15 अक्टूबर 2026
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अल नीनो फरवरी 2027 तक चरम पर: तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू की चेतावनी, तापमान 2-3°C बढ़ा

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अल नीनो फरवरी 2027 तक चरम पर: तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू की चेतावनी, तापमान 2-3°C बढ़ा

सारांश

तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू की चेतावनी — अल नीनो का असर गंभीर है और फरवरी 2027 तक यह चरम पर पहुँच सकता है। सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में घटता जलस्तर, भूजल में गिरावट और फसलों पर संकट — राज्य सरकार ने हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात किए।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने 15 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि अल नीनो का असर फरवरी 2027 तक चरम पर पहुँच सकता है।
अल नीनो के कारण मानसून प्रभावित हुआ है और तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है।
सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में जल भंडारण घट रहा है; भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण सिंचाई कठिन हो सकती है।
राज्य के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं; हैदराबाद, संगारेड्डी, कामारेड्डी, निजामाबाद और मेडक जिलों में पेयजल आपूर्ति की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को अगले 15 से 20 दिनों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए समन्वित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुद्दे पर गुरुवार शाम की कैबिनेट बैठक में विस्तार से चर्चा होनी थी।

तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि अल नीनो का प्रभाव फिलहाल बेहद गंभीर है और फरवरी 2027 तक इसके चरम पर पहुँचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस मौसमी घटना के कारण मानसून बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राज्य में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य सचिव का क्षेत्रीय दौरा और समीक्षा

जाजू ने संगारेड्डी जिले में अपना क्षेत्रीय दौरा शुरू किया, जहाँ उन्होंने सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में पानी के स्तर का निरीक्षण किया। सिंगूर बांध के दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह जानकारी साझा की। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी आयोजित की, जिसमें हैदराबाद के साथ-साथ संगारेड्डी, कामारेड्डी, निजामाबाद और मेडक जिलों में पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की आकस्मिक कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई।

पेयजल और फसलों पर संकट

मुख्य सचिव ने बताया कि सिंगूर बांध का दौरा पेयजल की उपलब्धता और खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण बिजली उपलब्ध होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल हो सकता है। इसे देखते हुए अधिकारियों को पेयजल की ज़रूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

जाजू ने कहा कि अगले 15 से 20 दिन खेतों में खड़ी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करते हुए खड़ी फसलों को बचाने का निर्देश दिया और कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को मौके पर ही आवश्यक मार्गदर्शन देने को कहा।

सरकार की प्रतिक्रिया और तैयारियाँ

राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी तैनात करने का निर्णय लिया है। जिला कलेक्टर की निगरानी में बिजली और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के बीच उपलब्ध रहेंगे, ताकि जमीनी स्थिति के अनुरूप आवश्यक योजनाएँ तैयार की जा सकें। मुख्य सचिव ने कहा कि गुरुवार शाम होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

जाजू ने अधिकारियों को अगले 15 दिनों के लिए पानी की उपलब्धता का आकलन करने और उसके अनुसार संचालन संबंधी कदम उठाने को कहा। सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में जल भंडारण घटने के मद्देनजर उन्होंने उपलब्ध जल संसाधनों के कुशल उपयोग और एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने पर ज़ोर दिया।

कृषि और बिजली विभाग को समन्वय के निर्देश

मुख्य सचिव ने कृषि, बिजली और सिंचाई विभागों को मौजूदा मौसम की स्थिति और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। कृषि संबंधी ज़रूरतों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश बिजली विभाग को दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्वयं जमीनी स्थिति का आकलन करने और आम लोगों को सरकार के एहतियाती कदमों के बारे में जागरूक करने को भी कहा।

आगे क्या

यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्से अनियमित मानसून और जल संकट से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि अल नीनो की घटनाएँ वैश्विक स्तर पर कृषि और जलापूर्ति को गहरे तौर पर प्रभावित करती हैं। तेलंगाना सरकार की त्वरित समीक्षा और जिला-स्तरीय तैनाती यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में जल प्रबंधन राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये कदम समय पर पर्याप्त साबित होंगे। अल नीनो की चेतावनी नई नहीं है — मौसम विज्ञान एजेंसियाँ महीनों पहले से इसके संकेत दे रही थीं, फिर भी जलाशयों का घटता स्तर और भूजल की गिरावट दर्शाती है कि पूर्व-तैयारी पर्याप्त नहीं थी। फसल बचाने के लिए 'अगले 15 से 20 दिन महत्वपूर्ण' बताना एक स्वीकारोक्ति भी है कि संकट पहले ही दरवाज़े पर है। दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीति और किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा जाल के बिना, हर अल नीनो चक्र में यही आपातकालीन समन्वय दोहराया जाएगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल नीनो का तेलंगाना पर क्या असर पड़ रहा है?
तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू के अनुसार, अल नीनो के कारण राज्य में मानसून बुरी तरह प्रभावित हुआ है और तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में जलस्तर घट रहा है और भूजल में भी भारी गिरावट आई है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अल नीनो फरवरी 2027 तक चरम पर क्यों पहुँचेगा?
तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने कहा कि मौजूदा अल नीनो प्रभाव बेहद गंभीर है और फरवरी 2027 तक इसके चरम पर पहुँचने की आशंका है। अल नीनो एक चक्रीय मौसमी घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से जुड़ी है और इसका असर कई महीनों तक बना रहता है।
तेलंगाना सरकार ने जल संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने राज्य के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी तैनात किए हैं और जिला कलेक्टर की निगरानी में बिजली व कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों के बीच उपलब्ध रहने के निर्देश दिए हैं। हैदराबाद, संगारेड्डी, कामारेड्डी, निजामाबाद और मेडक जिलों में पेयजल आपूर्ति की आकस्मिक कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई है।
सिंगूर बांध का दौरा क्यों किया गया?
मुख्य सचिव संजय जाजू ने सिंगूर बांध का दौरा पेयजल की उपलब्धता और खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए किया। इस दौरान सिंगूर और मंजीरा जलाशयों में घटते जलस्तर की समीक्षा की गई और अधिकारियों को जल संसाधनों के कुशल उपयोग के निर्देश दिए गए।
अल नीनो से किसानों पर क्या खतरा है और सरकार क्या कर रही है?
मुख्य सचिव के अनुसार, अगले 15 से 20 दिन खेतों में खड़ी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भूजल स्तर में गिरावट के कारण बिजली उपलब्ध होने के बावजूद सिंचाई कठिन हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को मौके पर मार्गदर्शन देने और फसलों की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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