1 सितंबर 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पर संतों की नाराजगी, विहिप के केंद्रीय सलाहकार ने अयोध्या में की डैमेज कंट्रोल बैठक

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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पर संतों की नाराजगी, विहिप के केंद्रीय सलाहकार ने अयोध्या में की डैमेज कंट्रोल बैठक

सारांश

राम मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया ने संत समाज और ट्रस्ट के बीच टकराव की नई लकीर खींच दी है। विहिप की डैमेज कंट्रोल कवायद और बुधवार की निर्णायक बैठक — यह विवाद अयोध्या के पारंपरिक प्रबंधन मॉडल बनाम कॉर्पोरेट शासन की बड़ी बहस का रूप लेता जा रहा है।

मुख्य बातें

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की चयन समिति ने पहले सीईओ पद के लिए तीन नाम तय किए हैं; बुधवार की बैठक में अंतिम निर्णय संभव।
विहिप के केंद्रीय सलाहकार दिनेश जी.
ने संतों की नाराजगी शांत करने के लिए अयोध्या पहुँचकर मुलाकात की।
आर्य संत वरुण दास महाराज ने सीईओ व्यवस्था को अयोध्या की पारंपरिक पाँच-भूमिका प्रबंधन प्रणाली के विरुद्ध बताया।
महंत सीताराम दास महाराज ने वेद-वेदांग विश्वविद्यालय की स्थापना और युवा संतों के भविष्य पर जोर दिया।
संत समाज का मानना है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल का प्रबंधन किसी योग्य संत को ही सौंपा जाना चाहिए।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है। 1 सितंबर को मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट की चयन समिति ने सीईओ पद के लिए तीन नामों को अंतिम रूप दे दिया है और बुधवार को होने वाली अहम बैठक में किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है। इसी बीच संत समाज में इस कॉर्पोरेट शैली की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गहरी नाराजगी उभरकर सामने आई है।

विहिप की डैमेज कंट्रोल कवायद

संतों की बढ़ती आपत्तियों को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय सलाहकार दिनेश जी. ने अयोध्या पहुँचकर प्रमुख संतों से मुलाकात की। इस भेंट को व्यापक रूप से डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रस्ट और संत समाज के बीच सीईओ की भूमिका और प्रबंधन के स्वरूप को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं।

संतों ने क्या कहा

आर्य संत वरुण दास महाराज ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि 'बातचीत अयोध्या के मठों के विकास और शास्त्री परंपरा की पवित्रता व गरिमा को बनाए रखने पर केंद्रित थी। इसमें संघ, विहिप और संतों के बीच चर्चा हुई।'

साकेत भवन के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि 'यह बैठक युवा संतों पर केंद्रित थी, जो हमारे देश का भविष्य हैं। साथ ही, इस बात पर भी चर्चा हुई कि वेदों, वेदांगों और शास्त्रों की शिक्षा बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से कैसे दी जा सकती है।' उन्होंने अयोध्या में वेद-वेदांग विश्वविद्यालय की स्थापना और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया।

पारंपरिक व्यवस्था बनाम कॉर्पोरेट मॉडल

वरुण दास महाराज ने सीईओ पद की योग्यता शर्तों पर सीधी आपत्ति जताते हुए कहा, 'सीईओ वाली व्यवस्था अयोध्या के लिए सही नहीं है। यह अयोध्या की पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। यहाँ मंदिरों का प्रबंधन पारंपरिक रूप से पाँच भूमिकाओं — महंत, अधिकारी, पुजारी, कोठारी और भंडारी — के ज़रिए किया जाता रहा है।' गौरतलब है कि राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक महत्व के स्थल पर कॉर्पोरेट प्रबंधन मॉडल लागू करने की यह पहली कोशिश है, जो धार्मिक परंपरावादियों और आधुनिक प्रशासनिक सोच के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गई है।

आगे क्या होगा

बुधवार की बैठक में ट्रस्ट के सदस्य तीन नामों में से एक पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। हालाँकि संत समाज की नाराजगी को देखते हुए यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। राम मंदिर का पहला सीईओ कौन होगा — और क्या यह पद किसी संत को दिया जाएगा या किसी प्रशासनिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को — इस पर अयोध्या और देशभर के धार्मिक हलकों की नज़रें टिकी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक स्थलों के शासन की परिभाषा बदलने की एक बड़ी कोशिश है — और संत समाज की आपत्ति इसी के खिलाफ है। विहिप का डैमेज कंट्रोल दिखाता है कि हिंदू धार्मिक संस्थाओं के भीतर परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के बीच की खाई को पाटना आसान नहीं। असली सवाल यह है कि क्या ट्रस्ट किसी ऐसे व्यक्ति को सीईओ नियुक्त करेगा जो संत समाज को स्वीकार्य हो, या फिर यह विवाद लंबे समय तक राम मंदिर की प्रतिष्ठा पर असर डालता रहेगा।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ कौन होगा?
अभी तक किसी एक नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ट्रस्ट की चयन समिति ने तीन नाम तय किए हैं और बुधवार की बैठक में अंतिम फैसला होने की संभावना है।
संत समाज राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति का विरोध क्यों कर रहा है?
संतों का कहना है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल का प्रबंधन कॉर्पोरेट मॉडल से नहीं, बल्कि पारंपरिक पाँच-भूमिका प्रणाली — महंत, अधिकारी, पुजारी, कोठारी और भंडारी — के ज़रिए होना चाहिए। उनका मानना है कि यह व्यवस्था अयोध्या की धार्मिक परंपरा के अनुकूल नहीं है।
विहिप के केंद्रीय सलाहकार दिनेश जी. की अयोध्या यात्रा का उद्देश्य क्या था?
दिनेश जी. ने संतों की नाराजगी को शांत करने के लिए अयोध्या का दौरा किया। बैठक में मठों के विकास, शास्त्री परंपरा की गरिमा और युवा संतों के भविष्य पर चर्चा हुई। इसे डैमेज कंट्रोल की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
वेद-वेदांग विश्वविद्यालय की बात क्यों उठी?
महंत सीताराम दास महाराज ने बैठक में अयोध्या में वेद-वेदांग विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रखा, ताकि वेदों और शास्त्रों की शिक्षा परंपरागत रूप से जारी रह सके और सनातन संस्कृति को संरक्षित किया जा सके।
राम मंदिर ट्रस्ट की बुधवार की बैठक में क्या होने की उम्मीद है?
बुधवार की बैठक में ट्रस्ट के सदस्य तीन अंतिम उम्मीदवारों में से एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। हालाँकि संत समाज की आपत्तियों को देखते हुए यह प्रक्रिया विवादास्पद रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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