अफगान कृषि मंत्री ओमरी की भारत यात्रा: कृषि, जल संरक्षण और खाद्य सुरक्षा में द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्री मावालावी अताउल्लाह ओमरी ने 7 से 12 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली की आधिकारिक यात्रा की। उनके साथ आए उच्चस्तरीय अफगान प्रतिनिधिमंडल ने भारत के शीर्ष कृषि संस्थानों और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, अक्टूबर 2025 के बाद से अफगानिस्तान की यह चौथी मंत्री-स्तरीय यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच गहराते कूटनीतिक और कृषि सहयोग का संकेत देती है।
मुख्य घटनाक्रम
यात्रा के दौरान अफगान मंत्री ओमरी ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में कृषि, सिंचाई, पशुधन विकास, कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और कृषि व्यापार जैसे क्षेत्रों में मौजूदा सहयोग की समीक्षा हुई और भविष्य के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
वार्ता में खाद्य सुरक्षा, बेहतर बीज प्रणाली और फसल उत्पादकता बढ़ाने के मुद्दे केंद्र में रहे। भारत ने अफगानिस्तान के कृषि क्षेत्र को सशक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों, जैव-सशक्त फसलों, टिकाऊ सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण और जलग्रहण क्षेत्र विकास पर विशेष ज़ोर दिया गया।
खाद्य प्रसंस्करण और व्यापार पर चर्चा
अफगान कृषि मंत्री ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करण में मूल्य संवर्धन, बुनियादी ढाँचे के विकास, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण पर सहमति बनाने की दिशा में चर्चा हुई।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान अपने कृषि उत्पादों — विशेषकर सूखे मेवों और मसालों — के लिए भारतीय बाज़ार को एक प्रमुख गंतव्य मानता है। इस संदर्भ में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भारत का तकनीकी सहयोग अफगानिस्तान के निर्यात आधार को मज़बूत कर सकता है।
विदेश राज्य मंत्री से भेंट
अफगान प्रतिनिधिमंडल ने विदेश राज्य मंत्री एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा से भी भेंट की। इस दौरान अफगान जनता के विकास और कल्याण से जुड़े द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रमुख संस्थानों से संवाद
प्रतिनिधिमंडल ने भारत के कई प्रतिष्ठित कृषि और अनुसंधान संस्थानों के साथ भी संवाद किया। इनमें राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (CIMMYT), अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT), अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP), अंतरराष्ट्रीय उर्वरक विकास केंद्र (IFDC), FICCI और PHDCCI शामिल रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में कृषि क्षेत्र गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है और भारत की विशेषज्ञता — विशेषकर शुष्क भूमि कृषि और जल प्रबंधन में — अफगान किसानों के लिए सीधे उपयोगी हो सकती है।
आगे की राह
यह यात्रा अक्टूबर 2025 के बाद से अफगानिस्तान की भारत को चौथी मंत्री-स्तरीय यात्रा है, जो संकेत देती है कि दोनों देश कूटनीतिक संपर्क को व्यावहारिक सहयोग में बदलने की दिशा में सक्रिय हैं। आने वाले समय में कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और व्यापार समझौतों के ज़रिए इस साझेदारी को और ठोस रूप दिए जाने की उम्मीद है।