिति गठन पर सहमति

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अयोध्या संत बैठक: रामलला मंदिर में रामानंदी परंपरा और धार्मिक समिति गठन पर सहमति

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद अयोध्या के संत समाज ने एकजुट होकर रामानंदी परंपरा की पुनर्स्थापना और धार्मिक समिति के गठन पर मुहर लगाई। ट्रस्ट की 2 सितंबर की बैठक में CEO नियुक्ति और तीन रिक्त सीटों पर फैसला होगा — यह संत समाज और ट्रस्ट के बीच नए समन्वय की शुरुआत है।

मुख्य बातें

23 जुलाई को अयोध्या में आयोजित संत बैठक में रामलला मंदिर की व्यवस्था रामानंदी परंपरा के अनुसार चलाने पर सर्वसम्मति बनी।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति का संत समाज ने स्वागत किया।
संतों और स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड के आधार पर दर्शन में विशेष सुविधा देने की माँग उठी।
ट्रस्ट की 2 सितंबर की बैठक में सीईओ नियुक्ति और तीन रिक्त सीटों पर निर्णय होगा।
चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच जारी है; संतों ने जांच पूरी होने से पहले किसी पर दोषारोपण न करने की अपील की।
चंपत राय को संतों ने निर्दोष बताया, कहा — अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया के बाद सामने आएगा।

अयोध्या में 23 जुलाई को राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रामलला मंदिर की व्यवस्थाओं को रामानंदी परंपरा के अनुरूप सुदृढ़ करने, दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति का स्वागत करने पर सर्वसम्मति बनी। बैठक में संतों ने स्पष्ट किया कि मंदिर संचालन अयोध्या की प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही होना चाहिए।

बैठक में क्या हुई चर्चा

करपात्री महाराज ने बैठक को सार्थक और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्थाओं और रामलला मंदिर के संचालन पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार संतों के लिए पास की व्यवस्था, बिना बाधा दर्शन की सुविधा और अयोध्या की परंपराओं के अनुसार मंदिर संचालन के मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि रामलला की परंपरा संत समाज के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रही है।

रामानंदी परंपरा और दर्शन व्यवस्था पर सहमति

संत मयंक दास ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि रामलला मंदिर में सभी धार्मिक कार्य रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित किए जाएं। वर्तमान वीआईपी दर्शन व्यवस्था में संशोधन की माँग भी उठी — संतों और अयोध्या के स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड के आधार पर विशेष सुविधा दिए जाने पर जोर दिया गया। बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई, जिसमें संतों ने उन्हें निर्दोष बताया और कहा कि अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

CEO नियुक्ति और ट्रस्ट की आगामी बैठक

महंत रामकुमार दास ने जानकारी दी कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले से ही सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्य कर रहा है। अधिक आवेदन प्राप्त होने के कारण यह मामला 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में रखा जाएगा, जिसमें ट्रस्ट की तीन रिक्त सीटों और सीईओ नियुक्ति पर विस्तृत निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने धर्म समिति के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि यह समिति राम जन्मभूमि की पूजा-अर्चना और धार्मिक व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करेगी।

SIT जांच और दर्शन सुगमता पर जोर

महंत रामकुमार दास ने यह भी स्पष्ट किया कि चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा SIT गठित की जा चुकी है, इसलिए जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी पर दोषारोपण उचित नहीं होगा। संतों ने माँग की कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक रूप से रोका न जाए और दर्शन व्यवस्था अधिक सहज बनाई जाए।

धार्मिक समिति का स्वागत

डांडिया मंदिर के महंत गिरीश दास महाराज ने ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति का स्वागत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य रामलला के दर्शन, पूजन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाना है। यह समिति भगवान राम की करुणा और रामराज्य की भावना को विश्वभर के रामभक्तों तक पहुँचाने का कार्य करेगी। उन्होंने राजकुमार दास, रामानंद दास महाराज, मिथिलेशनंदिनी शरण और कमल नयन दास सहित अन्य संतों का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या का संपूर्ण संत समाज इस निर्णय का खुले मन से स्वागत करता है। यह बैठक रामलला मंदिर के दीर्घकालिक संचालन को लेकर संत समाज और ट्रस्ट के बीच सहयोग की नई शुरुआत का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सीईओ पद की रिक्तता और वीआईपी दर्शन पर असंतोष — ये तीनों मिलकर दर्शाते हैं कि ट्रस्ट का संचालन ढाँचा अभी भी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। धार्मिक समिति का गठन स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह समिति ट्रस्ट के निर्णयों में वास्तविक भागीदार बनेगी या केवल परामर्शी भूमिका तक सीमित रहेगी। 2 सितंबर की बैठक इस दिशा में निर्णायक होगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या में 23 जुलाई को संतों की बैठक क्यों बुलाई गई?
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के प्रकरण के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं, दर्शन सुविधाओं और धार्मिक परंपराओं पर विचार-विमर्श के लिए यह बैठक आयोजित की गई। इसमें रामानंदी परंपरा की पुनर्स्थापना और ट्रस्ट द्वारा गठित धार्मिक समिति पर चर्चा प्रमुख रही।
रामलला मंदिर में धार्मिक समिति का क्या काम होगा?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा गठित यह समिति रामलला के दर्शन, पूजन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने का कार्य करेगी। साथ ही यह भगवान राम की करुणा और रामराज्य की भावना को विश्वभर के रामभक्तों तक पहुँचाने में भी भूमिका निभाएगी।
राम मंदिर के CEO की नियुक्ति कब होगी?
महंत रामकुमार दास के अनुसार CEO नियुक्ति का विषय 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में रखा जाएगा। अधिक आवेदन आने के कारण यह प्रक्रिया अभी लंबित है और उसी बैठक में ट्रस्ट की तीन रिक्त सीटों पर भी निर्णय होगा।
चढ़ावा चोरी मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में SIT गठित की जा चुकी है और जांच जारी है। संतों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी पर दोषारोपण नहीं होना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
संतों ने दर्शन व्यवस्था में क्या बदलाव माँगे हैं?
संतों ने माँग की कि वर्तमान वीआईपी दर्शन व्यवस्था में संशोधन किया जाए और संतों तथा अयोध्या के स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड के आधार पर विशेष दर्शन सुविधा दी जाए। साथ ही श्रद्धालुओं को अनावश्यक रूप से रोके जाने पर भी आपत्ति जताई गई।
राष्ट्र प्रेस
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