पश्चिम बंगाल मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य: मुस्लिम संगठनों में बहिष्कार से लेकर समर्थन तक अलग-अलग सुर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य के मदरसों और सभी स्कूलों में 'वंदे मातरम' गायन को अनिवार्य किए जाने के निर्णय पर देशभर के प्रमुख मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने 21 मई को परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ दीं — कुछ ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए बहिष्कार की अपील की, तो कुछ ने देशभक्ति की भावना को सर्वोपरि रखते हुए विवाद से परहेज़ करने की सलाह दी। यह मुद्दा ऐसे समय में उभरा है जब धार्मिक शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों की अनिवार्यता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
विरोध और बहिष्कार की अपील
दारुल उलूम फिरंगी महल के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निज़ामी ने पश्चिम बंगाल सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा, 'हम पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं, जिसके तहत मदरसों और सभी स्कूलों में 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। हम मुसलमानों से अपील करते हैं कि जहाँ भी ऐसी स्थिति पैदा हो, वे अपने बच्चों को ऐसे संस्थानों में दाखिला न दिलाएँ।'
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि असम की तर्ज पर बंगाल के मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'जो कोई भी इसे पढ़ना चाहता है, मैं उसे रोक नहीं रहा हूँ, लेकिन जो लोग इसे नहीं पढ़ना चाहते, उन पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से राज्य में एक के बाद एक विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि उनका दल 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है और उसे आदर की दृष्टि से देखता है, किंतु संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार देता है। उन्होंने तर्क दिया कि 'वंदे मातरम' की कुछ पंक्तियाँ इस्लामी मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं।
देशभक्ति के भाव पर ज़ोर, राजनीति से परहेज़
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' हो या 'मादरे वतन जिंदाबाद', दोनों का भाव देशभक्ति और भारत की जय-जयकार है — भावना एक ही है, भाषा अलग है। उनके अनुसार यह राष्ट्र का गीत है और इस पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
डॉ. इलियासी ने इसी संदर्भ में महंत योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज संबंधी बयान को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि नमाज की जगह मस्जिद है, सड़क नहीं, और यदि प्रशासन अनुमति नहीं देता तो सड़क पर नमाज नहीं हो सकती। उन्होंने मुस्लिम समाज की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग का भी स्वागत किया और मुसलमानों से अपील की कि वे प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करें।
भाजपा का रुख
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता गौरव वल्लभ ने पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, 'चाहे स्कूल हों या मदरसे, 'वंदे मातरम' हमारा राष्ट्रीय गीत है और यह देशभक्ति की भावना जगाता है।' गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में मदरसा शिक्षा को लेकर नीतिगत बदलावों की प्रक्रिया चल रही है।
आगे क्या
मौलाना निज़ामी की बहिष्कार अपील और वारिस पठान के संवैधानिक तर्क को देखते हुए यह मामला न्यायिक समीक्षा तक पहुँच सकता है। विभिन्न मुस्लिम संगठनों के अलग-अलग रुख यह भी दर्शाते हैं कि इस मुद्दे पर समुदाय के भीतर कोई एकमत नहीं है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अब तक इन प्रतिक्रियाओं पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।