तथागत रॉय बोले — 'यूसीसी उतना ही अनिवार्य जितना संविधान', पश्चिम बंगाल UCC ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने 12 जुलाई 2026 को कोलकाता में कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) उतनी ही अनिवार्य है जितना स्वयं संविधान। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य की UCC ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल किया है।
संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला
तथागत रॉय ने कहा, 'जब हमारा संविधान तैयार और लागू किया गया था, तो अनुच्छेद 44 में ही यह कहा गया था कि राज्य समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगा। अब यह सवाल कैसे उठ सकता है कि UCC कितना जरूरी है? यह उतना ही जरूरी है जितना कि खुद संविधान।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद UCC को लागू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला
पूर्व राज्यपाल ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने UCC को लेकर जानबूझकर भ्रम और गलतफहमियाँ फैलाईं। उन्होंने कहा, 'सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की कोई विचारधारा या सिद्धांत नहीं थे। उनका एकमात्र मकसद किसी भी तरह सत्ता में बने रहना और इस दौरान लोगों की जेबों व सरकारी खजाने से जितना हो सके पैसा निकालकर अपनी जेबें भरना था।' गौरतलब है कि TMC नेता सब्यसाची दत्ता और पार्थ चटर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, और वर्तमान सरकार ने इन मामलों की जाँच तेज की है।
UCC कमेटी में चयन पर प्रतिक्रिया
जब तथागत रॉय से UCC ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल किए जाने पर प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने कहा, 'मैंने किसी से भी मुझे कमेटी में शामिल करने के लिए नहीं कहा था। मुख्यमंत्री को यह सही लगा और उन्होंने मेरा नाम शामिल किया — और मैं इसके लिए आभारी हूँ।' यह कमेटी पश्चिम बंगाल में UCC के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए गठित की गई है।
सुवेंदु सरकार के दो महीने का आकलन
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए तथागत रॉय ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल दो महीनों में करना उचित नहीं है और कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाना चाहिए। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन दो महीनों में सरकार ने जो काम किया है, वह सराहनीय है — विशेष रूप से 'कानून के शासन' को लागू करने के मामले में।
बरूईपुर घटना और कानून के शासन की मिसाल
बरूईपुर की एक हालिया घटना का उल्लेख करते हुए रॉय ने कहा कि उस मामले में अधिकांश आरोपी हिंदू हैं, फिर भी सभी को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने इसे 'कानून के शासन' का व्यावहारिक उदाहरण बताया और कहा कि वर्तमान सरकार अपराधियों के बीच धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती। आगे उन्होंने संकेत दिया कि TMC के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों में उचित कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।