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बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र हमारा अंतिम लक्ष्य: मंत्री अदिति तटकरे, 1,450 विवाह रोके

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बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र हमारा अंतिम लक्ष्य: मंत्री अदिति तटकरे, 1,450 विवाह रोके

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक मोर्चा भी खोला है — बाल गृह, डिजिटल ट्रैकिंग और पुजारियों तक पर मुकदमे। चालू वर्ष में 1,450 विवाह रोके जाने का दावा बताता है कि यह अभियान ज़मीन पर उतर रहा है।

मुख्य बातें

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने 30 मई 2026 को 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' को राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य घोषित किया।
प्रशासन ने पिछले वर्ष 1,400 और चालू वर्ष में 1,450 बाल विवाह रोके।
मराठवाड़ा में प्रवासी मज़दूर परिवारों की बेटियों की सुरक्षा के लिए विशेष 'बाल गृह' आश्रय स्थापित किए गए।
प्रवासी बच्चों के लिए डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल शुरू, ताकि पलायन के दौरान आंगनवाड़ी सेवाएँ न टूटें।
बाल विवाह में शामिल पुजारियों, बिचौलियों और मेहमानों के खिलाफ भी मामले दर्ज करने की नीति लागू।

महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने 30 मई 2026 को स्पष्ट किया कि 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' राज्य सरकार का सर्वोच्च और अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) ने इस दिशा में एक सक्षम, गतिशील और आधुनिक प्रणाली तैयार की है, जो केवल कानून प्रवर्तन तक सीमित नहीं, बल्कि समुदाय की जड़ों तक पहुँचती है।

अभियान की उपलब्धियाँ

मंत्री तटकरे के अनुसार, समुदाय-संचालित इस अभियान ने ठोस परिणाम दिए हैं। प्रशासन ने पिछले वर्ष 1,400 और चालू वर्ष में 1,450 बाल विवाहों को सफलतापूर्वक रोका है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कानून प्रवर्तन से आगे बढ़कर हर स्तर पर आम नागरिकों को इस अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ा गया है, जिससे यह एक वास्तविक जन-आंदोलन बन सका है।

बाल विवाह की जड़ें: प्रवासन और असुरक्षा

मंत्री ने बताया कि बाल विवाह सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरियों से गहराई से जुड़े हुए हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र सहित राज्यभर में बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर परिवार हैं, जहाँ माता-पिता दिनभर दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं। ऐसे में 12 से 14 वर्ष की बेटी को घर पर अकेला छोड़ना सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएँ पैदा करता है, और यही असुरक्षा परिवारों को कम उम्र में विवाह की ओर धकेलती है।

बाल गृह और डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल

इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने विशेष 'बाल गृह' आश्रय स्थापित किए हैं, जहाँ युवा लड़कियाँ पूरी सुरक्षा में रहते हुए बिना किसी रुकावट के शिक्षा जारी रख सकती हैं। इसके अलावा, प्रवासी श्रमिकों के छोटे बच्चों के लिए एक आधुनिक ट्रैकिंग पोर्टल शुरू किया गया है। यह डिजिटल प्रणाली सुनिश्चित करती है कि जब परिवार काम के लिए एक जिले से दूसरे जिले में जाते हैं, तो बच्चों का नामांकन निकटतम स्थानीय आंगनवाड़ी में स्वतः हो जाए और कोई भी बच्चा सेवाओं से वंचित न रहे।

जीरो टोलरेंस: पुजारी और मेहमान भी दायरे में

मंत्री तटकरे ने जीरो टोलरेंस नीति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विभाग ने न केवल बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, बल्कि विवाह कराने वाले पुजारियों, बिचौलियों और विवाह में शामिल मेहमानों के खिलाफ भी मामले दर्ज करना शुरू कर दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि वह स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। उनके अनुसार, इस सख्त कानूनी रुख ने समाज को एक सशक्त और स्पष्ट संदेश दिया है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए कानूनी कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता दोनों का संतुलन ज़रूरी है। महाराष्ट्र सरकार का यह बहुआयामी दृष्टिकोण — आश्रय, डिजिटल ट्रैकिंग, सामुदायिक भागीदारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई — अन्य राज्यों के लिए एक संभावित मॉडल बन सकता है। अब देखना यह होगा कि यह अभियान ज़मीनी स्तर पर किस हद तक टिकाऊ साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 'रोके गए' विवाहों की गिनती कैसे होती है — क्या ये स्थायी रूप से टले या महज़ स्थगित हुए? मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में जहाँ प्रवासन और गरीबी की जड़ें गहरी हैं, वहाँ बाल गृह और ट्रैकिंग पोर्टल तब तक पर्याप्त नहीं होंगे जब तक आर्थिक सुरक्षा का ढाँचा नहीं बदलता। पुजारियों और मेहमानों पर मुकदमे एक साहसी कदम है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में एकरूपता सुनिश्चित करना ज़रूरी है — अन्यथा यह चुनिंदा प्रवर्तन बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' अभियान क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार का राज्यव्यापी अभियान है जिसका लक्ष्य बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करना है। इसमें कानूनी कार्रवाई, बाल गृह आश्रय, डिजिटल ट्रैकिंग और सामुदायिक भागीदारी शामिल है।
महाराष्ट्र में अब तक कितने बाल विवाह रोके गए हैं?
मंत्री अदिति तटकरे के अनुसार, प्रशासन ने पिछले वर्ष 1,400 और चालू वर्ष में 1,450 बाल विवाह सफलतापूर्वक रोके हैं।
बाल गृह आश्रय किसके लिए हैं और इनका उद्देश्य क्या है?
ये आश्रय विशेष रूप से प्रवासी मज़दूर परिवारों की उन युवा लड़कियों के लिए हैं जिन्हें माता-पिता के काम पर जाने के दौरान घर पर अकेला रहना पड़ता है। यहाँ लड़कियाँ सुरक्षित रहते हुए अपनी शिक्षा निर्बाध जारी रख सकती हैं।
बाल विवाह में पुजारियों और मेहमानों पर कार्रवाई कैसे होती है?
महाराष्ट्र WCD विभाग ने जीरो टोलरेंस नीति के तहत माता-पिता के साथ-साथ विवाह कराने वाले पुजारियों, बिचौलियों और विवाह में शामिल मेहमानों के खिलाफ भी मामले दर्ज करना शुरू किया है। मंत्री तटकरे स्वयं इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं।
मराठवाड़ा में बाल विवाह की समस्या विशेष रूप से क्यों गंभीर है?
मराठवाड़ा में बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर परिवार हैं जहाँ माता-पिता दिहाड़ी मज़दूरी के लिए घर से दूर रहते हैं। 12 से 14 वर्ष की बेटियों को अकेला छोड़ने की सुरक्षा चिंता परिवारों को कम उम्र में विवाह की ओर प्रेरित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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