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राम मंदिर चंदा चोरी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग, मौलाना साजिद रशीदी ने सपा से माँगा मुस्लिम सीएम उम्मीदवार

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राम मंदिर चंदा चोरी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग, मौलाना साजिद रशीदी ने सपा से माँगा मुस्लिम सीएम उम्मीदवार

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक साथ तीन मोर्चे खोले — राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच, सपा से मुस्लिम सीएम उम्मीदवार की माँग, और मुहर्रम ताजियों की पुलिस नाप-जोख पर आपत्ति। यह बयान यूपी चुनावी राजनीति में नई बहस की शुरुआत कर सकता है।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की कथित वित्तीय अनियमितताओं में पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की माँग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि पीएमओ की देखरेख में बने ट्रस्ट की जांच सीएमओ स्तर पर कराने से निष्पक्षता संदिग्ध हो सकती है।
ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति के ड्राइवर द्वारा कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदने के मामले में आय स्रोतों की जांच की माँग की गई।
समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की अपील की गई।
मुहर्रम के ताजियों की पुलिस द्वारा बार-बार नाप-जोख को अनावश्यक और परंपरा में हस्तक्षेप बताया गया।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 26 जून 2026 को अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की माँग की है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) से अपील की कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे।

राम मंदिर ट्रस्ट जांच पर सवाल

मौलाना रशीदी ने कहा कि धार्मिक स्थल से जुड़ी किसी भी वित्तीय अनियमितता करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ी है, इसलिए जांच में पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की देखरेख में हुआ है, उसकी जांच मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के स्तर पर कराए जाने से निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो सकता है। उनके अनुसार, जांच एजेंसी को किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिए।

रशीदी ने यह भी कहा कि जांच के दौरान केवल छोटे पदों पर कार्यरत लोगों तक सीमित न रहकर प्रभावशाली और बड़े नामों की भूमिका की भी गहन पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति के ड्राइवर द्वारा कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदने के मामले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आय के स्रोतों और वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच स्वाभाविक रूप से होनी चाहिए।

सपा से मुस्लिम सीएम उम्मीदवार की अपील

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में मौलाना रशीदी ने कहा कि उन्होंने एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत धर्मनिरपेक्ष दलों से मुस्लिम समुदाय को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की माँग की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा होने के बावजूद अब तक किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला।

रशीदी ने समाजवादी पार्टी से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पार्टी वास्तव में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करना चाहती है, तो उसे किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। उन्होंने पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री का नाम सुझाया, जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं। उनके अनुसार, ऐसा होने पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में सपा को समर्थन दे सकते हैं।

मुहर्रम ताजियों की नाप-जोख पर आपत्ति

मौलाना रशीदी ने मुहर्रम के दौरान ताजियों की ऊंचाई और आकार की पुलिस द्वारा की जा रही नाप-जोख पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुहर्रम का जुलूस शोक और मातम की सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है और इसमें दिखाए जाने वाले पारंपरिक करतब वर्षों से धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, ऐसे में बार-बार माप लेने जैसी कार्रवाई की आवश्यकता समझ से परे है। रशीदी के अनुसार, कुछ अधिकारी अनावश्यक विवाद उत्पन्न कर मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करते हैं, जो सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।

आगे क्या होगा

मौलाना रशीदी के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक साथ कई मुद्दों को हवा दी है — राम मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही, मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और धार्मिक परंपराओं पर प्रशासनिक हस्तक्षेप। यह देखना होगा कि समाजवादी पार्टी इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और क्या राम मंदिर ट्रस्ट मामले में जांच का दायरा बढ़ाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा इसके प्रभाव में है। राम मंदिर ट्रस्ट जांच की माँग उचित है, किंतु यह माँग उस वक्त उठाई जा रही है जब यूपी चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है — इसलिए इसे महज धार्मिक चिंता के रूप में देखना एकांगी होगा। सपा से मुस्लिम सीएम उम्मीदवार की माँग राजनीतिक रूप से साहसिक है, लेकिन क्या सपा नेतृत्व इस पर कोई ठोस कदम उठाएगा, यह संदिग्ध है — पार्टी का इतिहास बताता है कि वह इस तरह की माँगों को चुनावी समीकरण के चश्मे से देखती है, न प्रतिनिधित्व के सिद्धांत से।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने राम मंदिर ट्रस्ट जांच को लेकर क्या माँग की है?
मौलाना साजिद रशीदी ने माँग की है कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच पूरी तरह स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि पीएमओ की देखरेख में बने ट्रस्ट की जांच सीएमओ स्तर पर कराने से निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
ट्रस्ट के ड्राइवर द्वारा संपत्ति खरीदने का मामला क्या है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति के ड्राइवर ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी है। उनके अनुसार, सामान्य वेतन पाने वाले व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी संपत्ति खरीदे जाने पर आय के स्रोतों और वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
सपा से मुस्लिम मुख्यमंत्री उम्मीदवार की माँग क्यों की जा रही है?
मौलाना रशीदी ने एक अभियान शुरू किया है जिसके तहत धर्मनिरपेक्ष दलों से मुस्लिम समुदाय को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने की माँग की जा रही है। उनका तर्क है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा होने के बावजूद अब तक कोई मुस्लिम नेता मुख्यमंत्री नहीं बन सका।
मुहर्रम ताजियों की नाप-जोख पर मौलाना रशीदी की आपत्ति क्या है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि पुलिस द्वारा मुहर्रम के ताजियों की बार-बार ऊंचाई और आकार नापना अनावश्यक है, क्योंकि प्रशासन पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। उनके अनुसार, यह सदियों पुरानी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में अनावश्यक हस्तक्षेप है।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है और मौलाना रशीदी कौन हैं?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन देश भर की मस्जिदों के इमामों का एक प्रमुख संगठन है। मौलाना साजिद रशीदी इस संगठन के अध्यक्ष हैं और समय-समय पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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