अमित शाह ने अहमदाबाद में 'मिशन फाइव मिलियन ट्रीज' लॉन्च किया, बोले — 7 साल में 7 करोड़ पौधे लगाए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 12 जुलाई 2026 को अहमदाबाद में 'मिशन फाइव मिलियन ट्रीज' के तहत एक वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया और नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने पिछले 7 वर्षों में 7 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है।
अभियान का विवरण और लक्ष्य
शाह ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत लगाए जाने वाले सभी पौधे देसी प्रजातियों के हैं और भारतीय जलवायु के अनुकूल हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि चुनी गई प्रजातियाँ 100 वर्ष से अधिक जीवित रह सकती हैं। उनके शब्दों में, "अगर आप आज इन्हें लगाते हैं, तो आपके पोते-पोतियाँ भी इनकी छाँव में बैठेंगे। इनमें से किसी भी पेड़ की उम्र 100 साल से कम नहीं है। हमने जान-बूझकर ऐसे पेड़ चुने हैं जो एक सदी से अधिक समय तक जीवित रहते हैं।"
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि कार्यक्रम से दो दिन पूर्व दिल्ली रिज क्षेत्र में 43 लाख पौधे लगाए गए, जो इस राष्ट्रव्यापी हरित अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
जैव विविधता पर जोर
शाह ने बरगद और पीपल जैसी देसी वृक्ष प्रजातियों के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "बरगद या पीपल का पेड़ लगाएं, और वह अकेला पेड़ हज़ारों पक्षियों को आश्रय, भोजन और पानी देता है।" उन्होंने यह भी बताया कि ये प्रजातियाँ कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण के साथ-साथ जैव विविधता संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा, अहमदाबाद में स्थापित किए जा रहे ऑक्सीजन पार्क तितलियों और अन्य वन्यजीवों के लिए आवास के रूप में काम करेंगे।
जन-भागीदारी और 'एक पेड़ मां के नाम'
शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के बाद यह अभियान अहमदाबाद में एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 1,37,000 से अधिक नागरिकों ने पाँच-पाँच पौधे लगाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा, "वैज्ञानिक रूप से नियोजित वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रतिभागियों को सीधे पौधे पहुँचाए गए।" अहमदाबाद के अन्य दो संसदीय क्षेत्रों के 28,544 निवासी भी इस अभियान से जुड़े हैं।
निजी संगठनों की भागीदारी
गृह मंत्री ने उन निजी संगठनों का विशेष आभार व्यक्त किया जिन्होंने तीन वर्षों तक बड़ी संख्या में पेड़ों को गोद लेकर उनकी देखभाल, सिंचाई और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी उठाई। यह सरकारी-निजी साझेदारी का मॉडल इस अभियान को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करता है।
आगे की राह
यह अभियान केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने की कोशिश करती है। गौरतलब है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के तहत 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा है, और इस तरह के जन-अभियान उस दिशा में ठोस कदम माने जा रहे हैं।