आयरलैंड ने 2-0 से जीती टी20 सीरीज: टीम इंडिया की हार के 5 बड़े कारण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम को आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 इंटरनेशनल सीरीज गंवानी पड़ी है। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में 1 रन की रोमांचक जीत के साथ आयरलैंड ने 2-0 से सीरीज अपने नाम कर ली। यह भारत के लिए ऐतिहासिक रूप से शर्मनाक पल है, क्योंकि आयरलैंड को अब तक द्विपक्षीय टी20 सीरीज में कभी भारत से जीत नहीं मिली थी।
टॉप ऑर्डर की बुरी तरह नाकामी
भारतीय पारी की नींव रखने वाले शीर्ष बल्लेबाज इस सीरीज में पूरी तरह विफल रहे। संजू सैमसन ने पहले टी20 में महज 5 रन बनाए और दूसरे मुकाबले में खाता तक नहीं खोल सके। अभिषेक ने पहले टी20 में 49 रनों की उम्मीद जगाने वाली पारी खेली, लेकिन दूसरे मैच में वह शून्य पर आउट हो गए। ईशान किशन दोनों मुकाबलों में मिलाकर केवल 13 रन ही जोड़ सके।
कप्तान श्रेयस अय्यर का बल्ला रहा खामोश
हालिया फॉर्म के आधार पर श्रेयस अय्यर से बतौर कप्तान दमदार प्रदर्शन की उम्मीद थी। लेकिन अपनी पहली टी20 कप्तानी सीरीज में अय्यर दोनों पारियों में कुल 13 रन ही बना सके। शीर्ष क्रम की विफलता के बाद कप्तान की यह नाकामी टीम को दोहरी मार पड़ी।
मध्यक्रम रहा खोखला, हार्दिक की कमी खली
भारतीय मध्यक्रम इस सीरीज में बेहद कमज़ोर नज़र आया। हार्दिक पांड्या की अनुपस्थिति टीम को साफ महसूस हुई। अक्षर पटेल और शिवम दुबे बल्ले से कुछ खास नहीं कर सके। तिलक वर्मा ने दूसरे टी20 में अर्धशतक ज़रूर लगाया, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट केवल 119 का रहा, जो टी20 की माँग के हिसाब से अपर्याप्त था।
टीम कॉम्बिनेशन पर उठे सवाल
दोनों मुकाबलों में भारत का टीम संयोजन सवालों के घेरे में रहा। आयरलैंड की पिचों पर पहले टी20 में वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल — दो स्पिनर उतारने का फैसला टीम के खिलाफ गया। सुंदर को केवल 1 ओवर गेंदबाज़ी करने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 19 रन दिए। इसके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा को पहले टी20 में खिलाने का निर्णय भी आलोचकों के निशाने पर रहा — कृष्णा ने 4 ओवर में बिना विकेट लिए 57 रन लुटाए।
वैभव सूर्यवंशी को नहीं मिला मौका
पहले टी20 में बल्लेबाज़ों की सामूहिक विफलता के बावजूद टीम प्रबंधन ने 15 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को दूसरे मुकाबले में मौका नहीं दिया। सूर्यवंशी भारत ए की ओर से ट्राई सीरीज में शानदार प्रदर्शन कर लौटे थे और आलोचकों का मानना है कि वह अकेले दम पर मैच का रुख पलटने में सक्षम थे। यह चयन निर्णय अब टीम प्रबंधन के लिए बड़ा सवाल बन गया है।