23 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल मदरसा सर्वे पर सियासत गरम: सपा सांसद राजीव राय और मौलाना रशीदी ने उठाए अहम सवाल

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पश्चिम बंगाल मदरसा सर्वे पर सियासत गरम: सपा सांसद राजीव राय और मौलाना रशीदी ने उठाए अहम सवाल

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार के मदरसा सर्वे के आदेश ने सियासी बहस छेड़ दी है। सपा सांसद राजीव राय ने इसे अवसरवाद बताया, तो मौलाना रशीदी ने सरकारी और जकात-वित्तपोषित मदरसों में फर्क करने की माँग की। 614 सरकारी मदरसों की रिपोर्ट 5 जुलाई तक माँगी गई है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 जून 2026 को मदरसा सर्वेक्षण की अधिसूचना जारी की; सभी जिलाधिकारियों को 5 जुलाई 2026 तक रिपोर्ट देनी होगी।
राज्य में कुल 614 सरकार-वित्तपोषित मदरसे हैं; हजारों अन्य मदरसों का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं।
सपा सांसद राजीव राय ने सर्वे को अवसरवादी राजनीति करार दिया और सुवेंदु अधिकारी पर TMC कार्यकाल में निष्क्रियता का आरोप लगाया।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि 2.5% जकात से चलने वाले मदरसों में सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं; केवल सरकारी फंड पाने वाले मदरसों पर सर्वे लागू हो।
सर्वे में मदरसों का स्थान, स्थापना वर्ष, पंजीकरण विवरण, छात्र-शिक्षक संख्या और दस्तावेज़ीकरण की जाँच शामिल है।

पश्चिम बंगाल सरकार के मदरसा सर्वेक्षण के आदेश पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय और अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस निर्देश पर अपनी-अपनी आपत्तियाँ और सुझाव दर्ज कराए हैं। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने 5 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए सभी जिलाधिकारियों को 5 जुलाई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

सपा सांसद राजीव राय की प्रतिक्रिया

सपा सांसद राजीव राय ने इस सर्वे के पीछे की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, 'जब वे (मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी) तृणमूल कांग्रेस (TMC) में थे, तब उन्होंने यह सर्वेक्षण क्यों नहीं कराया? ये लोग अवसरवादी हैं। इनके पास न तो कोई दूरदृष्टि है और न ही कोई विचारधारा। सत्ता की कुर्सी ही इनके लिए सब कुछ है।'

राय ने खान सर से जुड़े विवाद पर भी टिप्पणी की और कहा, 'खान सर, 'खान' हैं। चाहे जो भी हो, निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। यह छात्रों के भविष्य का भी सवाल है। इसे भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।' एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा, 'विपक्ष में रहते हुए राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी सिलेंडर लेकर सड़क पर बैठ जाते थे, अब सभी चुप हैं। यह दोहरे चरित्र वाली सरकार है।'

मौलाना रशीदी का रुख: सरकारी और जकात-वित्तपोषित मदरसों में फर्क जरूरी

अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सर्वे के दायरे पर स्पष्टता की माँग करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में कुल 614 मदरसे हैं जिन्हें सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। सरकार उन्हें अनुदान प्रदान करती है, शिक्षकों की व्यवस्था करती है, बुनियादी ढाँचे की देखरेख करती है और शिक्षा प्रणाली की निगरानी भी करती है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन सरकारी मदरसों के अतिरिक्त हजारों ऐसे मदरसे हैं जिनका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं है।

रशीदी ने दो-स्तरीय ढाँचे का सुझाव देते हुए कहा, 'सर्वे का आदेश सरकार उन्हीं मदरसों को दे सकती है, जिनको फंड दे रही है। अन्य मदरसों के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश सरकार जारी कर सकती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय के 2.5 फीसदी जकात पर चलने वाले मदरसों में सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं है और सरकार को ऐसे संस्थानों से दूर रहना चाहिए।

सर्वे का विवरण और सरकारी निर्देश

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने मदरसों के कामकाज, बुनियादी ढाँचे और कानूनी स्थिति की जाँच के लिए व्यापक सर्वेक्षण का आदेश दिया है। अधिसूचना के अनुसार, जिला प्रशासनों को मदरसों के स्थान, स्थापना का वर्ष, पंजीकरण का विवरण और वैध दस्तावेजों की उपलब्धता पर डेटा एकत्रित करने को कहा गया है। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या का ब्यौरा भी माँगा गया है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में मदरसा शिक्षा की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि सर्वे की वैधता और दायरे पर स्पष्टता न होने से अनावश्यक राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। 5 जुलाई 2026 की रिपोर्ट समय-सीमा के बाद सरकार की अगली कार्रवाई तय करेगी कि सर्वे के निष्कर्षों का उपयोग नीतिगत सुधार के लिए होगा या राजनीतिक बहस में।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक समय बताता है कि यह केवल पारदर्शिता की कवायद नहीं है। मौलाना रशीदी की यह माँग कि सरकारी और जकात-वित्तपोषित मदरसों में कानूनी फर्क किया जाए, वास्तव में एक संवैधानिक प्रश्न है जिसे सरकार ने अधिसूचना में अनुत्तरित छोड़ दिया है। राजीव राय का अवसरवाद वाला आरोप इस बात की ओर संकेत करता है कि विपक्ष इस मुद्दे को शासन नहीं, बल्कि ध्रुवीकरण की राजनीति के रूप में देख रहा है। असली परीक्षा यह है कि 5 जुलाई के बाद सरकार इन रिपोर्टों का उपयोग नीतिगत सुधार के लिए करती है या चुनावी बयानबाजी के लिए।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल मदरसा सर्वे क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी मदरसों के कामकाज, बुनियादी ढाँचे और कानूनी स्थिति की जाँच का आदेश दिया है। जिला प्रशासनों को मदरसों का स्थान, स्थापना वर्ष, पंजीकरण विवरण, छात्र-शिक्षक संख्या और दस्तावेज़ीकरण की जानकारी 5 जुलाई 2026 तक देनी है।
मौलाना साजिद रशीदी ने मदरसा सर्वे पर क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सर्वे का आदेश केवल सरकार-वित्तपोषित 614 मदरसों पर लागू होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय के 2.5 फीसदी जकात से चलने वाले मदरसों में सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं है और सरकार को ऐसे संस्थानों से दूर रहना चाहिए।
सपा सांसद राजीव राय ने सर्वे को लेकर क्या आपत्ति जताई?
राजीव राय ने सवाल उठाया कि जब सुवेंदु अधिकारी TMC में थे, तब यह सर्वे क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया और कहा कि इन नेताओं के पास न दूरदृष्टि है, न विचारधारा — सत्ता की कुर्सी ही इनका एकमात्र लक्ष्य है।
पश्चिम बंगाल में कितने मदरसे हैं और उनकी स्थिति क्या है?
मौलाना रशीदी के अनुसार राज्य में 614 सरकार-वित्तपोषित मदरसे हैं जिन्हें अनुदान, शिक्षक और बुनियादी ढाँचा सरकार उपलब्ध कराती है। इनके अलावा हजारों अन्य मदरसे भी हैं जो जकात से संचालित होते हैं और जिनका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं है।
मदरसा सर्वे की रिपोर्ट कब तक आएगी और आगे क्या होगा?
सभी जिलाधिकारियों को 5 जुलाई 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इसके बाद सरकार इन निष्कर्षों के आधार पर मदरसों की कानूनी स्थिति, पंजीकरण और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीतिगत निर्णय ले सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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