मेकांग नदी में आर्सेनिक का ज़हर: चीन की रेयर अर्थ इंडस्ट्री से दक्षिण-पूर्वी एशिया में पर्यावरण संकट
सारांश
मुख्य बातें
मेकांग नदी में आर्सेनिक और भारी धातुओं का प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है, और इसके पीछे कथित तौर पर चीन की तेज़ी से फैलती रेयर अर्थ माइनिंग इंडस्ट्री की भूमिका बताई जा रही है, जिसने अपना अधिकांश खनन कार्य म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में स्थानांतरित कर दिया है। इससे म्यांमार, लाओस, थाईलैंड और कंबोडिया जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं।
माइनिंग का विस्तार और म्यांमार का संकट
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अपने घरेलू रेयर अर्थ उद्योग पर पर्यावरण नियमों को तो सख्त किया, लेकिन खनन गतिविधियाँ म्यांमार के काचिन और शान राज्यों में सीमा पार स्थानांतरित कर दीं। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद इन क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन समाप्त हो गया और संसाधन-संपन्न सीमावर्ती इलाके हथियारबंद जातीय गुटों के नियंत्रण में आ गए।
आँकड़ों के अनुसार, सिर्फ काचिन राज्य में माइनिंग साइट्स की संख्या 2020 में लगभग 130 से बढ़कर 2024 के अंत तक 370 से अधिक हो गई। तख्तापलट के बाद के दो वर्षों में म्यांमार से चीन को होने वाला रेयर अर्थ निर्यात दोगुने से भी अधिक हो गया। इसमें अधिकांश हिस्सा हेवी रेयर अर्थ का था, जिसका उपयोग ईवी मोटर्स और विंड टर्बाइनों में होता है।
2017 से 2024 के बीच दर्ज 4.2 अरब डॉलर के निर्यात का 85 प्रतिशत हिस्सा सेना के सत्ता संभालने के बाद हुआ। 2023 तक, म्यांमार चीन के हेवी रेयर अर्थ आयात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आपूर्ति कर रहा था — और यह मात्रा उस वर्ष चीन के अपने घरेलू माइनिंग कोटे से भी अधिक थी।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
अमेरिका के स्टिमसन सेंटर की सैटेलाइट तस्वीरों से मेकांग नदी बेसिन में 833 ऐसी खदानों की पहचान हुई है जो बिना किसी नियामक निगरानी के संचालित हो रही हैं। इनमें से 86 को रेयर अर्थ माइनिंग ऑपरेशन के रूप में पुष्टि की गई है, जहाँ नीले तिरपाल वाले लीचिंग पॉन्ड का उपयोग होता है। इनमें से आधे से अधिक ऑपरेशन 2024 और 2026 के बीच शुरू हुए।
मेकांग नदी में ज़हर और आम जनता पर असर
2026 की शुरुआत में थाईलैंड के चियांग माई और चियांग राय में की गई जाँच में पहली बार सभी 23 मॉनिटर की गई जगहों पर आर्सेनिक का स्तर सुरक्षा मानकों से अधिक पाया गया। यह प्रदूषण नदी की सहायक नदियों तक भी फैल चुका है।
रिपोर्टों के अनुसार, आर्सेनिक, लेड, कैडमियम और मैंगनीज जैसी भारी धातुएँ तलछट में बनी रहती हैं, मछलियों में पहुँच जाती हैं और मानव शरीर में संचित होती जाती हैं। ये चावल, लहसुन और सोयाबीन जैसी फसलों को भी दूषित करती हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शुरुआती स्तर पर ही शामिल हो जाती हैं।
हथियारबंद गुट और चीनी कंपनियों की भूमिका
रिपोर्टों के अनुसार, चीनी कंपनियाँ और खरीदार सीधे यूनाइटेड वा स्टेट आर्मी और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी जैसे हथियारबंद गुटों के साथ काम करते हैं। ये मिलिशिया माइनिंग से होने वाली कमाई का उपयोग गृहयुद्ध के लिए करती हैं, जबकि पर्यावरणीय क्षति की कोई जवाबदेही नहीं ली जाती। गौरतलब है कि चीन की फैक्टरियों को यह विषाक्त कच्चा माल सीमा के उस पार महज 50 मील की दूरी से मिलता रहता है।
भू-राजनीतिक हथियार और क्षेत्रीय लाचारी
रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता पर चीन के वैश्विक दबदबे ने बीजिंग को इसे एक भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने में सक्षम बनाया है — व्यापारिक विवादों में वॉशिंगटन, टोक्यो और ब्रसेल्स पर दबाव बनाने के लिए निर्यात प्रतिबंध का उपयोग किया जा सकता है। मेकांग रिवर कमीशन जैसे क्षेत्रीय निकायों के पास नदी के ऊपरी हिस्से में बदलाव के लिए दबाव बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस संकट को बढ़ावा देने वाले खनिज आयात पर प्रेस के सवालों का चीन के विदेश मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक हरित ऊर्जा परिवर्तन के लिए रेयर अर्थ की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, और दक्षिण-पूर्वी एशिया के करोड़ों लोग मेकांग के दूषित पानी और भोजन पर निर्भर हैं।