29 जून 2026
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पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल: 4 पत्नी और 14 बच्चों पर रोक, समिक भट्टाचार्य ने एक्स पर किया बड़ा खुलासा

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पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल: 4 पत्नी और 14 बच्चों पर रोक, समिक भट्टाचार्य ने एक्स पर किया बड़ा खुलासा

सारांश

पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल अब सिर्फ वादा नहीं — सोमवार को विधानसभा में पेश होगा। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक्स पर साफ किया: 4 पत्नी और 14 बच्चों पर रोक लगेगी, जनजातीय समुदाय बाहर रहेंगे। गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब बंगाल की बारी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करेंगे।
BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक्स पर कहा — 4 पत्नियाँ और 14 बच्चों पर रोक लगेगी।
जनजातीय समुदाय यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगे — उत्तराखंड मॉडल के अनुरूप।
BJP ने चुनावी संकल्प पत्र में सरकार बनने के 6 महीने के भीतर यूसीसी लाने का वादा किया था।
पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य बनेगा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सोमवार, 29 जून 2026 को राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने वाले हैं। इस ऐतिहासिक कदम के बाद पश्चिम बंगाल में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति बँटवारे जैसे तमाम नागरिक मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा। गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद पश्चिम बंगाल यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

समिक भट्टाचार्य का एक्स पर बड़ा बयान

विधेयक पेश होने से पहले पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा, 'यूसीसी बिल पर सरकार पूरी प्रक्रिया को फॉलो कर रही है। भाजपा का इस मामले में क्लीयर स्टैंड रहा है। जनजातीय समुदाय यूसीसी बिल से बाहर रहेंगे। इसका काम सरकार को पता है और सरकार अपना काम करेगी।'

भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में जैसे ही BJP की सरकार बनी, तभी से यह स्पष्ट था कि यूसीसी विधेयक आएगा। उन्होंने कहा कि पहले की सरकार की तरह एक ही व्यक्ति फैसले नहीं लेता — अब पार्टी और सरकार दोनों अपने-अपने दायरे में काम कर रहे हैं और मुख्यमंत्री व मंत्रियों को हर विषय पर स्पष्ट जानकारी दी जाती है।

4 पत्नी और 14 बच्चों पर लगेगी रोक

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि 4 पत्नियाँ रखने और 14 बच्चों पर रोक लगाई जाएगी और सरकार इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करना प्राथमिकता है और इसमें कोई संदेह नहीं है।

चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान BJP ने अपने संकल्प पत्र में यूसीसी को प्रमुखता से शामिल किया था। पार्टी ने वादा किया था कि सरकार बनने के 6 महीने के भीतर राज्य में यूसीसी विधेयक लाया जाएगा। यह विधेयक उसी प्रतिबद्धता की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में यूसीसी पहले से लागू है और अन्य BJP-शासित राज्य भी इसी राह पर चल रहे हैं। जनजातीय समुदायों को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान उत्तराखंड मॉडल के अनुरूप ही है।

यूसीसी क्या है और इससे क्या बदलेगा

समान नागरिक संहिता (UCC) एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो सभी धर्मों के नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। इसके तहत विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना, संपत्ति का अधिकार और अन्य पारिवारिक मामलों में एक ही कानून प्रभावी होगा। अभी तक भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं — यूसीसी लागू होने के बाद यह विभाजन समाप्त होगा।

आगे क्या होगा

विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद इस पर बहस और मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों के रुख पर सबकी नज़र रहेगी। पश्चिम बंगाल में यूसीसी का लागू होना देश के बाकी राज्यों में इस बहस को नई गति दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर कानूनी रूप से इन्हें लागू करने की जटिलता को अभी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। जनजातीय समुदायों को छूट देना एक संवेदनशील संतुलन है — लेकिन यह सवाल भी उठता है कि यह सीमा-रेखा कहाँ खींची जाएगी। विपक्ष और अल्पसंख्यक संगठनों की प्रतिक्रिया इस विधेयक की असली राजनीतिक कीमत तय करेगी।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल क्या है और इसमें क्या प्रावधान हैं?
यह समान नागरिक संहिता विधेयक है जो राज्य में सभी धर्मों के नागरिकों पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू करेगा। इसमें 4 पत्नियाँ रखने और 14 बच्चों पर रोक का प्रावधान भी शामिल बताया जा रहा है।
क्या जनजातीय समुदाय पश्चिम बंगाल के यूसीसी से बाहर रहेंगे?
हाँ, BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि जनजातीय समुदाय यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगे। यह प्रावधान उत्तराखंड में लागू यूसीसी मॉडल के अनुरूप है।
पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल कब पेश होगा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 29 जून 2026, सोमवार को राज्य विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करने वाले हैं। BJP ने चुनाव में सरकार बनने के 6 महीने के भीतर यह बिल लाने का वादा किया था।
यूसीसी लागू होने के बाद आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
यूसीसी लागू होने के बाद शादी, तलाक, बच्चा गोद लेना, संपत्ति का अधिकार और पारिवारिक मामलों में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून प्रभावी होगा। अभी तक अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जो इस विधेयक के बाद समाप्त होंगे।
भारत के किन राज्यों में पहले से यूसीसी लागू है?
गुजरात, उत्तराखंड और असम में यूसीसी पहले से लागू है या इसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पश्चिम बंगाल इस सूची में शामिल होने वाला चौथा राज्य बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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