सीएआरए की पुणे वर्कशॉप: दिव्यांग बच्चों को गोद लेने के लिए 74 ज़िलों के 150 स्टेकहोल्डर्स एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने 3 सितंबर 2026 को पुणे, महाराष्ट्र में वेस्टर्न जोन के लिए अपनी चौथी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें 74 से अधिक ज़िलों के 150 हितधारकों ने भाग लिया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन इस संस्था ने यह आयोजन महाराष्ट्र सरकार और स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (एसएआरए), महाराष्ट्र के सहयोग से किया।
वर्कशॉप का उद्देश्य और विषय
यह कार्यशाला सीएआरए के 'गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025' की कड़ी में आयोजित की गई। अभियान का केंद्रीय विषय था — 'खास जरूरतों वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना'। इसका मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग बच्चों को संस्थागत देखभाल की जगह परिवार-आधारित, प्रेमपूर्ण और सहयोगी माहौल में पालन-पोषण का अवसर मिले।
गौरतलब है कि यह वर्कशॉप ऐसे समय में आई है जब देशभर में दिव्यांग बच्चों की गोद लेने की दर अपेक्षाकृत कम बनी हुई है और सरकार परिवार-आधारित पुनर्वास को संस्थागत विकल्पों पर प्राथमिकता देने की नीति पर काम कर रही है।
वेस्टर्न जोन की व्यापक भागीदारी
वेस्टर्न जोन में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव शामिल हैं — एक विशाल भौगोलिक और प्रशासनिक क्षेत्र। इस कार्यशाला ने गोद लेने और बाल पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर क्षेत्रीय संवाद, सूचना-साझेदारी और समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच का काम किया।
सरकार की प्रतिक्रिया और संदेश
महाराष्ट्र सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति वर्दा सुनील तटकरे ने वीडियो संदेश के माध्यम से हितधारकों को संबोधित किया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे गोद लेने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए स्थायी, प्रेमपूर्ण पारिवारिक माहौल सुनिश्चित करने हेतु मिलकर काम करें। उन्होंने निरंतर सहयोग, जागरूकता और समन्वित प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सीएआरए की सीईओ और सदस्य सचिव भावना सक्सेना ने कहा कि संस्था की आउटरीच और परामर्श पहलों ने गोद लेने की व्यवस्था को मज़बूत करने में सकारात्मक योगदान दिया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को स्थायी पारिवारिक देखभाल दिलाने के लिए और अधिक सशक्त तथा समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
आगे की राह
यह चौथी क्षेत्रीय कार्यशाला सीएआरए के राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान की निरंतरता को दर्शाती है। आने वाले महीनों में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की परामर्श कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की संभावना है, ताकि दिव्यांग बच्चों के लिए गोद लेने की प्रक्रिया को देशभर में और सुलभ बनाया जा सके।