राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति तय, 2 सितंबर को ट्रस्ट करेगा अंतिम फैसला
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर को पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जा चुका है। सीईओ चयन के लिए गठित सर्च कमेटी ने 5,585 आवेदनों की बहुस्तरीय छंटाई और मूल्यांकन के बाद तीन अंतिम उम्मीदवारों का पैनल 1 सितंबर 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को सौंप दिया। अब 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इस पैनल पर विचार कर पहले पूर्णकालिक सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।
चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण
राम जन्मभूमि परिसर स्थित ग्रीन हाउस के मीटिंग हॉल में सर्च कमेटी के सदस्यों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष संत गोविंददेव गिरी और महासचिव कृष्ण मोहन को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। इसी के साथ करीब दो महीने लंबी चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण पूरा हो गया।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष संत गोविंददेव गिरी ने बताया कि सर्च कमेटी ने आवेदनों की कई स्तरों पर छंटाई के बाद 16 उम्मीदवारों के प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिए और अब अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट की विषयवस्तु पर ट्रस्ट के पदाधिकारी एकांत में विचार करेंगे और अंतिम निर्णय न्यास मंडल लेगा।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे पहुँचे तीन नामों तक
सर्च कमेटी के सचिव समीर पंडा के अनुसार, शुरुआती 5,585 आवेदनों में से पहले लगभग 3,000, फिर 1,500 और उसके बाद 300 उम्मीदवारों को क्रमशः छाँटा गया। अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों के साथ 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में आमने-सामने विस्तृत साक्षात्कार हुए। योग्यता, अनुभव, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और निर्धारित मानकों पर अंतिम मूल्यांकन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया।
गौरतलब है कि चयन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सक्षम और पारदर्शी बनाने के लिए दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर, ओडिशा में टीमों ने समानांतर रूप से स्क्रीनिंग और मूल्यांकन का कार्य किया।
सर्च कमेटी की संरचना
सीईओ चयन के लिए गठित समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल रहे। न्यायपालिका, रक्षा और वैज्ञानिक क्षेत्र के व्यापक अनुभव वाली इस त्रिसदस्यीय समिति ने बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया अपनाई।
संत गोविंददेव गिरी ने तीनों सदस्यों और समिति के सचिव समीर पंडा के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने दिन-रात मेहनत कर यह प्रक्रिया पूरी की।
सीईओ पद का महत्व
राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद अब मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, विभिन्न परियोजनाओं के प्रबंधन और देश-विदेश से जुड़े धार्मिक एवं संस्थागत समन्वय के लिहाज से सीईओ का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर परिसर से जुड़े संस्थागत दायित्व तेज़ी से बढ़ रहे हैं और व्यावसायिक प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
आगे क्या होगा
सभी की निगाहें अब 2 सितंबर 2026 को होने वाली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक पर टिकी हैं। बैठक में सर्च कमेटी की अंतिम रिपोर्ट और तीन नामों के पैनल पर विचार किया जाएगा। ट्रस्ट की स्वीकृति के बाद राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है, जो मंदिर प्रशासन के एक नए संस्थागत अध्याय की शुरुआत होगी।