12 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल में अवैध मदरसों की समीक्षा: 12 जिलों के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित, 21 जुलाई तक रिपोर्ट

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पश्चिम बंगाल में अवैध मदरसों की समीक्षा: 12 जिलों के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित, 21 जुलाई तक रिपोर्ट

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध 'खारिजी मदरसों' की पहचान के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित की है जो 12 जिलों का दौरा कर 21 जुलाई तक रिपोर्ट देगी। BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद मंत्री खुदीराम टुडू ने ऐसे मदरसों को बंद करने और दोषियों को दंडित करने की घोषणा की थी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने 18 सदस्यीय समिति गठित की है।
समिति 15 जुलाई से 12 जिलों का दौरा शुरू करेगी और 21 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपेगी।
समीक्षा के दायरे में कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर व दक्षिण 24 परगना सहित 12 जिले शामिल हैं।
जिला अधिकारियों से 5 जुलाई तक मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई थी।
मंत्री खुदीराम टुडू ने मई में ही अवैध मदरसों को बंद करने और दोषियों को दंडित करने की घोषणा की थी।

पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों — जिन्हें सामान्यतः 'खारिजी मदरसा' कहा जाता है — की पहचान के लिए जारी सर्वेक्षण की समीक्षा हेतु 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 15 जुलाई से संबंधित जिलों का दौरा शुरू करेगी और 21 जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिला अधिकारियों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर इन 12 जिलों की पहचान की गई है, जहाँ बड़ी संख्या में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की आशंका है। इसी कारण अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेने से पहले दूसरी बार विस्तृत समीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है।

जिन जिलों में यह समीक्षा होगी, उनमें कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं।

सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि

जून के पहले सप्ताह में राज्य सरकार ने जिला अधिकारियों (डीएम) को निर्देश जारी कर अपने-अपने जिलों में संचालित मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट 5 जुलाई तक राज्य सचिवालय नबान्न को भेजने को कहा था। इस निर्देश में प्रत्येक मदरसे की स्थापना तिथि, विभाग में पंजीकरण की स्थिति, छात्र-छात्राओं की संख्या, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जानकारी, आवासीय स्वरूप तथा पाठ्यक्रम संबंधी विवरण माँगा गया था।

गौरतलब है कि यह पूरी प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू हुई है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार राज्य में सत्ता में आई है और अवैध धार्मिक शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई को अपनी प्राथमिकता बता चुकी है।

मंत्री की घोषणा

मई में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद खुदीराम टुडू ने घोषणा की थी कि राज्य प्रशासन अवैध रूप से संचालित मदरसों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि एक बार पहचान हो जाने पर ऐसे मदरसों को बंद किया जाएगा और इन संस्थानों की आड़ में अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को भी दंडित किया जाएगा।

आगे की प्रशासनिक कार्रवाई

समिति की सिफारिशें प्राप्त होने के बाद अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगा। यह रिपोर्ट राज्य सरकार को यह निर्धारित करने में सहायता करेगी कि किन मदरसों को नियमित किया जा सकता है और किन्हें बंद करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया के परिणाम राज्य की मदरसा शिक्षा नीति की दिशा को स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ धार्मिक शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करना राजनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। हालाँकि, समीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी है — क्योंकि 'अवैध' की परिभाषा और कार्रवाई का दायरा विवाद का विषय बन सकता है। यह भी देखना होगा कि समिति की सिफारिशें केवल बंद करने तक सीमित रहती हैं या नियमितीकरण का कोई रास्ता भी सुझाया जाता है। बिना स्पष्ट पुनर्वास नीति के, हज़ारों छात्रों की शिक्षा प्रभावित होने का जोखिम नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में गठित 18 सदस्यीय समिति का काम क्या है?
यह समिति राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों (खारिजी मदरसा) की पहचान के लिए जारी सर्वेक्षण की समीक्षा करेगी। समिति 15 जुलाई से जिलों का दौरा शुरू कर 21 जुलाई तक अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग को रिपोर्ट सौंपेगी।
किन 12 जिलों में यह समीक्षा होगी?
कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना — इन 12 जिलों में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की बड़ी संख्या होने की आशंका के आधार पर इनका चयन किया गया है।
खारिजी मदरसा क्या होते हैं?
खारिजी मदरसे वे धार्मिक शिक्षण संस्थान हैं जो सरकारी मान्यता या पंजीकरण के बिना संचालित होते हैं। ये राज्य के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग में पंजीकृत नहीं हैं और सरकारी पाठ्यक्रम या निगरानी के दायरे से बाहर हैं।
अवैध मदरसों पर क्या कार्रवाई होगी?
मंत्री खुदीराम टुडू ने मई में घोषणा की थी कि पहचान के बाद अवैध रूप से संचालित मदरसों को बंद किया जाएगा। इसके अलावा मदरसों की आड़ में अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को भी दंडित किया जाएगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर विभाग अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेगा।
इस सर्वेक्षण की शुरुआत कब और कैसे हुई?
जून 2026 के पहले सप्ताह में राज्य सरकार ने जिला अधिकारियों को निर्देश जारी कर 5 जुलाई तक मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट नबान्न को भेजने को कहा था। इन प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर ही 12 जिलों की पहचान की गई और 18 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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