राम मंदिर चढ़ावा चोरी और खाली पद: ट्रस्ट की बैठक में उठेंगे अहम सवाल, महंत दिनेंद्र दास ने गिनाए मुद्दे
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 23 जुलाई 2025 को होने वाली बैठक से पहले ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में चढ़ावा चोरी का कथित मामला, ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया और मंदिर प्रशासन से जुड़े कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अयोध्या में होने वाली यह बैठक ट्रस्ट के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग के बीच बुलाई गई है।
बैठक के प्रमुख एजेंडे
महंत दिनेंद्र दास महाराज ने बताया कि रामलला के स्थान पर कथित चढ़ावा चोरी का मामला बैठक में प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रस्ट में रिक्त पड़े तीन पदों को भरने पर भी चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।
महासचिव पद पर अनिश्चितता
जब महंत दिनेंद्र दास से पूछा गया कि पिछली बैठक में कार्यवाहक महासचिव बनाए गए कृष्ण मोहन को स्थायी महासचिव बनाया जाएगा या किसी अन्य को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, तो उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी इस पद पर नियुक्त हो, उसका चरित्र निष्कलंक होना चाहिए — वह किसी भी प्रकार की चोरी, धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधि में लिप्त न हो और ट्रस्ट के कामकाज का पूरा हिसाब-किताब समाज के सामने रखे।
पारदर्शिता और ईमानदारी की शर्त
महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि ट्रस्ट में वही व्यक्ति उपयुक्त होगा जो रामलला के प्रति सच्ची आस्था रखता हो और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मंदिर के कार्यों और आर्थिक मामलों की जानकारी समय-समय पर समाज को दी जानी चाहिए।
सीईओ की नियुक्ति के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे पहले भगवान रामलला हैं। उनके अनुसार मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्था पहले से मौजूद है और सीईओ की कोई आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रस्ट जो भी निर्णय लेगा, वह सभी सदस्यों की सहमति से लिया जाएगा।
इकबाल अंसारी की राय: सुधार और विश्वास जरूरी
राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े रहे इकबाल अंसारी ने भी इस बैठक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में नए लोगों के आने का स्वागत होना चाहिए और अयोध्या के स्थानीय लोगों पर विश्वास रखा जाना चाहिए। उन्होंने माना कि पहले जो भी गलतियाँ हुई हैं, उनमें सुधार अनिवार्य है।
अंसारी ने राम मंदिर के धन के कथित दुरुपयोग पर कहा कि श्रद्धालु भगवान के प्रति आस्था से दान देते हैं और इस धन का उपयोग धार्मिक व जनकल्याण के कार्यों में होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने इस धन का गलत इस्तेमाल किया है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
बुधवार की बैठक के नतीजे तय करेंगे कि ट्रस्ट चढ़ावा चोरी की जाँच को किस दिशा में ले जाता है और रिक्त पदों पर नियुक्ति कब तक होती है। ट्रस्ट के फैसले पर करोड़ों रामभक्तों और मंदिर प्रशासन में सुधार की माँग कर रहे पक्षों की नजरें टिकी हैं।