तेलंगाना के 320 मंडलों में सूखे का संकट, मुख्य सचिव ने अक्टूबर अंत तक रिपोर्ट माँगी
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के 18 जिलों के 320 मंडलों में अल नीनो के प्रभाव से गंभीर सूखे के शुरुआती संकेत मिले हैं, जो राज्य के कुल 33 जिलों के 621 मंडलों में से आधे से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्य सचिव संजय जाजू ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों को अक्टूबर के अंत तक विस्तृत सूखा रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्य घटनाक्रम
30 सितंबर 2026 को समाप्त हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान तेलंगाना में सामान्य से 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। इससे पहले अधिकारियों ने लगभग 235 मंडलों में सूखे जैसी स्थिति का अनुमान लगाया था, लेकिन नवीनतम समीक्षा में यह आँकड़ा बढ़कर 320 मंडल तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि अल नीनो की यह मार राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।
मुख्य सचिव जाजू ने योजना, राजस्व, भूजल, कृषि, पंचायत राज और ग्रामीण जल आपूर्ति विभागों से समन्वित रूप से आँकड़े जुटाने को कहा। सूखा प्रभावित मंडलों की पहचान जून से सितंबर के मानसून के दौरान हुई बारिश समेत 12 निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी।
सरकार की प्रतिक्रिया
पिछले सप्ताह हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अल नीनो के प्रभाव पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और राजनीतिक दलों से सुझाव लेने का निर्णय लिया गया था। एक कैबिनेट उपसमिति को हालात का समग्र आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य सचिव ने सर्वदलीय बैठक के लिए भी सभी आवश्यक आँकड़ों और तथ्यों के साथ रिपोर्ट तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक में वित्त विभाग के प्रमुख सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल बोझ्जा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्र से राहत का अनुरोध
राज्य सरकार ने तय किया है कि मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार को आधिकारिक रिपोर्ट सौंपेगा। केंद्र से प्रभावित मंडलों को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने और राहत कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया जाएगा। यह कदम राज्य सरकारी नियमों और निर्धारित मानकों के अनुसार सूखा घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
आम जनता पर असर
तेलंगाना मुख्यतः एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ खरीफ फसल के लिए मानसून की बारिश पर निर्भरता अधिक है। 17 प्रतिशत कम वर्षा का सीधा असर धान, कपास और दलहन की पैदावार पर पड़ने की आशंका है। इससे किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और पेयजल आपूर्ति — तीनों पर दबाव बढ़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भूजल स्तर पहले से कई जिलों में चिंताजनक स्थिति में है।
आगे क्या होगा
सरकारी प्रक्रिया के अनुसार अक्टूबर के अंत तक विस्तृत सूखा रिपोर्ट तैयार होनी है। इसके बाद केंद्र को रिपोर्ट सौंपने, सर्वदलीय बैठक और संभावित सूखा घोषणा की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर केंद्रीय सहायता मिलने से किसानों को मुआवजा और राहत कार्य सुनिश्चित किए जा सकेंगे।