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सीएपीएफ ने 8 साल में 6.40 करोड़ पेड़ लगाए, अमित शाह ने लंकामुरा बॉर्डर पर किया पौधरोपण

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सीएपीएफ ने 8 साल में 6.40 करोड़ पेड़ लगाए, अमित शाह ने लंकामुरा बॉर्डर पर किया पौधरोपण

सारांश

विश्व पर्यावरण दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा की भारत-बांग्लादेश सीमा से बड़ा ऐलान किया — सीएपीएफ ने 2019 से 6.40 करोड़ पेड़ लगाए हैं और अगले साल 2 करोड़ और लगाने का लक्ष्य है। अर्धसैनिक बलों की यह हरित भूमिका रक्षा से परे पर्यावरण की अग्रिम पंक्ति बनती जा रही है।

मुख्य बातें

सीएपीएफ ने 2019 से अब तक देशभर में 6.40 करोड़ से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगाए हैं।
इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य; पुराने नष्ट हुए पौधों के स्थान पर पुनः रोपण पर विशेष ध्यान।
सीएपीएफ अगले वर्ष 2 करोड़ पेड़ लगाने की योजना बना रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट, त्रिपुरा पर पौधरोपण किया।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
शाह ने पेरिस जलवायु समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और ओज़ोन क्षरण व तापमान वृद्धि पर गंभीर चेतावनी दी।

गृह मंत्री अमित शाह ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर घोषणा की कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) ने 2019 से अब तक देशभर में 6.40 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं — जो वनावरण विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अर्धसैनिक बलों का अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक प्रयास है। शाह ने यह बात पश्चिम त्रिपुरा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए कही।

मुख्य घोषणाएँ

शाह ने बताया कि इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार संख्या अपेक्षाकृत कम इसलिए रखी गई है क्योंकि पहले लगाए गए उन पौधों के स्थान पर पुनः रोपण पर भी ध्यान दिया जाएगा जो जीवित नहीं रह सके। उन्होंने कहा, '2019 से सीएपीएफ ने मिलकर पूरे देश में विभिन्न प्रजातियों के 6.40 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं।'

इससे आगे, शाह ने बताया कि सीएपीएफ अगले वर्ष 2 करोड़ पेड़ लगाने की योजना बना रही है। यह राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जंगल के दायरे को विस्तृत करना और देश की जैव-विविधता को संरक्षित करना है।

जलवायु संकट पर चेतावनी

शाह ने तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और विकास कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर कृषि, मानव जीवन और ओज़ोन परत पर पड़ रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी, 'अगर हमने आज ही कदम नहीं उठाए और नुकसान की भरपाई के लिए काम नहीं किया, तो धरती का बढ़ता तापमान, जलवायु परिवर्तन और ओजोन परत में बड़े छेद इस ग्रह को रहने लायक नहीं छोड़ेंगे।' उन्होंने कहा कि जंगल के दायरे को बढ़ाना, मौजूदा वनों की रक्षा करना और पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाना ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।

पेरिस समझौते पर भारत की प्रतिबद्धता

शाह ने इस अवसर पर भारत की जलवायु नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पेरिस जलवायु समझौते का सक्रिय रूप से पालन कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्बन उत्सर्जन कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा खपत घटाने के लिए समन्वित उपाय शुरू किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पेरिस सम्मेलन में भारत के जलवायु मॉडल को एक आदर्श ढाँचे के रूप में मान्यता दी गई थी।

लंकामुरा में पौधरोपण कार्यक्रम

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शाह ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। उन्होंने सभी से आने वाली पीढ़ियों के लाभ के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने का आग्रह किया और कहा कि लोगों को पर्यावरण की देखभाल उसी समर्पण से करनी चाहिए जैसे वे अपने परिजनों की करते हैं।

आगे क्या

सीएपीएफ का अगले वर्ष 2 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि अर्धसैनिक बलों की पर्यावरणीय भूमिका को और व्यापक बनाया जाएगा। यह पहल न केवल वनावरण बढ़ाने, बल्कि सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में हरित आवरण सुनिश्चित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल 'सर्वाइवल रेट' का है — शाह ने खुद स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में पौधे जीवित नहीं रह पाए, इसीलिए इस बार पुनः रोपण को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पारदर्शिता सराहनीय है, लेकिन यह भी रेखांकित करती है कि वृक्षारोपण की संख्या और वास्तविक वनावरण वृद्धि के बीच अक्सर बड़ा अंतर होता है। भारत के वन सर्वेक्षण रिपोर्टों में वनावरण में मामूली वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन घने वनों की हिस्सेदारी चिंताजनक रूप से स्थिर है। बिना पारदर्शी जियो-टैग्ड निगरानी और स्वतंत्र सत्यापन के, ये संख्याएँ नीतिगत उपलब्धि से अधिक प्रतीकात्मक बनी रह सकती हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएपीएफ ने कितने पेड़ लगाए हैं और कब से?
सीएपीएफ ने 2019 से अब तक देशभर में विभिन्न प्रजातियों के 6.40 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं। यह जानकारी गृह मंत्री अमित शाह ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर त्रिपुरा में दी।
इस साल सीएपीएफ कितने पेड़ लगाएगी?
इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। संख्या अपेक्षाकृत कम इसलिए है क्योंकि पहले लगाए गए जो पौधे जीवित नहीं रह सके, उनके स्थान पर पुनः रोपण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
अगले साल सीएपीएफ का वृक्षारोपण लक्ष्य क्या है?
शाह के अनुसार सीएपीएफ अगले वर्ष 2 करोड़ पेड़ लगाने की योजना बना रही है। यह राष्ट्रव्यापी वनावरण विस्तार अभियान का हिस्सा है।
लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर कार्यक्रम क्यों आयोजित हुआ?
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम त्रिपुरा स्थित भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर बीएसएफ जवानों को संबोधित किया और पौधरोपण किया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
जलवायु परिवर्तन पर अमित शाह ने क्या चेतावनी दी?
शाह ने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बढ़ता तापमान, जलवायु परिवर्तन और ओज़ोन परत में छेद पृथ्वी को रहने योग्य नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने भारत की पेरिस जलवायु समझौते के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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