12 जुलाई 2026
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सीएम योगी ने गोरखपुर में 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया, बोले — पर्यावरण संरक्षण राष्ट्रीय दायित्व

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सीएम योगी ने गोरखपुर में 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया, बोले — पर्यावरण संरक्षण राष्ट्रीय दायित्व

सारांश

सीएम योगी ने 12 जुलाई को गोरखपुर से 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान की शुरुआत की — नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधों के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा एकल-दिवसीय लक्ष्य है। उनका संदेश साफ था: विकास और प्रकृति साथ चल सकते हैं, और पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 जुलाई 2026 को गोरखपुर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया।
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
पिछले वर्ष के पौधरोपण से लगभग 4.30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण का अनुमान लगाया गया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 जुलाई 2026 को गोरखपुर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का राष्ट्रीय दायित्व है। मुख्यमंत्री ने स्वयं मौलश्री का पौधा लगाकर इस वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 का विधिवत उद्घाटन किया।

अभियान की मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी ने वैदिक मंत्र 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' का उल्लेख करते हुए कहा कि धरती हमारी माता है और प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह उसके संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वृक्षारोपण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाया है और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी प्रेरक थीम इसी सोच की उपज है।

नौ वर्षों की उपलब्धि और इस वर्ष का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस वर्ष 12 जुलाई को एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उपग्रह सर्वेक्षण और विभिन्न संस्थाओं के आकलन से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश का वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। पिछले वर्ष लगाए गए पौधों के कारण लगभग 4.30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण का अनुमान लगाया गया है, जिसे उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का मॉडल

योगी आदित्यनाथ ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश ने एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, उद्योग, रेलवे और शहरीकरण में रिकॉर्ड प्रगति करते हुए भी वनाच्छादन का विस्तार जारी रखा है। उनके अनुसार यह विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का एक अनुकरणीय मॉडल है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश के कई राज्य तेज औद्योगिक विस्तार के कारण हरित आवरण में गिरावट का सामना कर रहे हैं।

वैश्विक पर्यावरण संकट और भारत की चुनौतियाँ

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। कई शहर गैस चैंबर जैसी स्थिति झेल रहे हैं और समुद्र का बढ़ता जलस्तर भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रकृति के साथ अंधाधुंध छेड़छाड़, पेड़ों की कटाई, जल संरक्षण की उपेक्षा और तालाबों पर अवैध कब्जों का परिणाम है।

उज्ज्वला योजना और जनता से अपील

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि देशभर में करोड़ों परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ परिवार शामिल हैं। इससे माताओं और बहनों को धुएं से मुक्ति मिली और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा कम हुआ। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वृक्षारोपण को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण का संकल्प भी लें — ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण विरासत में मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने पौधे पाँच साल बाद जीवित रहते हैं — एक आँकड़ा जो सरकारी रिपोर्टों में प्रायः अनुपस्थित रहता है। गौरतलब है कि 4.30 लाख टन कार्बन अवशोषण का दावा 'अनुमान' पर आधारित है, सत्यापित माप पर नहीं। उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र में वृद्धि का दावा उपग्रह सर्वेक्षण पर टिका है, जो एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जैव विविधता और वन गुणवत्ता के मानक केवल पौधों की संख्या से नहीं मापे जाते। विकास और प्रकृति के संतुलन का नारा तब विश्वसनीय बनेगा जब पौधरोपण की दीर्घकालिक उत्तरजीविता दर सार्वजनिक की जाए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू किया गया राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान है, जिसमें नागरिकों को अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में इसे 12 जुलाई 2026 को 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान के रूप में विस्तारित किया गया।
उत्तर प्रदेश में अब तक कितने पौधे लगाए जा चुके हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस वर्ष 12 जुलाई को एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पौधरोपण से कार्बन अवशोषण कितना हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष लगाए गए पौधों के कारण लगभग 4.30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान उपग्रह सर्वेक्षण और विभिन्न संस्थाओं के आकलन पर आधारित है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का पर्यावरण से क्या संबंध है?
सीएम योगी ने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए, जिससे लकड़ी और कोयले के जलाने से होने वाला धुआँ कम हुआ। इससे वनों पर दबाव घटा और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी कम हुआ।
सीएम योगी ने नागरिकों से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे वृक्षारोपण को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि लगाए गए पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण का संकल्प भी लें। उनका कहना था कि तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित पर्यावरण विरासत में मिल सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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