वक्फ बोर्ड घोटाले की जांच हो: मौलाना रजवी के पत्र पर अयोध्या के संतों का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं और बड़े घोटालों के आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वक्फ संपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। 14 जुलाई को इस मामले पर अयोध्या के प्रमुख संतों ने भी खुलकर समर्थन जताया और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया।
संतों की प्रतिक्रिया और समर्थन
अयोध्या के विष्णु दास महाराज ने मौलाना रजवी के पत्र का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं, जिनकी जांच अनिवार्य है।
विष्णु दास महाराज ने कहा कि मौलाना रजवी ने जिस साहस के साथ अपने समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाए हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि जांच होने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
विष्णु दास महाराज ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के साथ-साथ मदरसों, मस्जिदों और दरगाहों के प्रबंधन में भी पूरी पारदर्शिता जरूरी है। उनके अनुसार, किसी भी धार्मिक संस्था में यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल केवल चुनिंदा धार्मिक मुद्दों को राजनीति के लिए इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि हर मामले की समान रूप से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सीताराम दास महाराज का समर्थन
अयोध्या के सीताराम दास महाराज ने भी मौलाना रजवी के पत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में कथित घोटालों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियों पर अंकुश लगे।
सीताराम दास महाराज ने कहा कि धार्मिक संपत्तियाँ किसी भी समुदाय की आस्था और विश्वास से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनके प्रबंधन में पारदर्शिता अनिवार्य है।
मदरसा अनुदान पर उत्तराखंड सरकार के फैसले का स्वागत
सीताराम दास महाराज ने उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है और बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस तथा आईपीएस जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और किसी भी शिक्षण संस्थान का इस्तेमाल अनियमित गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस चल रही है।
आगे क्या होगा
मौलाना रजवी के पत्र और संतों के समर्थन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं। यदि उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया जाता है, तो यह वक्फ बोर्ड प्रशासन में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।