राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पर संतों की नाराजगी, विहिप के केंद्रीय सलाहकार ने अयोध्या में की डैमेज कंट्रोल बैठक
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है। 1 सितंबर को मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट की चयन समिति ने सीईओ पद के लिए तीन नामों को अंतिम रूप दे दिया है और बुधवार को होने वाली अहम बैठक में किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है। इसी बीच संत समाज में इस कॉर्पोरेट शैली की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गहरी नाराजगी उभरकर सामने आई है।
विहिप की डैमेज कंट्रोल कवायद
संतों की बढ़ती आपत्तियों को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय सलाहकार दिनेश जी. ने अयोध्या पहुँचकर प्रमुख संतों से मुलाकात की। इस भेंट को व्यापक रूप से डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रस्ट और संत समाज के बीच सीईओ की भूमिका और प्रबंधन के स्वरूप को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं।
संतों ने क्या कहा
आर्य संत वरुण दास महाराज ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि 'बातचीत अयोध्या के मठों के विकास और शास्त्री परंपरा की पवित्रता व गरिमा को बनाए रखने पर केंद्रित थी। इसमें संघ, विहिप और संतों के बीच चर्चा हुई।'
साकेत भवन के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि 'यह बैठक युवा संतों पर केंद्रित थी, जो हमारे देश का भविष्य हैं। साथ ही, इस बात पर भी चर्चा हुई कि वेदों, वेदांगों और शास्त्रों की शिक्षा बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से कैसे दी जा सकती है।' उन्होंने अयोध्या में वेद-वेदांग विश्वविद्यालय की स्थापना और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया।
पारंपरिक व्यवस्था बनाम कॉर्पोरेट मॉडल
वरुण दास महाराज ने सीईओ पद की योग्यता शर्तों पर सीधी आपत्ति जताते हुए कहा, 'सीईओ वाली व्यवस्था अयोध्या के लिए सही नहीं है। यह अयोध्या की पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। यहाँ मंदिरों का प्रबंधन पारंपरिक रूप से पाँच भूमिकाओं — महंत, अधिकारी, पुजारी, कोठारी और भंडारी — के ज़रिए किया जाता रहा है।' गौरतलब है कि राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक महत्व के स्थल पर कॉर्पोरेट प्रबंधन मॉडल लागू करने की यह पहली कोशिश है, जो धार्मिक परंपरावादियों और आधुनिक प्रशासनिक सोच के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गई है।
आगे क्या होगा
बुधवार की बैठक में ट्रस्ट के सदस्य तीन नामों में से एक पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। हालाँकि संत समाज की नाराजगी को देखते हुए यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। राम मंदिर का पहला सीईओ कौन होगा — और क्या यह पद किसी संत को दिया जाएगा या किसी प्रशासनिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को — इस पर अयोध्या और देशभर के धार्मिक हलकों की नज़रें टिकी हुई हैं।