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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: इस्कॉन प्रवक्ता राधा रमण दास बोले — ट्रस्टियों की निगरानी और तकनीक से रुकेगा दुरुपयोग

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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: इस्कॉन प्रवक्ता राधा रमण दास बोले — ट्रस्टियों की निगरानी और तकनीक से रुकेगा दुरुपयोग

सारांश

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग पर SIT जांच शुरू होते ही इस्कॉन के प्रवक्ता राधा रमण दास ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की और साफ कहा — ट्रस्टियों की सक्रिय निगरानी और तकनीक के बिना भक्तों की आस्था की रक्षा संभव नहीं।

मुख्य बातें

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित घोटाले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है।
इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट एवं प्रवक्ता राधा रमण दास ने त्वरित जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की।
राधा रमण दास ने कहा कि ट्रस्टियों की निगरानी और आधुनिक तकनीक से ही चढ़ावे के दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
उन्होंने स्वीकार किया कि यह चुनौती इस्कॉन जैसी संस्थाओं के लिए भी बड़ी है।
राधा रमण दास ने कहा कि श्रीराम मंदिर करीब 500 वर्षों बाद बना है और करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है — इसलिए जांच जल्द पूरी होना जरूरी है।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित घोटाले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किए जाने के बाद, इस्कॉन (ISKCON) के वाइस प्रेसिडेंट एवं प्रवक्ता राधा रमण दास ने 15 जून 2026 को इस मामले पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जांच के त्वरित आदेश के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्टियों की सक्रिय निगरानी और आधुनिक तकनीक के उपयोग से ही भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

ट्रस्टियों की जिम्मेदारी पर जोर

राधा रमण दास ने कहा कि पूरे भारत के मंदिरों में श्रद्धालु गहरी आस्था, प्रेम और सम्मान के साथ आते हैं और दान देते हैं। उनकी यह अपेक्षा होती है कि उनका दान मंदिर प्रबंधन, सनातन धर्म और भगवान की सेवा में लगाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'मंदिर में चढ़ावे का किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो — यह सुनिश्चित करना ट्रस्टियों का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है।'

उन्होंने स्वीकार किया कि यह चुनौती इस्कॉन जैसी संस्थाओं के लिए भी बड़ी है। उनके अनुसार, 'कलियुग में ऐसे कर्मचारी भी आ जाते हैं जिनमें किसी प्रकार की आस्था नहीं होती, और यह पहचानना कठिन हो जाता है कि कौन सच्चा भक्त है।'

तकनीक के उपयोग की अपील

राधा रमण दास ने जोर देकर कहा कि तकनीक का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए ताकि किसी भी भक्त का एक रुपया भी मंदिर से बाहर न जाए। उन्होंने कहा कि इंसान कड़ी मेहनत से पैसे कमाता है और भक्त दूर-दूर से, यहाँ तक कि विदेशों से भी आकर आस्था के साथ दान देते हैं। ऐसे में यदि कोई उस धन का उपयोग निजी सुख-सुविधा के लिए करता है, तो यह पूर्णतः अनुचित है।

योगी सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना

राधा रमण दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सूचना मिलते ही जांच शुरू करवाने को 'साधुवाद' योग्य कदम बताया। उन्होंने कहा, 'मैं यही आशा करूंगा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे का एक-एक रुपया किसी के घर में न जाए — उसका उपयोग केवल मंदिर के कार्य और सनातन धर्म के लिए हो।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें मामले के विस्तृत तथ्यों की व्यक्तिगत जानकारी नहीं है।

धार्मिक और सामाजिक संदर्भ

राधा रमण दास ने यह भी कहा कि अयोध्या का श्रीराम मंदिर करीब 500 वर्षों के बाद निर्मित हुआ है और यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने चेताया कि कुछ लोग सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश में लगे रहते हैं और इस विवाद को भी उसी दिशा में भुनाया जा सकता है। इसीलिए जांच का जल्द से जल्द पूरा होना आवश्यक है। धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर की संपत्ति का दुरुपयोग करने वालों को गंभीर आध्यात्मिक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

आगे की राह

एसआईटी की जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राधा रमण दास ने उम्मीद जताई कि यह जांच पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होगी, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। मंदिर प्रशासन में तकनीकी निगरानी तंत्र लागू करने की उनकी अपील को धार्मिक संगठनों के बीच व्यापक समर्थन मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि देश के हजारों मंदिरों में ट्रस्टी निगरानी और तकनीकी पारदर्शिता का ढाँचा अभी तक क्यों नहीं बना। अयोध्या जैसे हाई-प्रोफाइल मंदिर में यदि कथित घोटाला हो सकता है, तो छोटे मंदिरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। SIT जांच का स्वागत है, लेकिन यह एकबारगी कदम नहीं होना चाहिए — मंदिर वित्त में संस्थागत जवाबदेही के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामक ढाँचे की जरूरत है, जो अभी तक नदारद है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला क्या है?
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है, जिसकी जांच के लिए SIT गठित की गई है। मामले के विस्तृत तथ्य अभी जांच के दायरे में हैं।
इस्कॉन के राधा रमण दास ने इस मामले पर क्या कहा?
इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट राधा रमण दास ने कहा कि ट्रस्टियों को सक्रिय निगरानी रखनी चाहिए और तकनीक का पूरा उपयोग करना चाहिए ताकि भक्तों का एक रुपया भी मंदिर से बाहर न जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्वरित जांच बैठाने की सराहना की।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच कब शुरू हुई?
15 जून 2026 तक SIT का गठन हो चुका था और जांच प्रक्रिया शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूचना मिलते ही जांच के आदेश दिए।
मंदिरों में चढ़ावे के दुरुपयोग को कैसे रोका जा सकता है?
राधा रमण दास के अनुसार, ट्रस्टियों की सक्रिय निगरानी और आधुनिक तकनीक के उपयोग से चढ़ावे के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह चुनौती इस्कॉन जैसी बड़ी संस्थाओं के लिए भी कम नहीं है।
इस विवाद का सनातन धर्म की छवि पर क्या असर पड़ सकता है?
राधा रमण दास ने चेताया कि कुछ तत्व सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश में लगे रहते हैं और इस विवाद का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। इसीलिए उन्होंने जांच जल्द पूरी होने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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