मेघालय CM कॉनराड संगमा ने अल नीनो से निपटने के लिए जलवायु तैयारियाँ तेज कीं
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 25 सितंबर 2026 को राज्य अधिकारियों को अल नीनो से उत्पन्न संभावित जलवायु व्यवधानों के विरुद्ध तैयारियाँ तुरंत तेज करने के निर्देश दिए। पेयजल सुरक्षा, कृषि लचीलापन और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा को इन प्रयासों में शीर्ष प्राथमिकता दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
संगमा ने मेघालय राज्य जलवायु परिवर्तन परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राज्य की मौजूदा तैयारियों की समीक्षा की गई और आने वाले महीनों में संभावित जलवायु जोखिमों का आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि मानसून-पूर्व मौसम लगभग सामान्य रहा है, परंतु बदलते मौसम के पैटर्न को देखते हुए राज्य को अपने अनुकूलन उपायों को और सुदृढ़ करना होगा।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 'अल नीनो एक वास्तविकता है, लेकिन इसके प्रभावों का पूर्वानुमान कठिन है।' उन्होंने पूर्वानुमानों पर निर्भर रहने के बजाय ठोस तैयारियों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। साथ ही यह भी बताया कि लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए जिलों में जलवायु जोखिम और संवेदनशीलता मानचित्रण का काम जारी है।
जल सुरक्षा और पारिस्थितिक लचीलापन
बैठक में जल सुरक्षा एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरी। सरकार ने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण गतिविधियों का विस्तार करने की योजना बनाई है, ताकि पारिस्थितिक लचीलापन और जल उपलब्धता दोनों को मज़बूत किया जा सके। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में वर्षा की अनिश्चितता बढ़ रही है।
कृषि क्षेत्र पर ध्यान
संगमा ने कृषि क्षेत्र के लचीलेपन को मज़बूत करने के उपायों की भी समीक्षा की। विभागों के बीच बेहतर समन्वय और किसान-से-किसान प्रशिक्षण पहलों के ज़रिये प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने अदरक की खेती को प्रभावित करने वाली सड़न जैसी फसल चुनौतियों पर भी चर्चा की, जो राज्य के किसानों के लिए एक अहम मुद्दा है।
ब्लॉक-स्तरीय कार्रवाई टीमें और समन्वय
बैठक में ब्लॉक-स्तरीय जलवायु कार्रवाई टीमों की स्थापना पर विशेष चर्चा हुई, ताकि जमीनी स्तर तक जलवायु तैयारी सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिला जलवायु अनुकूलन और लचीलापन कार्य बलों को तुरंत सक्रिय करने और सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने का निर्देश दिया। निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी जागरूकता अभियानों में शामिल किया जाएगा।
आगे की राह
संगमा ने स्पष्ट किया कि नवंबर से मार्च के बीच का समय तैयारियों की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विभिन्न संभावित जलवायु परिदृश्यों से निपटने के लिए स्पष्ट कार्य योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की अनिवार्यता पर जोर दिया। गौरतलब है कि अल नीनो का प्रभाव न केवल मेघालय बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की कृषि और जल व्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे यह पहल क्षेत्रीय महत्व रखती है।