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वंदे मातरम पर मलिक मोतसिम खान का बयान: 'स्वेच्छा से गाएं, जबरदस्ती संविधान के खिलाफ'

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वंदे मातरम पर मलिक मोतसिम खान का बयान: 'स्वेच्छा से गाएं, जबरदस्ती संविधान के खिलाफ'

सारांश

पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने की बहस के बीच जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने दो टूक कहा — देशभक्ति और किसी गीत को थोपना एक नहीं है। साथ ही कुर्बानी विवाद पर उन्होंने मुसलमानों से शांति और व्यावहारिकता की अपील की।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि वंदे मातरम गाना स्वैच्छिक होना चाहिए, किसी पर थोपा नहीं जा सकता।
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी नागरिक को कोई गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले कुर्बानी नियमों पर चर्चा के बीच उन्होंने मुसलमानों से गाय की कुर्बानी पर जिद न करने की अपील की।
उन्होंने दावा किया कि देश के बड़े बूचड़खानों से बीफ निर्यात होता है और कई कारोबार गैर-मुस्लिमों के हाथ में हैं — सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाना उचित नहीं।
बिजनौर नाबालिग धर्मांतरण विवाद पर उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को धर्म बदलने का मौलिक अधिकार देता है।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने 21 मई को स्पष्ट किया कि वंदे मातरम गाना किसी नागरिक पर थोपा नहीं जा सकता — देशभक्ति और किसी विशेष गीत को अनिवार्य करना दो अलग-अलग बातें हैं। यह बयान पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य किए जाने की चर्चा के बीच आया है।

वंदे मातरम विवाद पर मुख्य बयान

मलिक मोतसिम खान ने कहा, 'जिसको गाना है वह शौक से गाए, जिसको नहीं गाना है वह न गाए।' उनके अनुसार भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद और विचार रखने का अधिकार देता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी को राष्ट्रगान या किसी गीत के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि यदि मदरसों को कोई निर्देश दिया गया है तो वह अधिकतम एक सलाह हो सकती है, कोई बाध्यकारी आदेश नहीं। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

कुर्बानी विवाद और पश्चिम बंगाल

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में पशु कुर्बानी को लेकर कथित तौर पर सख्त नियमों की चर्चा के संदर्भ में मलिक मोतसिम खान ने कहा कि इस्लाम में गाय के अलावा भैंस, बकरा और भेड़ सहित कई जानवर हलाल माने गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुसलमानों से अपील की कि वे गाय की कुर्बानी पर जिद न करें और शांति व समझदारी से काम लें।

उन्होंने यह भी कहा, 'हमारे सामने बहुत सारे हलाल जानवर हैं, उनकी कुर्बानी भी दी जा सकती है।' उनके अनुसार यदि सरकार गाय की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगाती है तो मुसलमानों के पास पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं।

बूचड़खानों और आर्थिक पहलू पर सवाल

मलिक मोतसिम खान ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि देश में बड़े-बड़े स्लॉटर हाउस संचालित हो रहे हैं जहाँ से बीफ विदेशों में निर्यात किया जाता है, और कथित तौर पर इनमें से कई कारोबार गैर-मुस्लिमों के हाथ में हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गाय संरक्षण चाहती है तो पहले उन बड़े बूचड़खानों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पशुपालन और मवेशियों का कारोबार ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, अचानक सख्ती से गाँवों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है — यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक मुद्दा भी है।

बिजनौर नाबालिग धर्मांतरण विवाद

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के एक नाबालिग लड़के के कश्मीर जाकर इस्लाम अपनाने के विवाद पर मलिक मोतसिम खान ने कहा कि भारत का संविधान हर व्यक्ति को अपना धर्म मानने और बदलने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा, 'जिसे जो सही लगे, वह उसे अपनाए। यह उसका व्यक्तिगत फैसला है।'

लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर जोर

मलिक मोतसिम खान ने कहा कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती यही है कि हर नागरिक को सोचने, बोलने और अपने हिसाब से जीवन जीने की स्वतंत्रता मिले। उनके मुताबिक, सरकार का काम नागरिकों पर अपनी पसंद थोपना नहीं, बल्कि सभी के अधिकारों की रक्षा करना है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक संस्थाओं में उनके अनिवार्य समावेश को लेकर बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बूचड़खानों पर उनका दावा बिना स्वतंत्र सत्यापन के अधूरा है। असली सवाल यह है कि क्या नीति निर्माता धार्मिक प्रतीकों को सार्वजनिक संस्थाओं में अनिवार्य करने से पहले संवैधानिक सीमाओं का पालन सुनिश्चित करते हैं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम को अनिवार्य करने पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
सर्वोच्च न्यायालय कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी नागरिक को राष्ट्रगान या किसी अन्य गीत के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह व्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का हिस्सा है।
पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य किए जाने की चर्चा चल रही है, जिसने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। मलिक मोतसिम खान के अनुसार, यदि कोई निर्देश दिया गया है तो वह केवल एक सलाह हो सकती है, बाध्यकारी आदेश नहीं।
बकरीद पर कुर्बानी को लेकर मलिक मोतसिम खान ने क्या कहा?
उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुसलमानों से अपील की कि गाय की कुर्बानी पर जिद न करें, क्योंकि इस्लाम में भैंस, बकरा और भेड़ सहित कई हलाल जानवर हैं। उन्होंने शांति और व्यावहारिकता से काम लेने की सलाह दी।
बिजनौर नाबालिग धर्मांतरण विवाद पर उनका क्या कहना है?
मलिक मोतसिम खान ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपना धर्म मानने और बदलने की स्वतंत्रता देता है। यदि कोई स्वेच्छा से कोई धर्म अपनाता है तो यह उसका मौलिक अधिकार है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने बूचड़खानों पर क्या दावा किया?
मलिक मोतसिम खान ने दावा किया कि देश में बड़े स्लॉटर हाउस चल रहे हैं जहाँ से बीफ विदेश निर्यात होता है और कथित तौर पर कई कारोबार गैर-मुस्लिमों के हाथ में हैं। उन्होंने कहा कि गाय संरक्षण की वास्तविक इच्छा हो तो पहले इन बड़े प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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