राम मंदिर ट्रस्ट की अयोध्या बैठक: पहले सीईओ की नियुक्ति में देरी, स्क्रीनिंग अधूरी
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 23 जुलाई 2025 को अयोध्या में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है, जिसमें मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति और ट्रस्ट में रिक्त तीन पदों को भरने पर विचार-विमर्श होगा। हालाँकि, सूत्रों के अनुसार इस बैठक में सीईओ पद पर अंतिम निर्णय होने की संभावना नहीं है, क्योंकि आवेदकों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों को लेकर ट्रस्ट विवादों के घेरे में है।
सीईओ नियुक्ति में देरी क्यों
सूत्रों के मुताबिक, सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश हेतु गठित तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों की अधिकता के कारण समिति के लिए तय समय-सीमा में स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर पाना संभव नहीं हो सका। इस स्थिति में समिति के बैठक से पहले तीन उम्मीदवारों की अंतिम शॉर्टलिस्ट सौंपने की संभावना नहीं है, जिससे मंदिर के पहले पेशेवर सीईओ के चयन में और विलंब होगा।
सीईओ पद क्यों बनाया गया
गौरतलब है कि सीईओ का पद सृजित करने का निर्णय ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक में लिया गया था। यह बैठक मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों के बाद बुलाई गई थी। उस समय ट्रस्ट ने मंदिर के प्रबंधन को सुदृढ़ करने, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने, सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से एक पेशेवर प्रशासनिक ढाँचा लाने का संकल्प लिया था। नियुक्ति के बाद सीईओ मंदिर के दैनिक संचालन, प्रबंधन निर्णयों के क्रियान्वयन और कर्मचारियों की देखरेख के लिए जिम्मेदार होंगे। ट्रस्ट की स्वीकृति से उन्हें सेक्रेटरी और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार भी प्राप्त होगा।
तीन रिक्त पदों पर चर्चा
सीईओ नियुक्ति के अतिरिक्त ट्रस्ट में रिक्त तीन पदों को भरने पर भी विचार होना है। इनमें से एक पद अयोध्या के शाही परिवार के पूर्व प्रमुख और ट्रस्टी बिमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद रिक्त हुआ था। शेष दो पद पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद खाली हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कृष्ण मोहन ट्रस्ट के स्थायी महासचिव पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। ट्रस्टी पदों के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. बांगड़ा जैसे नामों पर विचार किए जाने की खबरें हैं।
आगे क्या होगा
इस बैठक के नतीजे राम मंदिर के भावी प्रशासनिक ढाँचे की दिशा तय करेंगे। हालिया विवादों के बाद ट्रस्ट पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव है। विशेषज्ञ समिति की शॉर्टलिस्ट तैयार होने के बाद ही सीईओ नियुक्ति की प्रक्रिया अगले चरण में पहुँच सकेगी।