राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत दिनेंद्र दास बोले — 'कमज़ोर सोच वाला इंसान कुछ भी कर सकता है'
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने 1 अगस्त 2026 को राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले और संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर प्रदर्शन करने और रामलला की तस्वीर को लेकर उठे विवाद पर महंत ने कहा कि जब किसी की सोच कमज़ोर पड़ जाती है, तो वह कुछ भी कर सकता है।
महंत की मुख्य प्रतिक्रिया
महंत दिनेंद्र दास ने कहा, 'जैसा किसी का भाव होता है, वैसा ही वह भगवान को देखता और मानता है। जिसके मन में जैसी भावना होगी, उसे वैसे ही भगवान का अनुभव होगा। हमारा सौभाग्य है कि हमें रामलला की सेवा का अवसर मिला और वैष्णव संप्रदाय इस बात से प्रसन्न है।'
धार्मिक प्रतीकों के कथित अपमान के आरोप पर उन्होंने कहा, 'जब किसी की सोच कमज़ोर हो जाती है तो वह कुछ भी कर सकता है। लेकिन हमें विश्वास है कि रामलला उन्हें भी सही रास्ता दिखाएंगे। अगर उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली, तो रामलला की कृपा उन्हें भी मिलेगी।'
व्यक्तिगत टिप्पणी से परहेज़
महंत ने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, 'वे हमसे बड़े हैं। हम तो यही प्रार्थना करेंगे कि रामलला उन्हें आशीर्वाद दें। जो लोग सच्चे मन से रामलला में आस्था रखते हैं, वे भगवान के नाम पर राजनीति नहीं करते।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन पर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।
चढ़ावा चोरी जाँच पर स्थिति
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जारी जाँच के बारे में महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के दायरे में चल रही है। उन्होंने बताया कि सोना-चाँदी सहित सभी दान सामग्री की जाँच की जा रही है और संबंधित सरकारी एजेंसियाँ अपना कार्य कर रही हैं।
महंत ने कहा, 'जो भी सामग्री को लेकर सवाल उठे थे, उसका पूरा हिसाब मौजूद है। जाँच एजेंसियाँ और अधिकारी सभी पहलुओं की जाँच कर रहे हैं। पूरा रिकॉर्ड देखा जा रहा है और व्यवस्था पारदर्शी तरीके से चल रही है।'
आस्था और राजनीति का टकराव
यह विवाद तब उभरा जब सांसद पप्पू यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के विरोध में संसद परिसर में भगवा वस्त्र धारण कर प्रदर्शन किया। इस कदम पर धार्मिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। महंत ने इस पूरे प्रकरण को आस्था और राजनीति के बीच की रेखा से जोड़ते हुए कहा कि रामलला के दरबार में आने वाले सभी का कल्याण होता है और सच अंततः सामने आएगा।