श्रेयस अय्यर की टी20 कप्तानी पर फैसला जल्दबाजी होगी: अभिषेक नायर
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय क्रिकेटर अभिषेक नायर ने स्पष्ट किया है कि लगातार दो टी20 सीरीज में हार के बाद श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर सवाल खड़े करना अभी उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि किसी भी नए कप्तान को अपनी रणनीति के अनुसार टीम गढ़ने का पर्याप्त समय और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
निराशाजनक शुरुआत का संदर्भ
श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारतीय टी20 टीम की शुरुआत बेहद कठिन रही है। आयरलैंड के खिलाफ टीम ने 0-2 से सीरीज गँवाई — यह पहली बार था जब भारत ने आयरलैंड से टी20 सीरीज हारी। इसके बाद इंग्लैंड ने पाँच मैचों की सीरीज में भारत को 4-0 से पराजित किया। इस हार के साथ ही भारत की आईसीसी टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग में चली आ रही बादशाहत भी समाप्त हो गई।
नायर का तर्क: पहले स्वतंत्रता, फिर परीक्षण
नायर ने 'जियो हॉटस्टार' से बातचीत में कहा, 'जब आप किसी को एक चैंपियन टीम की कमान सौंपते हैं, तो आप उन्हें अपनी टीम चुनने की आज़ादी भी देना चाहते हैं। जब आप पहली बार कप्तान बनते हैं, तो आपको यह कहने की आज़ादी नहीं मिलती कि मैं टीम को इस दिशा में ले जाना चाहता हूँ। आप पहले टीम को संभालते हैं और फिर देखते हैं कि आपको इसके साथ क्या करना है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'इन दो सीरीज के बाद अय्यर को सोचने और यह समझने का समय मिलेगा कि उन्हें इस टीम से क्या चाहिए। वे कैसे चाहते हैं कि टीम खेले और उन्हें सपोर्ट स्टाफ से क्या चाहिए। इसीलिए यह कहना गलत होगा कि कप्तान के तौर पर श्रेयस अय्यर का भविष्य खतरे में है।'
सफल कप्तानों से तुलना
नायर ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए कई उदाहरण दिए। उन्होंने हैरी ब्रूक, बेन स्टोक्स, रोहित शर्मा और विराट कोहली का संदर्भ लेते हुए कहा, 'उन्हें यह महसूस करने दें कि यह उनकी टीम है — जैसे हैरी ब्रूक अभी महसूस करते हैं, या बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड की टेस्ट टीम के साथ किया था, या रोहित शर्मा ने कप्तान रहते हुए किया था, या विराट कोहली ने टेस्ट टीम के साथ किया था — तब उन्हें परखना ज़्यादा सही रहेगा।'
शुभमन गिल का उदाहरण और आगे की राह
नायर ने शुभमन गिल का भी उल्लेख किया, जो पहली बार वनडे कप्तान बनने पर शुरुआती कुछ सीरीज नहीं जीत पाए थे। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे आप अपनी भूमिका में ढलते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और आप वैसी टीम बनाते हैं जैसी आपने सोची होती है। अभी तो शुरुआत ही है, घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन यह साफ होना चाहिए कि यह टीम किस दिशा में जा रही है।'
नायर के इस विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि अय्यर को उनके कप्तानी कार्यकाल की शुरुआत में ही आँकना न्यायसंगत नहीं होगा — असली परीक्षा तब होगी जब वे अपनी पसंद की टीम और रणनीति के साथ मैदान में उतरें।