अफगान कृषि मंत्री अताउल्लाह ओमारी नई दिल्ली पहुंचे, भारत-अफगान संबंधों पर होगी अहम बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्री मावलावी अताउल्लाह ओमारी 7 जुलाई को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने ओमारी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया कि वह 'आपसी हितों के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं।' मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'हमने पाकिस्तान से अफगानिस्तान में हुए एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की थी, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत कई आम लोगों की जान चली गई थी। हमने कीमती जानें जाने पर अपनी संवेदनाएं जाहिर की थीं और साथ ही हमने अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए अपना मजबूत समर्थन भी दोहराया था।'
पाक-अफगान तनाव की पृष्ठभूमि
यह दौरा ऐसे नाजुक भू-राजनीतिक परिदृश्य में हो रहा है, जब पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान प्रांतों पर हवाई हमले किए, जिनमें कई अफगान नागरिक हताहत हुए। भारत ने इन हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि यह 'पाकिस्तान के लगातार लापरवाह बर्ताव और अपनी सीमाओं के बाहर हिंसा के हताशाजनक कामों के जरिए अंदरूनी नाकामियों को बाहर दिखाने की उसकी बेकार कोशिश को दिखाता है।' गौरतलब है कि भारत ने इस संकट में अफगानिस्तान की संप्रभुता के पक्ष में खड़े होकर अपनी स्पष्ट कूटनीतिक स्थिति जाहिर की है।
भारत की मानवीय सहायता
भारत अफगानिस्तान को लगातार मानवीय सहायता प्रदान कर रहा है। 17 जून को काबुल को पाँच टन जरूरी दवाइयाँ पहुंचाई गईं। इससे पहले 22 मई को 20 टन बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (BCG) और टेटनस-डिप्थीरिया (TD) वैक्सीन भेजी गई थीं, जिनका उद्देश्य अफगान बच्चों में टीकाकरण अभियान को बल देना था। जायसवाल ने स्पष्ट किया, 'हम उन्हें दवाएं भेज रहे हैं, दूसरी मदद भी भेज रहे हैं और ऐसी विकास परियोजनाएं भी दे रहे हैं जिनसे वहां के लोगों की जिंदगी को फायदा हो सकता है, और यह जारी है।'
द्विपक्षीय संबंधों का महत्व
पिछले हफ्ते भारत ने सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से काबुल को समर्थन जारी रखने का वादा किया था। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बावजूद भारत ने व्यावहारिक कूटनीति अपनाते हुए अफगान जनता के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। ओमारी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच कृषि, सिंचाई और विकास सहयोग की दिशा में नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।
आगे क्या
ओमारी के दौरे के दौरान होने वाली बातचीत के नतीजे भारत-अफगान संबंधों की भावी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत दक्षिण एशिया में एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।