राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और दान में कोई कमी नहीं: ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और दान में गिरावट के दावों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने 12 जुलाई को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि रामलला की पूजा-अर्चना पूर्ण परंपरा और विधि-विधान के अनुसार निर्बाध रूप से जारी है और मंदिर में आस्था का प्रवाह किसी भी प्रकार से कम नहीं हुआ है।
मंदिर में श्रद्धालुओं की स्थिति
दिनेंद्र दास ने बताया कि रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार उमड़ रही है। उन्होंने हाल ही में रामकोट परिक्रमा में भाग लिया, जहाँ उनके साथ लगभग 250 से 300 श्रद्धालु मौजूद थे। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
दान व्यवस्था सामान्य
ट्रस्ट सदस्य ने स्पष्ट किया कि मंदिर में दान की व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है और श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चढ़ावे में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है। गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी के मामले के बाद से मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे थे।
आलोचनाओं पर ट्रस्ट का रुख
मंदिर को लेकर हो रही आलोचनाओं पर दिनेंद्र दास ने कहा कि इससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित नहीं होती। उन्होंने विश्वास जताया कि समय के साथ सभी स्थितियाँ सामान्य हो जाएँगी। पूर्व व्यवस्थापक गोपाल राव के मंदिर में प्रवेश से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अयोध्या की परंपराओं और वैष्णव संप्रदाय की मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए।
प्रशासनिक निर्णय और ट्रस्ट की भूमिका
दिनेंद्र दास ने कहा कि यदि प्रशासन कोई निर्णय लेता है तो ट्रस्ट उसी का पालन करेगा और व्यक्तिगत स्तर पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में प्रवेश और पास व्यवस्था की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है, किंतु दर्शन की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी है।
आगे की राह
दिनेंद्र दास के अनुसार पहले कुछ चूकें हुई होंगी, लेकिन अब रामलला की पूजा पूरी विधि-विधान के साथ हो रही है। उनका मानना है कि जब पूजा-पाठ सही ढंग से होगा तो भविष्य में किसी प्रकार की गलती नहीं होगी और सभी विवाद स्वतः समाप्त हो जाएँगे। मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सार्वजनिक नज़र अभी भी बनी हुई है।