मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य: विहिप के विनोद बंसल बोले — बच्चों में जागेगी राष्ट्रीयता की भावना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य करने का फैसला किया है, जिसे विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 21 मई को स्वागतयोग्य बताया। बंसल ने कहा कि इस निर्णय से बंगाल के बच्चों में राष्ट्रीयता का भाव जागृत होगा और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति लगाव बढ़ेगा।
मुख्य घटनाक्रम
बंसल ने कहा कि यह निर्णय चरणबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा है — पहले सरकारी स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य किया गया था, और अब मदरसों में भी इसे लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'अब मदरसों में भी सभी बच्चे अपने दिन की शुरुआत वंदे मातरम गाकर करेंगे।' उन्होंने इन कदमों के लिए सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ
बंसल ने इस फैसले को ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, 'वंदे मातरम' का जन्म बंगाल की धरती पर हुआ था, लेकिन कथित तौर पर पिछले 75 वर्षों से यह गीत उसी भूमि पर 'बंधन में' था। उन्होंने कहा कि बच्चे उस राष्ट्रीय ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत करेंगे जिसका सृजन उनके पूर्वजों ने किया था। गौरतलब है कि वंदे मातरम को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने बंगाल में ही रचा था और यह भारत का राष्ट्रीय गीत है।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विरोध — बंसल की तीखी प्रतिक्रिया
बंसल ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के कुछ मुसलमानों के विरोध पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बकरीद के नजदीक आते ही कुछ तत्व हिंदू समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने लगते हैं। उन्होंने कहा, 'हम इन लोगों को बहुत ही साफ और सीधे शब्दों में चेतावनी दे रहे हैं — हिंदू समुदाय की भावनाओं, इस देश की संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव तथा गौ माता के प्रति सम्मान को चुनौती देने की हिम्मत न करें। इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।'
आगे क्या
पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम की अनिवार्यता का यह फैसला राज्य की शिक्षा नीति में एक उल्लेखनीय बदलाव है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इसे किस प्रकार लागू करती है और इस पर विभिन्न समुदायों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।