मेघालय मंत्रिमंडल ने यूरेनियम खनन विरोधी प्रस्ताव को दी मंजूरी, 24 अगस्त को विधानसभा में होगा पेश
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय मंत्रिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को राज्य में यूरेनियम खनन का विरोध करने वाले एक मसौदा प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने गुरुवार को इस निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि यह प्रस्ताव 24 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सदन के समक्ष रखा जाएगा। यह कदम दशकों से चले आ रहे स्थानीय विरोध और सामुदायिक चिंताओं को एक औपचारिक विधायी मंच देने की दिशा में उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रिमंडल के इस निर्णय के अनुसार, प्रस्तावित प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार यूरेनियम खनन पर अपना आधिकारिक रुख विधानसभा के समक्ष दर्ज कराएगी। प्रस्तावित खनन स्थलों में डोमियासियत, वाहकाजी और मावथाबा शामिल हैं, जो वर्षों से इस बहस के केंद्र में रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, मेघालय में भारत के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा होने का अनुमान है, जो इस मुद्दे को रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
दशकों पुराना विरोध और सामुदायिक चिंताएँ
मेघालय में यूरेनियम खनन का विरोध कई दशकों से जारी है। स्थानीय संगठनों और सामुदायिक समूहों ने खनन गतिविधियों के संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों पर बार-बार आपत्ति जताई है। यह मुद्दा राज्य में विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि मेघालय की भूमि स्वामित्व और शासन व्यवस्था अनूठी है — भूमि का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक संस्थाओं द्वारा शासित है, जिनमें स्थानीय समुदाय प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े निर्णयों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी समुदायों के हित और खनन के दीर्घकालिक प्रभाव इस विवाद के तीन प्रमुख आयाम बने हुए हैं।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में मेघालय के यूरेनियम भंडार की अनदेखी नहीं की जा सकती। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। हालाँकि, राज्य सरकार का यह प्रस्ताव स्पष्ट करता है कि स्थानीय सहमति और पर्यावरणीय सुरक्षा के बिना खनन संभव नहीं होगा। आलोचकों का कहना है कि संसाधन दोहन और स्वदेशी अधिकारों के बीच यह टकराव केवल मेघालय की नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की एक बड़ी चुनौती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव का उद्देश्य यूरेनियम खनन पर राज्य सरकार के रुख को एक औपचारिक विधायी दस्तावेज़ के रूप में दर्ज करना है। यह निर्णय मंत्रिमंडल की सर्वसम्मति से लिया गया बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस प्रस्ताव के माध्यम से वह समुदायों की आवाज़ को संस्थागत मंच देना चाहती है।
क्या होगा आगे
24 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है। यदि विधानसभा इसे पारित करती है, तो यह केंद्र सरकार को मेघालय के रुख से औपचारिक रूप से अवगत कराएगा और यूरेनियम खनन की किसी भी भावी योजना पर राज्य की स्थिति स्पष्ट करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी न होने के बावजूद राजनीतिक और नैतिक दृष्टि से केंद्र के लिए नज़रअंदाज़ करना कठिन होगा।