28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बंगाल में यूसीसी विधेयक: भाजपा ने साफ किया — अनुसूचित जनजातियाँ इसके दायरे से बाहर रहेंगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बंगाल में यूसीसी विधेयक: भाजपा ने साफ किया — अनुसूचित जनजातियाँ इसके दायरे से बाहर रहेंगी

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून को यूसीसी विधेयक पेश होने से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने साफ किया कि अनुसूचित जनजातियाँ इसके दायरे से बाहर रहेंगी। संविधान के अनुच्छेद 342 और 366 का हवाला देते हुए उन्होंने बहुविवाह खत्म करने और समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने को इस विधेयक का मूल लक्ष्य बताया।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने 27 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजातियाँ यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगी।
यूसीसी विधेयक 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया जाना है।
संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366(25) के तहत ST समुदायों को विशेष संरक्षण बरकरार रहेगा।
भट्टाचार्य ने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह एकसमान व्यवस्था लागू होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में बच्चों की संख्या तय करना यूसीसी का हिस्सा नहीं है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक पेश किए जाने से ठीक पहले, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने 27 जून को स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस प्रस्तावित कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब विधेयक को लेकर राज्य में व्यापक बहस और आशंकाएँ उठ रही थीं।

संवैधानिक आधार क्या है

भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) और अनुच्छेद 342 के तहत परिभाषित अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर यह संहिता लागू नहीं होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संविधान द्वारा आदिवासी समुदायों को दिए गए विशेष संरक्षण को पूरी तरह बरकरार रखा जाएगा।

भाजपा का रुख और चुनावी वादा

भट्टाचार्य ने कहा कि यूसीसी को लेकर BJP का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि यह हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के घोषणापत्र और चुनावी वादों का भी हिस्सा था। उनके अनुसार, इसमें कुछ भी छिपाने या भ्रम पैदा करने जैसा नहीं है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड पहला राज्य बन चुका है जिसने यूसीसी लागू किया है, और अब पश्चिम बंगाल में भाजपा इसी राह पर चलने की कोशिश कर रही है — हालाँकि राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सत्ता में है और इस विधेयक के पारित होने की राह आसान नहीं है।

यूसीसी के प्रावधान और उद्देश्य

भट्टाचार्य ने बताया कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म-आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक व्यवस्था लागू करना इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है। उनका कहना है कि इससे देश की एकता, न्याय और संवैधानिक समानता की भावना मज़बूत होगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी लागू होने पर बहुविवाह जैसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा, जो कुछ व्यक्तिगत कानूनों के तहत अब भी अनुमत है। हालाँकि उन्होंने यह भी साफ किया कि परिवार में बच्चों की संख्या तय करना यूसीसी का उद्देश्य नहीं है और न ही इसमें ऐसा कोई प्रावधान है।

आम जनता और जनजातीय समुदायों पर असर

यदि यह विधेयक पारित होता है, तो अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर शेष सभी नागरिकों पर समान नागरिक प्रावधान लागू होंगे। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर असर पड़ सकता है, जबकि भाजपा इसे संवैधानिक समानता का कदम बताती है।

आगे क्या होगा

विधेयक 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया जाना है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के रुख और विधानसभा में बहुमत के समीकरण को देखते हुए इसके पारित होने की संभावना अभी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विधेयक भाजपा के लिए एक वैचारिक संदेश देने का माध्यम भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यावहारिक कानून बनाने का कम। उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद से भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित दोनों राज्यों में इस मुद्दे की राजनीतिक गूँज बढ़ी है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक क्या है?
यह समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक है जिसे भाजपा 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश करने वाली है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
क्या अनुसूचित जनजातियाँ यूसीसी के दायरे में आएंगी?
नहीं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366(25) के तहत परिभाषित अनुसूचित जनजातियों पर यह संहिता लागू नहीं होगी। उनके विशेष संवैधानिक संरक्षण पूरी तरह बरकरार रहेंगे।
यूसीसी से बहुविवाह पर क्या असर पड़ेगा?
भट्टाचार्य के अनुसार, यूसीसी लागू होने पर उन व्यवस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा जिनमें कुछ व्यक्तिगत कानूनों के तहत बहुविवाह की अनुमति है। हालाँकि इसका विस्तृत क्रियान्वयन विधेयक के पारित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या यूसीसी से परिवार में बच्चों की संख्या तय होगी?
नहीं। भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि परिवार में बच्चों की संख्या तय करना न तो यूसीसी का उद्देश्य है और न ही इसमें ऐसा कोई प्रावधान है। यह आशंका भ्रामक है।
पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक पारित होने की कितनी संभावना है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बहुमत है और वह इस विधेयक की विरोधी रही है। ऐसे में भाजपा के लिए इसे पारित कराना राजनीतिक रूप से कठिन है। विश्लेषकों के अनुसार, यह विधेयक अभी वैचारिक संदेश देने का माध्यम अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले