'एक पेड़ मां के नाम' अभियान: CM योगी ने 6 ग्राम प्रधानों व छात्रों को किया सम्मानित, 5 करोड़ पौधरोपण महाभियान शुरू
सारांश
मुख्य बातें
विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत एक ही दिन में 5 करोड़ पौधरोपण महाभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगो डिजाइन व चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं और आर्द्रभूमि संरक्षण में योगदान देने वाले 6 ग्राम प्रधानों को पुरस्कृत किया।
पौधरोपण महाभियान का शुभारंभ
योगी सरकार ने विश्व पर्यावरण दिवस को एक प्रतीकात्मक अवसर के रूप में चुनते हुए प्रदेश भर में 5 करोड़ पौधे एक ही दिन में लगाने का संकल्प लिया। यह अभियान केंद्र सरकार की 'एक पेड़ मां के नाम' मुहिम से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जन-जन से जोड़ना है। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के अवसर पर भी आयोजित हुआ।
लोगो डिजाइन प्रतियोगिता के विजेता
लोगो डिजाइन प्रतियोगिता में ललितपुर की कक्षा सात की छात्रा माही रजा ने प्रथम स्थान प्राप्त कर ₹50,000 का पुरस्कार जीता। कन्नौज की कक्षा पाँच की छात्रा सुंबुल फातिमा को ₹25,000 का द्वितीय पुरस्कार मिला। मिर्जापुर की कक्षा दस की छात्रा श्रद्धा त्रिपाठी को तृतीय पुरस्कार से नवाज़ा गया।
सुंबुल फातिमा ने कहा कि मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। श्रद्धा त्रिपाठी ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी खुशी जताई।
चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार
चित्रकला प्रतियोगिता में अजय कुमार दुबे को प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹25,000, सृष्टि शुक्ला को द्वितीय पुरस्कार के रूप में ₹15,000 और सुधाकर को तृतीय पुरस्कार के रूप में ₹10,000 की राशि प्रदान की गई। लखीमपुर खीरी की सृष्टि शुक्ला ने बताया कि उन्होंने शकुंतला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है और प्रदेश भर के प्रतिभागियों के बीच द्वितीय स्थान पाकर वे गर्वान्वित हैं।
ग्राम प्रधानों का सम्मान
आर्द्रभूमि (वेटलैंड) अधिसूचना को सफलतापूर्वक कार्यान्वित करने वाले 6 ग्राम प्रधानों को मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सम्मानित किया। इनमें बाराबंकी के राजकिशोर वर्मा और सुशील कुमार सिंह, चित्रकूट के मंटू सिंह, अयोध्या के मंशाराम, फर्रुखाबाद के हरेंद्र सिंह और चंदौली की अनीता देवी शामिल हैं। राजकिशोर वर्मा ने बताया कि उनकी झील को वेटलैंड घोषित कराने के प्रयास को मुख्यमंत्री ने मान्यता दी, जिसके लिए वे आभारी हैं।
आगे की राह
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जमीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश का हिस्सा है। ग्राम प्रधानों और युवा छात्रों की भागीदारी यह संकेत देती है कि सरकार पर्यावरणीय जागरूकता को शिक्षा और स्थानीय शासन दोनों से जोड़ने का प्रयास कर रही है। आने वाले महीनों में पौधरोपण की प्रगति की निगरानी किस तंत्र से होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।