पौधरोपण महायज्ञ 2026: CM योगी बोले — वनों से ही नदियाँ रहेंगी सदानीरा, 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जुलाई 2026 को गोरखपुर में पौधरोपण महायज्ञ 2026 के अंतर्गत आरकेबीके के समीप ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा रोपने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वन और वृक्ष ही नदियों को सदानीरा बनाए रखते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से जल संकट और खाद्यान्न अभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मुख्यमंत्री का पर्यावरण संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक वृक्ष अपने भीतर हजारों लीटर जल का अवशोषण करता है और नदियाँ वहीं बारहमासी रहती हैं जहाँ पर्याप्त वन आच्छादन हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र बिगड़ता है, जिसका सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ता है। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पेयजल संकट और सूखे की स्थिति को जन्म देती है।
35 करोड़ पौधरोपण का महालक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश सरकार ने एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 57 लाख से अधिक नर्सरियाँ होने के कारण यह लक्ष्य कठिन नहीं है। इस महाभियान में औषधीय, फलदार, छायादार और इमारती — सभी प्रकार के पौधे लगाए जा रहे हैं।
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक नागरिक से 'एक पेड़ माँ के नाम' थीम को समर्पित पौधरोपण महाभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा का संकल्प भी लेना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पर्यावरण क्षरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता गहरी हो रही है।
वनाच्छादन में विस्तार के दावे
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाती आई है और पौधों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इसी के परिणामस्वरूप सर्वेक्षणों में वनाच्छादन का विस्तार स्पष्ट दिखाई देता है। गौरतलब है कि भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता ज्ञापन को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है और व्यापक पौधरोपण के माध्यम से प्रकृति के प्रति यह कृतज्ञता वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बना सकती है।
आगे क्या
प्रदेश सरकार का यह महाभियान जारी रहेगा और लक्ष्य की पूर्ति की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधरोपण के साथ-साथ उनकी दीर्घकालिक देखभाल और जीवित रहने की दर को सुनिश्चित करना इस अभियान की असली कसौटी होगी।