25 सितंबर 2026
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मेघालय CM कॉनराड संगमा ने अल नीनो से निपटने के लिए जलवायु तैयारियाँ तेज कीं

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मेघालय CM कॉनराड संगमा ने अल नीनो से निपटने के लिए जलवायु तैयारियाँ तेज कीं

सारांश

अल नीनो की अनिश्चितता के बीच मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने राज्य की जलवायु तैयारियों को नए सिरे से धार दी — पेयजल, खेती और जलग्रहण क्षेत्रों पर फोकस के साथ ब्लॉक-स्तरीय कार्रवाई टीमें बनाने का आदेश दिया। नवंबर से मार्च की खिड़की को उन्होंने सबसे नाज़ुक बताया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 25 सितंबर 2026 को मेघालय राज्य जलवायु परिवर्तन परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर अल नीनो तैयारियों की समीक्षा की।
पेयजल सुरक्षा , कृषि लचीलापन और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता दी गई।
जिलों में जलवायु जोखिम और संवेदनशीलता मानचित्रण जारी है ताकि लक्षित हस्तक्षेप तय किए जा सकें।
ब्लॉक-स्तरीय जलवायु कार्रवाई टीमों की स्थापना और जिला जलवायु अनुकूलन कार्य बलों को तुरंत सक्रिय करने के निर्देश दिए गए।
नवंबर से मार्च का समय तैयारियों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताया गया; स्पष्ट कार्य योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की अनिवार्यता पर ज़ोर।
अदरक की खेती में सड़न जैसी फसल चुनौतियों और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 25 सितंबर 2026 को राज्य अधिकारियों को अल नीनो से उत्पन्न संभावित जलवायु व्यवधानों के विरुद्ध तैयारियाँ तुरंत तेज करने के निर्देश दिए। पेयजल सुरक्षा, कृषि लचीलापन और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा को इन प्रयासों में शीर्ष प्राथमिकता दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

संगमा ने मेघालय राज्य जलवायु परिवर्तन परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राज्य की मौजूदा तैयारियों की समीक्षा की गई और आने वाले महीनों में संभावित जलवायु जोखिमों का आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि मानसून-पूर्व मौसम लगभग सामान्य रहा है, परंतु बदलते मौसम के पैटर्न को देखते हुए राज्य को अपने अनुकूलन उपायों को और सुदृढ़ करना होगा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 'अल नीनो एक वास्तविकता है, लेकिन इसके प्रभावों का पूर्वानुमान कठिन है।' उन्होंने पूर्वानुमानों पर निर्भर रहने के बजाय ठोस तैयारियों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। साथ ही यह भी बताया कि लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए जिलों में जलवायु जोखिम और संवेदनशीलता मानचित्रण का काम जारी है।

जल सुरक्षा और पारिस्थितिक लचीलापन

बैठक में जल सुरक्षा एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरी। सरकार ने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण गतिविधियों का विस्तार करने की योजना बनाई है, ताकि पारिस्थितिक लचीलापन और जल उपलब्धता दोनों को मज़बूत किया जा सके। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में वर्षा की अनिश्चितता बढ़ रही है।

कृषि क्षेत्र पर ध्यान

संगमा ने कृषि क्षेत्र के लचीलेपन को मज़बूत करने के उपायों की भी समीक्षा की। विभागों के बीच बेहतर समन्वय और किसान-से-किसान प्रशिक्षण पहलों के ज़रिये प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने अदरक की खेती को प्रभावित करने वाली सड़न जैसी फसल चुनौतियों पर भी चर्चा की, जो राज्य के किसानों के लिए एक अहम मुद्दा है।

ब्लॉक-स्तरीय कार्रवाई टीमें और समन्वय

बैठक में ब्लॉक-स्तरीय जलवायु कार्रवाई टीमों की स्थापना पर विशेष चर्चा हुई, ताकि जमीनी स्तर तक जलवायु तैयारी सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिला जलवायु अनुकूलन और लचीलापन कार्य बलों को तुरंत सक्रिय करने और सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने का निर्देश दिया। निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी जागरूकता अभियानों में शामिल किया जाएगा।

आगे की राह

संगमा ने स्पष्ट किया कि नवंबर से मार्च के बीच का समय तैयारियों की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विभिन्न संभावित जलवायु परिदृश्यों से निपटने के लिए स्पष्ट कार्य योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की अनिवार्यता पर जोर दिया। गौरतलब है कि अल नीनो का प्रभाव न केवल मेघालय बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की कृषि और जल व्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे यह पहल क्षेत्रीय महत्व रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — ब्लॉक-स्तरीय टीमों की घोषणाएँ पहले भी हो चुकी हैं और अक्सर संसाधनों की कमी में दम तोड़ देती हैं। अल नीनो के प्रभाव पूरे पूर्वोत्तर में असमान हो सकते हैं, इसलिए केवल राज्यस्तरीय समन्वय पर्याप्त नहीं — केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साथ डेटा-साझाकरण ज़रूरी है। अदरक-सड़न जैसी फसल चुनौतियाँ बताती हैं कि जलवायु जोखिम पहले से ही किसानों की आजीविका को नुकसान पहुँचा रहा है, जिसे केवल 'तैयारी' नहीं बल्कि तत्काल राहत उपायों की भी ज़रूरत है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय में अल नीनो से क्या ख़तरा है?
अल नीनो के कारण मेघालय में मानसून की अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे पेयजल आपूर्ति, जलग्रहण क्षेत्र और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। राज्य सरकार के अनुसार इसके प्रभावों का पूर्वानुमान कठिन है, इसलिए व्यापक तैयारी अनिवार्य है।
मेघालय राज्य जलवायु परिवर्तन परिषद की बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में जलवायु जोखिम मानचित्रण, ब्लॉक-स्तरीय जलवायु कार्रवाई टीमों की स्थापना और जिला जलवायु अनुकूलन कार्य बलों को तुरंत सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। साथ ही जल स्रोतों के पुनरुद्धार और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
मेघालय में जल सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण गतिविधियों का विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य पारिस्थितिक लचीलापन बढ़ाना और दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कॉनराड संगमा ने किस समय को जलवायु तैयारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया?
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने नवंबर से मार्च के बीच के समय को तैयारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। इस अवधि के लिए स्पष्ट कार्य योजनाएँ और मानक संचालन प्रक्रियाएँ तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
मेघालय में कृषि को अल नीनो से बचाने के लिए क्या योजना है?
सरकार किसान-से-किसान प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। अदरक की खेती में सड़न जैसी फसल चुनौतियों से निपटने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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